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संदिग्ध देखे जाने की सूचना पर चलाया सर्च अभियान
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ज्यौड़ियां। खौड़ उपजिले की पंचायत जोगवां के गांव कलाह में संदिग्ध देखे जाने की सूचना पर सर्च अभियान चलाया गया। सूत्रों के अनुसार सेना के 52 ब्रिगेड में को फोन से संदिग्धों के बारे में सूचना मिली थी कि क्षेत्र में हथियारों से लैस दो संदिग्ध देखे गए हैं। बाद में स्थिति साफ हुई कि यह एक अफवाह थी।
जानकारी के अनुसार शनिवार की सुबह जब गांव के लोग उठे तो गांव को सेना तथा पुलिस के घेरे में पाया। बताया जाता है कि सेना को सुबह करीब तीन बजे किसी ने फोन पर सूचना दी कि कलाह गांव में हथियारों के साथ दो संदिग्ध घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही सेना तथा खौड़ पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव कलाह में पहुंच कर गांव के आसपास के क्षेत्र में सर्च आपरेशन शुरू कर दिया। सेना ने दोपहर 12 बजे तक क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा। गांव कलाह निवासी खेमराज शर्मा, सुरेश कुमार तथा नंबरदार गोपाल दास ने बताया कि संदिग्ध देखे जाने की बात अफवाह रही। ऐसा कुछ भी नहीं रहा, जिनको लोगों ने आतंकवादी समझ कर सेना को फोन किया वह आतंकवादी नहीं बक्करबाल समुदाय के लोग थे। दरअसल गांव निवासी जनक राज, गिरधारी लाल तथा बरेयाम चंद के खेतों में लगी गेहूं तथा सरसों की फसल को बक्करवालों के घोड़े बर्बाद कर रहे थे और इनको अपने घर लाकर बांधा गया था।
रात को जिनको लोगों ने आतंकवादी समझ कर सेना को फोन कि वह आतंकवादी नहीं घोड़ों के मालिक बक्करवाल थे जो अपने घोड़ों को ले जाने के लिए आए थे। सेना के अधिकारियों ने पूरी स्थिति स्पष्ट होने पर क्षेत्र से सेना को हटा दिया।
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जानकारी के अनुसार शनिवार की सुबह जब गांव के लोग उठे तो गांव को सेना तथा पुलिस के घेरे में पाया। बताया जाता है कि सेना को सुबह करीब तीन बजे किसी ने फोन पर सूचना दी कि कलाह गांव में हथियारों के साथ दो संदिग्ध घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही सेना तथा खौड़ पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गांव कलाह में पहुंच कर गांव के आसपास के क्षेत्र में सर्च आपरेशन शुरू कर दिया। सेना ने दोपहर 12 बजे तक क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा। गांव कलाह निवासी खेमराज शर्मा, सुरेश कुमार तथा नंबरदार गोपाल दास ने बताया कि संदिग्ध देखे जाने की बात अफवाह रही। ऐसा कुछ भी नहीं रहा, जिनको लोगों ने आतंकवादी समझ कर सेना को फोन किया वह आतंकवादी नहीं बक्करबाल समुदाय के लोग थे। दरअसल गांव निवासी जनक राज, गिरधारी लाल तथा बरेयाम चंद के खेतों में लगी गेहूं तथा सरसों की फसल को बक्करवालों के घोड़े बर्बाद कर रहे थे और इनको अपने घर लाकर बांधा गया था।
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रात को जिनको लोगों ने आतंकवादी समझ कर सेना को फोन कि वह आतंकवादी नहीं घोड़ों के मालिक बक्करवाल थे जो अपने घोड़ों को ले जाने के लिए आए थे। सेना के अधिकारियों ने पूरी स्थिति स्पष्ट होने पर क्षेत्र से सेना को हटा दिया।
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