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कश्मीर के अखबार के संपादक को तीन दहाई पुराने मामले में पुलिस ने किया गिरफ्तार
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श्रीनगर। कश्मीर के एक स्थानीय अखबार के संपादक को पुलिस ने देर रात घर से गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई तीन दशक पुराने मामले में की गई। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। अदालत ने पुलिस से मामले पर रिपोर्ट मांगी है।
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार देर रात करीब साढ़े ग्यारह बजे पुलिस स्टेशन शहीद गंज की एक पुलिस पार्टी ने एक उर्दू अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार गुलाम जिलानी कादरी (62) के घर पर छापा मारा और उन्हें अपने साथ ले गई। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई लगभग तीन दशक पुराने एक मामले में की गई है। अदालत ने कादरी के खिलाफ वारंट भी निकाला था, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। गिरफ्तारी के बाद कादरी को सीजेएम गौहर मजीद दलाल ने जमानत पर रिहा कर दिया। कादरी को 20 हजार रुपए के बांड के एवज में रिहाई मिली है। साथ ही कोर्ट द्वारा एसएचओ को मामले में अपना पक्ष रखने के साथ-साथ इस मामले में पुलिस द्वारा अभी तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2019 को है।
-1990 में दर्ज हुआ था मामला
बता दें की गुलाम जिलानी कादरी के खिलाफ मामला 15 दिसंबर 1990 में दर्ज किया गया था। कोर्ट ने पुलिस से कादरी को भगोड़ा करार देने को लेकर भी सफाई मांगी है। क्योंकि मामला दर्ज करने के बाद भी दो बार कादरी को पासपोर्ट दिया गया है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में तीन अन्य पत्रकारों का भी नाम है, जिनकी मौत हो चुकी है।
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मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार देर रात करीब साढ़े ग्यारह बजे पुलिस स्टेशन शहीद गंज की एक पुलिस पार्टी ने एक उर्दू अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार गुलाम जिलानी कादरी (62) के घर पर छापा मारा और उन्हें अपने साथ ले गई। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई लगभग तीन दशक पुराने एक मामले में की गई है। अदालत ने कादरी के खिलाफ वारंट भी निकाला था, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। गिरफ्तारी के बाद कादरी को सीजेएम गौहर मजीद दलाल ने जमानत पर रिहा कर दिया। कादरी को 20 हजार रुपए के बांड के एवज में रिहाई मिली है। साथ ही कोर्ट द्वारा एसएचओ को मामले में अपना पक्ष रखने के साथ-साथ इस मामले में पुलिस द्वारा अभी तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2019 को है।
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-1990 में दर्ज हुआ था मामला
बता दें की गुलाम जिलानी कादरी के खिलाफ मामला 15 दिसंबर 1990 में दर्ज किया गया था। कोर्ट ने पुलिस से कादरी को भगोड़ा करार देने को लेकर भी सफाई मांगी है। क्योंकि मामला दर्ज करने के बाद भी दो बार कादरी को पासपोर्ट दिया गया है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में तीन अन्य पत्रकारों का भी नाम है, जिनकी मौत हो चुकी है।
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