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आग की लपटो से धधकने लगे हरे भरे जंगल।
Updated Tue, 22 May 2018 02:20 PM IST
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रियासी। गर्मी शुरू होते ही जंगलों में आग लगने की घटनाओं में भी बढ़ोतरी होने लगी है। रियासी के साथ ही पौनी के साथ सटे कई जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। जंगलों में आग लगने के बाद उसमें करोड़ों रुपये की वन संपदा जल कर तबाह हो गई है। आने वाले दिनों में कुछ अन्य जंगल भी आग की चपेट में आकर के जल सकते है।
मौजूदा समय के दौरान रियासी के अंजी ग्रामोड़ की पहाड़ियों के साथ ह श्री माता वैैष्णो देवी के पीछे स्थित पहाड़ियों पर भी आग लगी हुई है। इन पहाड़ियों पर से पूरा दिन आग का धुआं निकलते हुए देखा जा सकता है दूसरी तरफ शाम को अंधेरा होने के बाद आग की लपटें भी साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। काफी दूर होने के कारण आग बुझाने के भी असफल प्रयास हो रहे हैं। इसके लिए बारिश होने का इंतजार किया जा रहा है ताकि उसके पानी से जंगल में लगी आग बुझ सके। इसके अलावा पौनी के कालीधार क्षेत्र के जंगल भी पिछले तीन दिन से जल रहे हैं। अभी तक जंगल की काफी वन संपदा जल कर राख हो गई है। वन विभाग ने आग बुझाने का काम किया है, लेकिन उसके बावजूद भी रह रह कर धुआं निकल रहा है। थोड़ी सी भी हवा चलने के बाद आग फिर से भड़क उठती है।
गौरतलब है कि हर वर्ष गर्मी का मौसम शुरू होने के बाद इन जंगलों के अलावा श्री सियाड़ बाबा धरान सलाल बातलगला के जंगल जलना शुरू हो जाते हैं। बताया जाता है कि इन जंगलों में आग वहां के स्थानीय लोग लगाते हैं, ताकि घास की अच्छी पैदावार हो सके, लेकिन मात्र कुछ फायदे के लिए थोड़ी सी जगह पर लगाई जाने वाली आग हवा के साथ-साथ जंगल के अन्य हिस्सों को भी अपनी चपेट में ले लेती है जिसके बाद वन संपदा तबाह व राख हो जाती है। जंगली जानवर भी इसकी चपेट में आते हैं।
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मौजूदा समय के दौरान रियासी के अंजी ग्रामोड़ की पहाड़ियों के साथ ह श्री माता वैैष्णो देवी के पीछे स्थित पहाड़ियों पर भी आग लगी हुई है। इन पहाड़ियों पर से पूरा दिन आग का धुआं निकलते हुए देखा जा सकता है दूसरी तरफ शाम को अंधेरा होने के बाद आग की लपटें भी साफ तौर पर देखी जा सकती हैं। काफी दूर होने के कारण आग बुझाने के भी असफल प्रयास हो रहे हैं। इसके लिए बारिश होने का इंतजार किया जा रहा है ताकि उसके पानी से जंगल में लगी आग बुझ सके। इसके अलावा पौनी के कालीधार क्षेत्र के जंगल भी पिछले तीन दिन से जल रहे हैं। अभी तक जंगल की काफी वन संपदा जल कर राख हो गई है। वन विभाग ने आग बुझाने का काम किया है, लेकिन उसके बावजूद भी रह रह कर धुआं निकल रहा है। थोड़ी सी भी हवा चलने के बाद आग फिर से भड़क उठती है।
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गौरतलब है कि हर वर्ष गर्मी का मौसम शुरू होने के बाद इन जंगलों के अलावा श्री सियाड़ बाबा धरान सलाल बातलगला के जंगल जलना शुरू हो जाते हैं। बताया जाता है कि इन जंगलों में आग वहां के स्थानीय लोग लगाते हैं, ताकि घास की अच्छी पैदावार हो सके, लेकिन मात्र कुछ फायदे के लिए थोड़ी सी जगह पर लगाई जाने वाली आग हवा के साथ-साथ जंगल के अन्य हिस्सों को भी अपनी चपेट में ले लेती है जिसके बाद वन संपदा तबाह व राख हो जाती है। जंगली जानवर भी इसकी चपेट में आते हैं।
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