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बेजुबान घोड़े की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, मुआवजे में देने पड़ेंगे 50 हजार
Updated Tue, 27 Nov 2018 01:31 AM IST
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जम्मू। एक बेजुबान घोड़े की मौत पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए बिजली विभाग को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का फरमान सुनाया है। मानवाधिकार आयोग घोड़े की मौत को लेकर तब सख्त हो गया, जब एक फरियादी ने अपनी आजीविका का सहारा खत्म हो जाने की दुहाई दी।
बसीर अहमद भट अपने परिवार के साथ दादा ओमपोरा बडगाम में रहते हैं। पिछले साल उन्होंने अपनी आजीविका के लिए एक घोड़ा खरीदा था, लेकिन 6 मई, 2017 को जब वह पास के मैदान में चरने गया तो टूटे पड़े बिजली के तार के चपेट में आकर मर गया। जब उन्होंने इसकी शिकायत बिजली विभाग के अधिकारियों से की, तो विभाग ने पलड़ा झाड़ लिया। काफी प्रयास के बाद भी उन्हें विभाग से इंसाफ नहीं मिला। विभाग ने अपनी गलती मानने से भी इनकार कर दिया। पीड़ित बसीर ने इसके बाद मानवाधिकार आयोग में अपनी फरियाद लेकर पहुंचा। यहां आयोग ने मामले पर संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित कर दी। जांच रिपोर्ट से पता चला कि क्षेत्र में बिजली के तार खतरनाक हालत में लगे हुए थे। बिजली विभाग की लापरवाही के चलते ही पीड़ित बसीर के घोड़े की करंट लगने से मौत हो गई। इस मामले में आयोग के चेयरमैन जस्टिस (सेवानिवृत्त) बिलाल नजकी ने बिजली विकास विभाग (पीपीडी) को 50 हजार रुपए बतौर मुआवजा पीड़ित को देने का फरमान सुनाया है। करीब डेढ़ साल बाद पीड़ित को आयोग के जरिए न्याय मिला। आयोग ने मामले में पीपीडी को छह हफ्ते में कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट देने का आदेश भी दिया है।
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बसीर अहमद भट अपने परिवार के साथ दादा ओमपोरा बडगाम में रहते हैं। पिछले साल उन्होंने अपनी आजीविका के लिए एक घोड़ा खरीदा था, लेकिन 6 मई, 2017 को जब वह पास के मैदान में चरने गया तो टूटे पड़े बिजली के तार के चपेट में आकर मर गया। जब उन्होंने इसकी शिकायत बिजली विभाग के अधिकारियों से की, तो विभाग ने पलड़ा झाड़ लिया। काफी प्रयास के बाद भी उन्हें विभाग से इंसाफ नहीं मिला। विभाग ने अपनी गलती मानने से भी इनकार कर दिया। पीड़ित बसीर ने इसके बाद मानवाधिकार आयोग में अपनी फरियाद लेकर पहुंचा। यहां आयोग ने मामले पर संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित कर दी। जांच रिपोर्ट से पता चला कि क्षेत्र में बिजली के तार खतरनाक हालत में लगे हुए थे। बिजली विभाग की लापरवाही के चलते ही पीड़ित बसीर के घोड़े की करंट लगने से मौत हो गई। इस मामले में आयोग के चेयरमैन जस्टिस (सेवानिवृत्त) बिलाल नजकी ने बिजली विकास विभाग (पीपीडी) को 50 हजार रुपए बतौर मुआवजा पीड़ित को देने का फरमान सुनाया है। करीब डेढ़ साल बाद पीड़ित को आयोग के जरिए न्याय मिला। आयोग ने मामले में पीपीडी को छह हफ्ते में कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट देने का आदेश भी दिया है।
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