खुलासा: आतंकी सुनैन को मिला था जम्मू में सिलेक्टिव किलिंग का टारगेट, इन लोगों को मिल चुकी है धमकी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Mon, 27 Sep 2021 02:35 AM IST

सार

आतंकी सुनैन ने जम्मू के रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़नी थी। अब इसे ट्रेन पकड़ कर कहां जाना था, यह फिलहाल जांच का विषय है। इसके दिल्ली जाने की आशंका है।
आतंकवाद
आतंकवाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जम्मू रेलवे स्टेशन के पास पकड़े गए आतंकी सुनैन से कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। उसको जम्मू में किसी व्यक्ति विशेष को मारने (सिलेक्टिव किलिंग) का टारगेट दिया गया था। आतंकी अपने हैंडलरों से डार्कबेव एप के जरिये बात करता था। यह एक ऐसा एप है, जिसमें होने वाली बात की पुलिस अधिकारिक तौर पर कोई भी जानकारी हासिल नहीं कर सकती। आमतौर पर आतंकी व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे एप का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि यह आतंकी डार्कबेव का इस्तेमाल कर रहा था, ताकि इसके पकड़े जाने पर भी कोई जानकारी लीक न हो।
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सूत्रों के अनुसार वह किसी पुलिस अफसर या फिर किसी नेता को मारने आया था, क्योंकि उसको सिलेक्टिव टारगेट दिया गया था। यही कारण है कि इसको लोडिड पिस्टल देकर भेजा गया था, ताकि हत्या करने के बाद वह फरार हो सके। लेकिन पुलिस ने पुख्ता सूचना के आधार पर इसे पहले ही दबोच लिया। सुनैन पिछले डेढ़ साल से टीआरएफ के लिए काम कर रहा है।


रेलवे स्टेशन से पकड़नी थी ट्रेन
जानकारी के अनुसार आतंकी सुनैन ने जम्मू के रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़नी थी। अब इसे ट्रेन पकड़ कर कहां जाना था, यह फिलहाल जांच का विषय है। इसके दिल्ली जाने की आशंका है। सवाल यह भी है कि यदि इसे किसी व्यक्ति विशेष को मारने का टारगेट दिया गया था तो वह दिल्ली जाकर किसको मारना चाहता था? इसे लेकर भी आतंकी से गहन पूछताछ की जा रही है।
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: किसे मारने आया था आतंकी सुनैन? दिल्ली में कोई निशाने पर था? अब तक ये बातें आईं सामने

बठिंडी में तीन दिन से रह रहा था
सूत्रों का कहना है कि आतंकी सुनैन तीन दिन पहले ही कश्मीर से जम्मू पहुंचा था। वह बठिंडी में टीआरएफ आतंकी संगठन के लिए काम करने वाले ओजी वर्करों के पास रह रहा था। वह कश्मीर से ही पिस्टल लेकर आया था, जो गोलियों से भरी हुई थी। रविवार सुबह 11 बजे बठिंडी से ही निकला था। जिसको एक ओजी वर्कर ने अपनी स्कूटी पर बिठाया और रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए आने लगा, क्योंकि पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को पहले से ही आतंकी की भनक लग गई थी, इसलिए पहले ही नाका लगाया लिया गया और इसे पकड़ लिया गया।

कौन था सिलेक्टिव किलिंग का निशाना?

पहली बार किसी आतंकी को जम्मू में सिलेक्टिव किलिंग के लिए भेजा गया है। यह एक बड़ी चुनौती पुलिस के सामने खड़ी हुई है, क्योंकि अब तक जम्मू में भेजे जाने वाले आतंकियों को सिलेक्टिव किलिंग का टारगेट नहीं मिलता था। आतंकियों को किसी एक जगह पर हमला करने का टारगेट मिलता था। चाहे फिर वह कोई सैन्य शिविर हो या कोई सार्वजनिक स्थल, लेकिन उक्त आतंकी किसी व्यक्ति विशेष की हत्या करने आया था। अब सवाल यह है कि उक्त आतंकी का टारगेट कौन था? फिलहाल इसका जवाब ढूंढने में सुरक्षा एजेंसियां जुटी हुई हैं।

ये हो चुके सिलेक्टिव किलिंग का शिकार
किश्तवाड़ में भाजपा नेता अनिल परिहार और उनके भाई अजीत परिहार की हत्या सिलेक्टिव थी। किश्तवाड़ में ही आरएसएस नेता चंद्रकांत शर्मा की सिलेक्टिव किलिंग हुई। कश्मीर में सब इंस्पेक्टर अरशद अहमद, अच्छाबल पुलिस स्टेशन के एसएचओ फिरोज अहमद डार भी सलेक्टिव किलिंग में शहीद हुए थे।

जम्मू के इन लोगों को मिल चुकी आतंकी धमकी

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना को आतंकी जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें आतंकी साफ कहता हुआ नजर आ रहा था कि रविंद्र रैना कश्मीर को लेकर बोलना बंद कर दे। जबकि रैना को दो बार एक पत्र लिखकर भी जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। पूर्व मंत्री रमण भल्ला और जम्मू के एक उद्योगपति को भी जान से मारने की धमकी मिल चुकी है।

ये है टीआरएफ, 370 हटने के बाद बना संगठन
द रजिस्टेंस फ्रंट यानी टीआरएफ, यह आतंकी तंजीम पाकिस्तान में चलाए जाने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए तैयबा का ही एक हिस्सा है। इसका गठन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद किया गया। इस संगठन में लश्कर कश्मीर के स्थानीय आतंकियों को भर्ती करता है। पाकिस्तान ने खुद को विश्व की नजरों से बचाने के लिए इस नए संगठन को बनाया, क्योंकि लश्कर-ए तैयबा, जैश-ए मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन संगठन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित किया जा चुका है। इन संगठनों को वित्तीय मदद मिलना भी बंद हो चुकी है।

पाकिस्तान में बैठे लश्कर के हैंडलर दे रहे टारगेट

इस संगठन को विशेष तौर पर गठित करके कश्मीर और जम्मू में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने का टारगेट दिया गया है। पिछले दो साल से इस संगठन के आतंकी कश्मीर में हमले कर रहे हैं। 2019 में टीआरएफ आतंकियों ने कश्मीर के बारामूला में एलओसी पर पांच भारतीय सैनिकों को शहीद कर दिया था। जम्मू के बठिंडी में 27 जून, 2021 को पांच किलो आईईडी के साथ पकड़ा गया आतंकी भी टीआरएफ का था। टीआरएफ के आतंकियों को पाकिस्तान में बैठे लश्कर के हैंडलर सिलेक्टिव किलिंग का टारगेट देते हैं।

इसी साल पकड़ा गया टीआरएफ कमांडर
टीआरएफ के कमांडर जाहूर अहमद को फरवरी में जम्मू के बाड़ी ब्राह्मणा से पकड़ा गया। वह कश्मीर के कुलगाम में तीन भाजपा कार्यकर्ताओं हुसैन जट्टू, उमर रशीद बेग और उमर रमजान की हत्या में शामिल रहा है।
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