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निर्दोष लोगों की हत्या किए जाने से क्षेत्र के लोगों में रोष
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अखनूर। कश्मीर घाटी में आतंकियों द्वारा निर्दोष लोगों की हत्या किए जाने से क्षेत्र के लोगों में रोष है। लोगों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि घाटी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाए और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सरपंच अंजू शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लगातार शांति और विकास की राह पर चलने पर कुछ देशविरोधी ताकतें कुछ विशेष समुदाय के लोगों की हत्या कर माहौल खराब करने तुली हैं। पाकिस्तान से राजनीतिक संबंध खत्म और विश्व क्रिकेट प्रतियोगिता रद्द करनी चाहिए। दुकानदार गौरव शर्मा ने बताया कि राज्य में आतंकवाद का बढ़ावा पाकिस्तान की शह पर हो रहा है। सुरक्षा बलों को दुश्मनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके खत्म करना चाहिए। तभी आतंकवाद पर रोक लग सकती है। उन्होंने कहा कि घाटी में निर्दोष लोगों की हत्याएं करके अशांति फैलाने की फिराक में है। सुरक्षा बल कभी भी ऐसी देश विरोधी ताकतों को सफल नहीं होने देंगे। इस अग्रणी क्रिकेट मैच भारतीय टीम को नहीं खेलना चाहिए।
पूर्व सरपंच देवेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य में भाईचारा खत्म करने की साजिश के तहत आतंकी हमला कर निर्दोष लोगों की हत्याएं की जा रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन लाल ने बताया कि केंद्र सरकार को घाटी में शांति के लिए तुरंत ही जरूरी कदम उठाने चाहिए और आतंकियों पर नकेल कसनी चाहिए।
कश्मीर में गैर कश्मीरियों की हत्या पर रोष
सांबा। कश्मीर में दूसरे राज्य के लोगों की हो रही हत्याओं पर लोगों में रोष है। यही नहीं जो लोग कश्मीर में नौकरियां कर रहे हैं वह भी परेशान हो उठे हैं।
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जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के नेता गंभीर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता सप्पन संब्याल ने बताया कि कश्मीर में हो रही हत्याओं से लोगों में रोष है। कुछ लोगों ने उनके साथ संपर्क किया है जिनके बच्चे कश्मीर में रोजगार में लगे हैं। उनके अनुसार कुछ अभिभावकों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर बैंक में हाल ही में 40 बच्चों की नियुक्ति हुई थी। सभी को कश्मीर में ही भेजा गया है। अब उनके परिवार चिंतित हैं। कुछ बच्चे तो नौकरी छोड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने राज्य प्रशासन से मांग उठाई है कि जिन बच्चों को कश्मीर भेजा गया है उन्हें जम्मू में ही नियुक्त किया जाए। ताकि उन्हें व उनके परिवारों को राहत मिले।
टारगेट किलिंग के लिए केंद्र सरकार की नीतियां गलत
मीरां साहिब। कश्मीर में की जा रही टारगेट किलिंग के लिए केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते प्रवासी मजदूरों की जाने गंवाने पर सरकार को बहुत पहले कारगर कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
समाजसेवी प्रमोद कुमार का कहना है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही हैं। अगर सरकार की ओर से पहले इंटरनेट सेवा बंद करने के साथ ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की गई होती तो कश्मीर में टारगेट किलिंग नहीं होती। उन्होंने कहा कि 1990 में जो घटा उसे देखते हुए, अगर पहले से ही कार्रवाई की गई होती तो आज कश्मीर में ऐसा वातावरण नहीं बन पाता। उन्होंने कहा कि आतंकियों के पास गैैर मुस्लिम लोगों के बारे में जानकारी है और सुरक्षा एजेंसियों के पास नहीं। उन्होंने कहा कि बार-बार पाकिस्तान का आतंकियों का समर्थन करने के लिए कहने से बेहतर है पाकिस्तान को उसी भाषा में जवाब दिया जाए। ऐसा नहीं किया जा रहा। कई परिवार के लोगों को अपने बच्चों को गंवाना पड़ रहा है। राजनीति करने वाले पार्टियों के नेता रोटियां सेंक रहे हैं। कश्मीर में अल्पसंख्यकों को बंद करने के लिए केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि बेगुनाह लोगों को जान न गंवानी पड़े।
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सरपंच अंजू शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में लगातार शांति और विकास की राह पर चलने पर कुछ देशविरोधी ताकतें कुछ विशेष समुदाय के लोगों की हत्या कर माहौल खराब करने तुली हैं। पाकिस्तान से राजनीतिक संबंध खत्म और विश्व क्रिकेट प्रतियोगिता रद्द करनी चाहिए। दुकानदार गौरव शर्मा ने बताया कि राज्य में आतंकवाद का बढ़ावा पाकिस्तान की शह पर हो रहा है। सुरक्षा बलों को दुश्मनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके खत्म करना चाहिए। तभी आतंकवाद पर रोक लग सकती है। उन्होंने कहा कि घाटी में निर्दोष लोगों की हत्याएं करके अशांति फैलाने की फिराक में है। सुरक्षा बल कभी भी ऐसी देश विरोधी ताकतों को सफल नहीं होने देंगे। इस अग्रणी क्रिकेट मैच भारतीय टीम को नहीं खेलना चाहिए।
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पूर्व सरपंच देवेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य में भाईचारा खत्म करने की साजिश के तहत आतंकी हमला कर निर्दोष लोगों की हत्याएं की जा रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मोहन लाल ने बताया कि केंद्र सरकार को घाटी में शांति के लिए तुरंत ही जरूरी कदम उठाने चाहिए और आतंकियों पर नकेल कसनी चाहिए।
कश्मीर में गैर कश्मीरियों की हत्या पर रोष
सांबा। कश्मीर में दूसरे राज्य के लोगों की हो रही हत्याओं पर लोगों में रोष है। यही नहीं जो लोग कश्मीर में नौकरियां कर रहे हैं वह भी परेशान हो उठे हैं।
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जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के नेता गंभीर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता सप्पन संब्याल ने बताया कि कश्मीर में हो रही हत्याओं से लोगों में रोष है। कुछ लोगों ने उनके साथ संपर्क किया है जिनके बच्चे कश्मीर में रोजगार में लगे हैं। उनके अनुसार कुछ अभिभावकों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर बैंक में हाल ही में 40 बच्चों की नियुक्ति हुई थी। सभी को कश्मीर में ही भेजा गया है। अब उनके परिवार चिंतित हैं। कुछ बच्चे तो नौकरी छोड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने राज्य प्रशासन से मांग उठाई है कि जिन बच्चों को कश्मीर भेजा गया है उन्हें जम्मू में ही नियुक्त किया जाए। ताकि उन्हें व उनके परिवारों को राहत मिले।
टारगेट किलिंग के लिए केंद्र सरकार की नीतियां गलत
मीरां साहिब। कश्मीर में की जा रही टारगेट किलिंग के लिए केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते प्रवासी मजदूरों की जाने गंवाने पर सरकार को बहुत पहले कारगर कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
समाजसेवी प्रमोद कुमार का कहना है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही हैं। अगर सरकार की ओर से पहले इंटरनेट सेवा बंद करने के साथ ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की गई होती तो कश्मीर में टारगेट किलिंग नहीं होती। उन्होंने कहा कि 1990 में जो घटा उसे देखते हुए, अगर पहले से ही कार्रवाई की गई होती तो आज कश्मीर में ऐसा वातावरण नहीं बन पाता। उन्होंने कहा कि आतंकियों के पास गैैर मुस्लिम लोगों के बारे में जानकारी है और सुरक्षा एजेंसियों के पास नहीं। उन्होंने कहा कि बार-बार पाकिस्तान का आतंकियों का समर्थन करने के लिए कहने से बेहतर है पाकिस्तान को उसी भाषा में जवाब दिया जाए। ऐसा नहीं किया जा रहा। कई परिवार के लोगों को अपने बच्चों को गंवाना पड़ रहा है। राजनीति करने वाले पार्टियों के नेता रोटियां सेंक रहे हैं। कश्मीर में अल्पसंख्यकों को बंद करने के लिए केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि बेगुनाह लोगों को जान न गंवानी पड़े।