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Jammu News: दो दशक बाद कांस्टेबल की बर्खास्तगी का आदेश रद्द
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जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) जम्मू की पीठ ने दो दशक पहले सेवा से बर्खास्त किए गए एक पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। पुलिस विभाग को कानून के तहत नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया है।
न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा और प्रशासनिक सदस्य राम मोहन जौहरी की पीठ ने उधमपुर निवासी मोहम्मद शाह नवाज की याचिका पर वीरवार सुनवाई की। शाह को 24 अगस्त 2004 के आदेश के तहत 18 मई 2003 से पूर्वव्यापी प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया था। नवाज के वकील ने तर्क दिया कि नवाज को अपने प्रशिक्षण काल के दौरान मानसिक बीमारी हो गई थी।
वह जीएमसी जम्मू में भर्ती रहे और बाद में उन्हें ड्यूटी पर लौटने के लिए फिट घोषित कर दिया गया लेकिन विभाग ने उन्हें बर्खास्त करने से पहले कभी उचित जांच नहीं की। पुलिस विभाग की ओर से सरकारी वकील ने अपना बचाव करते हुए कहा कि कांस्टेबल बार-बार नोटिस और अनुस्मारक के बावजूद बिना अनुमति के अनुपस्थित रहा और उसकी बर्खास्तगी कानूनी रूप से वैध थी। कैट ने माना कि याचिकाकर्ता को बिना किसी विभागीय जांच के बर्खास्त कर दिया गया था। लंबी अनुपस्थिति के मामलों में भी कर्मचारी को आरोप-पत्र और अपना बचाव करने का अवसर दिया जाना चाहिए। जेएनएफ
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न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा और प्रशासनिक सदस्य राम मोहन जौहरी की पीठ ने उधमपुर निवासी मोहम्मद शाह नवाज की याचिका पर वीरवार सुनवाई की। शाह को 24 अगस्त 2004 के आदेश के तहत 18 मई 2003 से पूर्वव्यापी प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया था। नवाज के वकील ने तर्क दिया कि नवाज को अपने प्रशिक्षण काल के दौरान मानसिक बीमारी हो गई थी।
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वह जीएमसी जम्मू में भर्ती रहे और बाद में उन्हें ड्यूटी पर लौटने के लिए फिट घोषित कर दिया गया लेकिन विभाग ने उन्हें बर्खास्त करने से पहले कभी उचित जांच नहीं की। पुलिस विभाग की ओर से सरकारी वकील ने अपना बचाव करते हुए कहा कि कांस्टेबल बार-बार नोटिस और अनुस्मारक के बावजूद बिना अनुमति के अनुपस्थित रहा और उसकी बर्खास्तगी कानूनी रूप से वैध थी। कैट ने माना कि याचिकाकर्ता को बिना किसी विभागीय जांच के बर्खास्त कर दिया गया था। लंबी अनुपस्थिति के मामलों में भी कर्मचारी को आरोप-पत्र और अपना बचाव करने का अवसर दिया जाना चाहिए। जेएनएफ
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