{"_id":"67d0a64c2070e895e50818a9","slug":"court-news-jammu-news-c-10-lko1027-564496-2025-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनुबंध कर्मियों को सेवा जारी रखने का अधिकार नहीं : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनुबंध कर्मियों को सेवा जारी रखने का अधिकार नहीं : हाईकोर्ट
विज्ञापन
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने 150 कर्मियों की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी, जिन्हें कोविड-19 के दौरान अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था।
न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की पीठ ने कहा, यह न्यायालय इस विचार पर है कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति पूरी तरह से अनुबंध के आधार पर की गई थी। इन्हें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से जम्मू और श्रीनगर में 500 बिस्तरों वाले अस्थायी अस्पताल को चलाने के लिए नियुक्त किया गया था।
अदालत ने कहा, यह अस्थायी नियुक्ति एक अस्थायी कोविड अस्पताल की स्थापना का हिस्सा थी, जिसे महामारी के कारण होने वाले तत्काल स्वास्थ्य संकट को दूर करने के लिए स्थापित किया गया था। आपातकाल की असाधारण प्रकृति को देखते हुए याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को आवश्यक माना गया और अस्पताल के संचालन का समर्थन करने के लिए उनके रोजगार को एक निश्चित अवधि के लिए बढ़ा दिया गया था।
विज्ञापन
अदालत ने कहा, हालांकि जैसे ही कोविड-19 की स्थिति में सुधार हुआ और तत्काल स्वास्थ्य संकट कम हो गया, अस्थायी अस्पतालों को बंद कर दिया गया। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं सहित कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारियों की सेवाएं बंद कर दी गईं, क्योंकि उनकी प्रारंभिक नियुक्ति एक वर्ष की अवधि के लिए थी, जिसे छह महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था और यह 31 दिसंबर 2022 को समाप्त हो गई। कोर्ट ने रेखांकित किया कि याचिकाकर्ताओं के पास निरंतर सेवा जारी रखने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि वे कोविड-19 के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य संकटों को दूर करने के लिए एक विशिष्ट उद्देश्य और अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। ब्यूरो
विज्ञापन
न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की पीठ ने कहा, यह न्यायालय इस विचार पर है कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति पूरी तरह से अनुबंध के आधार पर की गई थी। इन्हें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से जम्मू और श्रीनगर में 500 बिस्तरों वाले अस्थायी अस्पताल को चलाने के लिए नियुक्त किया गया था।
विज्ञापन
अदालत ने कहा, यह अस्थायी नियुक्ति एक अस्थायी कोविड अस्पताल की स्थापना का हिस्सा थी, जिसे महामारी के कारण होने वाले तत्काल स्वास्थ्य संकट को दूर करने के लिए स्थापित किया गया था। आपातकाल की असाधारण प्रकृति को देखते हुए याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को आवश्यक माना गया और अस्पताल के संचालन का समर्थन करने के लिए उनके रोजगार को एक निश्चित अवधि के लिए बढ़ा दिया गया था।
विज्ञापन
अदालत ने कहा, हालांकि जैसे ही कोविड-19 की स्थिति में सुधार हुआ और तत्काल स्वास्थ्य संकट कम हो गया, अस्थायी अस्पतालों को बंद कर दिया गया। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं सहित कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारियों की सेवाएं बंद कर दी गईं, क्योंकि उनकी प्रारंभिक नियुक्ति एक वर्ष की अवधि के लिए थी, जिसे छह महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था और यह 31 दिसंबर 2022 को समाप्त हो गई। कोर्ट ने रेखांकित किया कि याचिकाकर्ताओं के पास निरंतर सेवा जारी रखने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि वे कोविड-19 के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य संकटों को दूर करने के लिए एक विशिष्ट उद्देश्य और अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। ब्यूरो