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Jammu News: जेडीए को प्लाट वापस लेकर ब्याज समेत राशि वापस लौटाने का आदेश
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बीरपुर हाउसिंग कॉलोनी पर जिला उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला
दस वर्षों में सुविधाएं मुहैया नहीं करवाने पर उठाया कदम
जम्मू। बीरपुर हाउसिंग कॉलोनी को जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) दस वर्षों से विकसित करने में विफल रहा है। इस पर जिला उपभोक्ता फोरम ने एक कड़ा फैसला सुनाया है। एक प्लाट खरीदने वाले से प्लाट वापस लेकर उसे ब्याज समेत प्लाट की राशि लौटाने का आदेश दिया गया है।
फोरम के अध्यक्ष पवन देव कोतवाल एवं सदस्य नीलम बाला भारद्वाज ने ऋषभ देव सिंह की अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई की। ऋषभ देव सिंह ने वर्ष 2014 में 23 लाख रुपये में बीरपुर में प्लाट लिया था। इसके लिए 40 वर्ष की लीज थी। ऋषभ देव सिंह ने इसे लेकर फोरम में शिकायत दर्ज की।
बताया कि दस वर्ष में जेडीए ने बिजली पानी और सड़क मुहैया नहीं करा सका, जोकि अनुबंध में शामिल था। इस वजह से वह घर नहीं बना सका। यहां तक कि प्लाट गैर मुमकिन खड्ड जमीन में दे दी। इस वजह से इसे किसी और को बेच भी नहीं सकते।
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याचिकाकर्ता के एडवोकेट ने तर्क दिया कि एक सरकारी स्वामित्व वाले प्राधिकरण द्वारा प्लॉट की कॉलोनी में सेवाएं प्रदान करने में विफलता भी अधिनियम के अंतर्गत आती है। सरकारी एजेंसियां निजी डेवलपर्स की तरह ही ऐसी कम सेवाओं के लिए समान रूप से उत्तरदायी हैं।
दस वर्षों में कई बार अधिकारियों, मंत्रियों के दौरे करने के बाद भी जेडीए दस साल से अधिक की इस लंबी अवधि के लिए सेवाएं प्रदान करने में विफल रहा। लिहाजा, जेडीए 18 फीसदी की ब्याज दर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। इन दलीलों के बाद फोरम ने आदेश दिया कि प्लाट मालिक को 18 फीसदी ब्याज दर के साथ राशि दें और प्लाट वापस ले लें। जेएनएफ
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दस वर्षों में सुविधाएं मुहैया नहीं करवाने पर उठाया कदम
जम्मू। बीरपुर हाउसिंग कॉलोनी को जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) दस वर्षों से विकसित करने में विफल रहा है। इस पर जिला उपभोक्ता फोरम ने एक कड़ा फैसला सुनाया है। एक प्लाट खरीदने वाले से प्लाट वापस लेकर उसे ब्याज समेत प्लाट की राशि लौटाने का आदेश दिया गया है।
फोरम के अध्यक्ष पवन देव कोतवाल एवं सदस्य नीलम बाला भारद्वाज ने ऋषभ देव सिंह की अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई की। ऋषभ देव सिंह ने वर्ष 2014 में 23 लाख रुपये में बीरपुर में प्लाट लिया था। इसके लिए 40 वर्ष की लीज थी। ऋषभ देव सिंह ने इसे लेकर फोरम में शिकायत दर्ज की।
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बताया कि दस वर्ष में जेडीए ने बिजली पानी और सड़क मुहैया नहीं करा सका, जोकि अनुबंध में शामिल था। इस वजह से वह घर नहीं बना सका। यहां तक कि प्लाट गैर मुमकिन खड्ड जमीन में दे दी। इस वजह से इसे किसी और को बेच भी नहीं सकते।
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याचिकाकर्ता के एडवोकेट ने तर्क दिया कि एक सरकारी स्वामित्व वाले प्राधिकरण द्वारा प्लॉट की कॉलोनी में सेवाएं प्रदान करने में विफलता भी अधिनियम के अंतर्गत आती है। सरकारी एजेंसियां निजी डेवलपर्स की तरह ही ऐसी कम सेवाओं के लिए समान रूप से उत्तरदायी हैं।
दस वर्षों में कई बार अधिकारियों, मंत्रियों के दौरे करने के बाद भी जेडीए दस साल से अधिक की इस लंबी अवधि के लिए सेवाएं प्रदान करने में विफल रहा। लिहाजा, जेडीए 18 फीसदी की ब्याज दर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। इन दलीलों के बाद फोरम ने आदेश दिया कि प्लाट मालिक को 18 फीसदी ब्याज दर के साथ राशि दें और प्लाट वापस ले लें। जेएनएफ