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Jammu News: लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण और सीमा विवाद पर सरकार से जवाब तलब
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- हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के दिए निर्देश
मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी
जम्मू। लद्दाख के पर्यावरण, पारिस्थितिकी और भूमि को अतिक्रमणकारियों से बचाने और जिला कारगिल व गांदरबल के बीच सीमा विवाद सुलझाने संबंधी याचिका पर सरकार से जवाब तलब किया गया है। उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्टन और न्यायाधीश रजनीश ओसवाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वीरवार मामले पर सुनवाई की।
लद्दाख के मुख्य सचिव, एडीजीपी, वन विभाग के प्रधान सचिव, डीसी कारगिल, कश्मीर के संभागीय आयुक्त और गांदरबल के डीसी पर अभियोग लगाया। रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि वह पक्षों का ज्ञापन तैयार करे और प्रतिवादियों को उनके जवाब के लिए नोटिस जारी करे। मामले पर अगली सुनवाई 28 अगस्त 2024 को होगी।
उत्तरदाताओं से जवाब मांगते हुए खंडपीठ ने पाया कि पत्र में लद्दाख के पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। पत्र में कहा गया है कि गांदरबल जिले के निवासियों ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बर्फ क्षेत्र की भूमि को बराबर अनुपात में बांटने की आड़ में लद्दाख की भूमि पर अतिक्रमण किया है। गांदरबल के निवासियों की इस कार्रवाई ने लद्दाख क्षेत्र के वनस्पतियों और जीवों को खतरे में डाल दिया है जो उक्त क्षेत्र के पर्यावरण और पारिस्थितिकी के लिए खतरा है। इसके अलावा यह दलील दी गई है कि यातायात और इस विषय को नियंत्रित करने वाले संबंधित नियमों को केवल लद्दाख के लोगों को बाधित करने के लिए लागू किया जा रहा है, जिन्हें विभिन्न पहलुओं से परेशान किया जा रहा है। जबकि पर्यटक वाहनों के साथ-साथ भारी वाहनों को बिना किसी प्रतिबंध के पूरे साल चलने की अनुमति दी जा रही है। जेएनएफ
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मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी
जम्मू। लद्दाख के पर्यावरण, पारिस्थितिकी और भूमि को अतिक्रमणकारियों से बचाने और जिला कारगिल व गांदरबल के बीच सीमा विवाद सुलझाने संबंधी याचिका पर सरकार से जवाब तलब किया गया है। उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्टन और न्यायाधीश रजनीश ओसवाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वीरवार मामले पर सुनवाई की।
लद्दाख के मुख्य सचिव, एडीजीपी, वन विभाग के प्रधान सचिव, डीसी कारगिल, कश्मीर के संभागीय आयुक्त और गांदरबल के डीसी पर अभियोग लगाया। रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि वह पक्षों का ज्ञापन तैयार करे और प्रतिवादियों को उनके जवाब के लिए नोटिस जारी करे। मामले पर अगली सुनवाई 28 अगस्त 2024 को होगी।
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उत्तरदाताओं से जवाब मांगते हुए खंडपीठ ने पाया कि पत्र में लद्दाख के पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। पत्र में कहा गया है कि गांदरबल जिले के निवासियों ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा बर्फ क्षेत्र की भूमि को बराबर अनुपात में बांटने की आड़ में लद्दाख की भूमि पर अतिक्रमण किया है। गांदरबल के निवासियों की इस कार्रवाई ने लद्दाख क्षेत्र के वनस्पतियों और जीवों को खतरे में डाल दिया है जो उक्त क्षेत्र के पर्यावरण और पारिस्थितिकी के लिए खतरा है। इसके अलावा यह दलील दी गई है कि यातायात और इस विषय को नियंत्रित करने वाले संबंधित नियमों को केवल लद्दाख के लोगों को बाधित करने के लिए लागू किया जा रहा है, जिन्हें विभिन्न पहलुओं से परेशान किया जा रहा है। जबकि पर्यटक वाहनों के साथ-साथ भारी वाहनों को बिना किसी प्रतिबंध के पूरे साल चलने की अनुमति दी जा रही है। जेएनएफ
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