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जमानत अर्जी दायर होने की पहली सुनवाई के साथ केस डायरी मंगवाए : हाईकोर्ट
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने एक जमानत आवेदन पर विचार करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय को निर्देश दिया कि जब भी कोर्ट के समक्ष जमानत आवेदन दायर किया जाता है और उसकी प्रति महाधिवक्ता कार्यालय को प्राप्त होती है, तो मामले में प्रासंगिक उचित केस डायरी संबंधित पुलिस स्टेशन से तुरंत मंगवाई जाए।
आदर्श रूप से जमानत आवेदनों पर न्यायालय द्वारा सुनवाई की पहली तारीख को ही निर्णय लिया जाना चाहिए। यह तभी संभव है जब केस डायरी सुनवाई की पहली तारीख को ही न्यायालय द्वारा जांच के लिए उपलब्ध करा दी जाए। जमानत आवेदन में राज्य को लिखित आपत्तियां दर्ज करने का अवसर देने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ऐसा कानून के तहत अनिवार्य नहीं है। इसकी आवश्यकता केवल उन मामलों में हो सकती है जहां किसी विशेष कानून में इसकी विशेष रूप से आवश्यकता होती है। जमानत आवेदनों पर केस डायरी में मौजूद सामग्री के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। यदि यही प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो हाईकोर्ट द्वारा जमानत आवेदनों पर निर्णय लेने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। मंगलवार को न्यायाधीश अतुल श्रीधरन ने गौरव सयाल द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि यह जमानत आवेदन 2022 से लंबित पड़ा हुआ है। इसे देखते हुए आरोपी को जमानत दी गई। यह भी कहा कि पीड़ित इस आदेश को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र है। यह मामला दुष्कर्म का है। जेएनएफ
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आदर्श रूप से जमानत आवेदनों पर न्यायालय द्वारा सुनवाई की पहली तारीख को ही निर्णय लिया जाना चाहिए। यह तभी संभव है जब केस डायरी सुनवाई की पहली तारीख को ही न्यायालय द्वारा जांच के लिए उपलब्ध करा दी जाए। जमानत आवेदन में राज्य को लिखित आपत्तियां दर्ज करने का अवसर देने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ऐसा कानून के तहत अनिवार्य नहीं है। इसकी आवश्यकता केवल उन मामलों में हो सकती है जहां किसी विशेष कानून में इसकी विशेष रूप से आवश्यकता होती है। जमानत आवेदनों पर केस डायरी में मौजूद सामग्री के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। यदि यही प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो हाईकोर्ट द्वारा जमानत आवेदनों पर निर्णय लेने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए। मंगलवार को न्यायाधीश अतुल श्रीधरन ने गौरव सयाल द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि यह जमानत आवेदन 2022 से लंबित पड़ा हुआ है। इसे देखते हुए आरोपी को जमानत दी गई। यह भी कहा कि पीड़ित इस आदेश को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र है। यह मामला दुष्कर्म का है। जेएनएफ
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