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Jammu News: आजाद समेत 42 नेताओं को सरकारी आवास खाली न करने पर नोटिस
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-हाईकोर्ट के निर्देश के बाद संपदा विभाग ने पूछा-आवास खाली क्यों नहीं किया
-दस दिन में देना है जवाब, नेताओं की सूची में रैना, कविंद्र, मुजफ्फर बेग, सरूरी जैसे कई बड़े नाम
जम्मू। सरकारी आवास खाली न करने पर जम्मू-कश्मीर के संपदा विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद समेत 42 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय के आदेश पर विभाग ने यह कदम उठाया है और इसकी सूचना अदालत को दे दी है। सभी कब्जेदारों को 10 दिन के अंदर जवाब देना है।
विभाग ने जिन लोगों को नोटिस जारी किया है उनमें पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग, कविंदर गुप्ता, पूर्व मंत्री सज्जाद गनी लोन, मौलवी इमरान रजा अंसारी, सत शर्मा ,जीएम सरूरी, सुनील शर्मा, अब्दुल गनी वकील, अब्दुल माजिद पाडर, हकीम मोहम्मद यासीन, पूर्व विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना, आरएस पठानिया, प्रदीप शर्मा, दिवंगत राजेश गुप्ता का परिवार, विबोध गुप्ता, दलीप सिंह परिहार, रविंदर शर्मा नीलम लंगेह, शोएब नबी लोन, हाजी अब्दुल रशीद, एमएस पंडित पुरी, राजा मंजूर, निज़ामुद्दीन भट (पूर्व वीसी जम्मू-कश्मीर मुस्लिम निर्दिष्ट वकाफ और वकाफ संपत्तियां), मीर मोहम्मद फैयाज (पूर्व सांसद), जफर इकबाल मन्हास, अब्दुल रहीम राथर, बशीर अहमद डार, मोहम्मद अमीन भट, सोफी यूसुफ, एमवाई तारिगामी, यासिर रेशी, सुरिंदर अंबरदार, मोहम्मद अब्बास वानी, शफीक मीर (अध्यक्ष, पंचायत कांफ्रेंस), शिल्पी वर्मा, तारिक हुसैन कीन, शेख इश्फाक जब्बार, जाहिद हुसैन जान, एसएस चन्नी, सोनाउल्लाह लोन, रियाज अहमद मीर शामिल हैं। इन लेागों को दस दिनों में कानूनी दस्तावेज पेश कर यह बताना होगा कि इनको आवास में रहने की अनुमति क्यों दी जाए।
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उच्च न्यायालय ने 3 अप्रैल को नोटिस जारी करने के दिए थे निर्देश
बता दें कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 3 अप्रैल के अपने आदेश में नोटिस जारी करने के लिए संपदा विभाग को कहा था। खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि यदि रिपोर्ट में उल्लिखित किसी भी व्यक्ति का आवास पर कब्जा बरकरार रखा जाता है, तो न्यायालय के समक्ष इसके दस्तावेज पेश किए जाएं। इस मामले की दोबारा सुनवाई 8 मई को होगी। जेएनएफ
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-दस दिन में देना है जवाब, नेताओं की सूची में रैना, कविंद्र, मुजफ्फर बेग, सरूरी जैसे कई बड़े नाम
जम्मू। सरकारी आवास खाली न करने पर जम्मू-कश्मीर के संपदा विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद समेत 42 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय के आदेश पर विभाग ने यह कदम उठाया है और इसकी सूचना अदालत को दे दी है। सभी कब्जेदारों को 10 दिन के अंदर जवाब देना है।
विभाग ने जिन लोगों को नोटिस जारी किया है उनमें पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग, कविंदर गुप्ता, पूर्व मंत्री सज्जाद गनी लोन, मौलवी इमरान रजा अंसारी, सत शर्मा ,जीएम सरूरी, सुनील शर्मा, अब्दुल गनी वकील, अब्दुल माजिद पाडर, हकीम मोहम्मद यासीन, पूर्व विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना, आरएस पठानिया, प्रदीप शर्मा, दिवंगत राजेश गुप्ता का परिवार, विबोध गुप्ता, दलीप सिंह परिहार, रविंदर शर्मा नीलम लंगेह, शोएब नबी लोन, हाजी अब्दुल रशीद, एमएस पंडित पुरी, राजा मंजूर, निज़ामुद्दीन भट (पूर्व वीसी जम्मू-कश्मीर मुस्लिम निर्दिष्ट वकाफ और वकाफ संपत्तियां), मीर मोहम्मद फैयाज (पूर्व सांसद), जफर इकबाल मन्हास, अब्दुल रहीम राथर, बशीर अहमद डार, मोहम्मद अमीन भट, सोफी यूसुफ, एमवाई तारिगामी, यासिर रेशी, सुरिंदर अंबरदार, मोहम्मद अब्बास वानी, शफीक मीर (अध्यक्ष, पंचायत कांफ्रेंस), शिल्पी वर्मा, तारिक हुसैन कीन, शेख इश्फाक जब्बार, जाहिद हुसैन जान, एसएस चन्नी, सोनाउल्लाह लोन, रियाज अहमद मीर शामिल हैं। इन लेागों को दस दिनों में कानूनी दस्तावेज पेश कर यह बताना होगा कि इनको आवास में रहने की अनुमति क्यों दी जाए।
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उच्च न्यायालय ने 3 अप्रैल को नोटिस जारी करने के दिए थे निर्देश
बता दें कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 3 अप्रैल के अपने आदेश में नोटिस जारी करने के लिए संपदा विभाग को कहा था। खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि यदि रिपोर्ट में उल्लिखित किसी भी व्यक्ति का आवास पर कब्जा बरकरार रखा जाता है, तो न्यायालय के समक्ष इसके दस्तावेज पेश किए जाएं। इस मामले की दोबारा सुनवाई 8 मई को होगी। जेएनएफ
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