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Jammu News: गन लाइसेंस घोटाले में अफसरों को बचा रहा प्रशासन, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
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- सुनवाई के दौरान कोई भी सरकारी नुमाइंदा या वकील नहीं पहुंच रहा कोर्ट
- आईएएस, आईपीएस अफसरों की अभियोजन स्वीकृति भी नहीं दी जा रही
जम्मू। बहुचर्चित फर्जी गन लाइसेंस मामले में कोई भी सरकारी नुमाइंदा या वकील उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान नहीं पहुंचता। फिर चाहे वह केंद्र का हो या प्रदेश का। इस पर जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने कड़ा एतराज जताया है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह और न्यायाधीश एमए चौधरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि जब इस मामले पर सुनवाई होती है, तब कोई नुमाइंदा नहीं आता। इस पर हम कोई फैसला नहीं सुना पा रहे। इससे यह साबित होता है कि प्रशासन अफसरों को बचाने का प्रयास कर रहा है। लिहाजा सरकार अपने नुमाइंदे को अदालत में भेजे।
मामले से जुड़ी याचिका के वकील राहुल रैना ने खंडपीठ के समक्ष बताया कि मामले में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसर शामिल हैं, जिनकी अभियोजन स्वीकृति नहीं दी जा रही, क्योंकि इस स्वीकृति को देने वाले पदों पर भी भ्रष्ट लोग बैठे हुए हैं। ये इन अफसरों को बचाने के लिए स्वीकृति पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। कहा कि जब 2021 में जेकेएएस अफसरों पर कार्रवाई की मंजूरी दी गई है तो आईएएसए, आईपीएस अफसरों को क्यों बचाया जा रहा है। यूटी में दो कानून नहीं हो सकते। ऐसा पिछले दो वर्षों से हो रहा है। जान-बूझकर अभियोजन स्वीकृति फाइलों को दबा कर रखा हुआ है। यह भी बताया कि दिसंबर 2023 में एक नया आवेदन दायर कर सीबीआई को पक्षकार बनाने की मांग की, जो शस्त्र लाइसेंस घोटाले से संबंधित दोनों एफआईआर की जांच कर रही है, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। जेएनएफ
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उप राज्यपाल से मिला गन डीलरों का दल
जम्मू। गन लाइसेंस डीलरों का दल वीरवार को उप राज्यपाल से मिला। दल ने मांग की है कि उनके लाइसेंस को आवेदन आठ में तब्दील किया जाए, ताकि वे गोला बारूद और हथियारों की खरीद कर सकें और बेच सकें। उपप्रधान राजेश गुप्ता, सुमित दसगोत्रा के साथ कई सदस्यों ने गुहार लगाई कि वर्ष 2016 से उनकी यह मांग लंबित है। एलजी ने आश्वासन दिया है कि मांग पर जल्द अमल किया जाएगा। ब्यूरो
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- आईएएस, आईपीएस अफसरों की अभियोजन स्वीकृति भी नहीं दी जा रही
जम्मू। बहुचर्चित फर्जी गन लाइसेंस मामले में कोई भी सरकारी नुमाइंदा या वकील उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान नहीं पहुंचता। फिर चाहे वह केंद्र का हो या प्रदेश का। इस पर जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने कड़ा एतराज जताया है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह और न्यायाधीश एमए चौधरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि जब इस मामले पर सुनवाई होती है, तब कोई नुमाइंदा नहीं आता। इस पर हम कोई फैसला नहीं सुना पा रहे। इससे यह साबित होता है कि प्रशासन अफसरों को बचाने का प्रयास कर रहा है। लिहाजा सरकार अपने नुमाइंदे को अदालत में भेजे।
मामले से जुड़ी याचिका के वकील राहुल रैना ने खंडपीठ के समक्ष बताया कि मामले में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसर शामिल हैं, जिनकी अभियोजन स्वीकृति नहीं दी जा रही, क्योंकि इस स्वीकृति को देने वाले पदों पर भी भ्रष्ट लोग बैठे हुए हैं। ये इन अफसरों को बचाने के लिए स्वीकृति पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। कहा कि जब 2021 में जेकेएएस अफसरों पर कार्रवाई की मंजूरी दी गई है तो आईएएसए, आईपीएस अफसरों को क्यों बचाया जा रहा है। यूटी में दो कानून नहीं हो सकते। ऐसा पिछले दो वर्षों से हो रहा है। जान-बूझकर अभियोजन स्वीकृति फाइलों को दबा कर रखा हुआ है। यह भी बताया कि दिसंबर 2023 में एक नया आवेदन दायर कर सीबीआई को पक्षकार बनाने की मांग की, जो शस्त्र लाइसेंस घोटाले से संबंधित दोनों एफआईआर की जांच कर रही है, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। जेएनएफ
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उप राज्यपाल से मिला गन डीलरों का दल
जम्मू। गन लाइसेंस डीलरों का दल वीरवार को उप राज्यपाल से मिला। दल ने मांग की है कि उनके लाइसेंस को आवेदन आठ में तब्दील किया जाए, ताकि वे गोला बारूद और हथियारों की खरीद कर सकें और बेच सकें। उपप्रधान राजेश गुप्ता, सुमित दसगोत्रा के साथ कई सदस्यों ने गुहार लगाई कि वर्ष 2016 से उनकी यह मांग लंबित है। एलजी ने आश्वासन दिया है कि मांग पर जल्द अमल किया जाएगा। ब्यूरो
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