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Jammu News: प्रदेश सरकार से डल झील को सीवरेज मुक्त करने और अवैध निर्माण हटाने पर मांगे सुझाव
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- हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ पेश होने के लिए कहा
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार से डल झील में सीवरेज, तरल अपशिष्ट के प्रवाह और जल निकाय के आसपास अनाधिकृत निर्माण को हटाने से संबंधित प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ सुझाव देने के लिए कहा है। मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की खंडपीठ ने 2002 में तत्कालीन कानून छात्र द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही, जिसमें जलस्रोत को सुरक्षित करने के निर्देश मांगे थे।
24 सितंबर, 2021 के आदेश के आधार पर कोर्ट ने कुछ विशिष्ट मुद्दों की पहचान की थी, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। इनमें डल झील की सफाई, सीवरेज और तरल अपशिष्ट का प्रवाह रोकना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यटन व मनोरंजक खेलों के विकास, सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव, निर्माण के संबंध में पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी, हाउसबोटों से संबंधित समस्याओं का प्रबंधन, अनाधिकृत निर्माण, अतिक्रमण रोकना झील और जलमार्ग विकास प्राधिकरण श्रीनगर नगर निगम की जिम्मेदारियां शामिल हैं।
अदालत ने सुनवाई की पिछली तारीख पर कहा था कि सभी पहचाने गए मुद्दों के महत्व को स्वीकार करते हुए यह न्यायालय निम्नलिखित पहलुओं को प्राथमिकता देना अधिक उचित समझता है। संबंधित अधिकारियों से उक्त मुद्दों को संबोधित करने के तरीके पर अपने दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए कहा था, ताकि अदालत को उचित आदेश पारित करने में सुविधा हो सके।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार से डल झील में सीवरेज, तरल अपशिष्ट के प्रवाह और जल निकाय के आसपास अनाधिकृत निर्माण को हटाने से संबंधित प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ सुझाव देने के लिए कहा है। मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की खंडपीठ ने 2002 में तत्कालीन कानून छात्र द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही, जिसमें जलस्रोत को सुरक्षित करने के निर्देश मांगे थे।
24 सितंबर, 2021 के आदेश के आधार पर कोर्ट ने कुछ विशिष्ट मुद्दों की पहचान की थी, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। इनमें डल झील की सफाई, सीवरेज और तरल अपशिष्ट का प्रवाह रोकना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यटन व मनोरंजक खेलों के विकास, सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव, निर्माण के संबंध में पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी, हाउसबोटों से संबंधित समस्याओं का प्रबंधन, अनाधिकृत निर्माण, अतिक्रमण रोकना झील और जलमार्ग विकास प्राधिकरण श्रीनगर नगर निगम की जिम्मेदारियां शामिल हैं।
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अदालत ने सुनवाई की पिछली तारीख पर कहा था कि सभी पहचाने गए मुद्दों के महत्व को स्वीकार करते हुए यह न्यायालय निम्नलिखित पहलुओं को प्राथमिकता देना अधिक उचित समझता है। संबंधित अधिकारियों से उक्त मुद्दों को संबोधित करने के तरीके पर अपने दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए कहा था, ताकि अदालत को उचित आदेश पारित करने में सुविधा हो सके।
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