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अचल संपत्तियों पर हलफनामा दायर करे धर्मार्थ ट्रस्ट : कोर्ट
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- प्रधान जिला न्यायाधीश जम्मू ने याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया आदेश
- ट्रस्ट की संपत्तियों पर किसी तीसरे पक्ष का हित साधने पर लगाई रोक
जम्मू। जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट अपनी अचल संपत्तियों की स्थिति का विवरण करते हुए हलफनामा दायर करे। इसमें वे संपत्तियां भी शामिल हैं, जिन पर तीन साल से अधिक समय तक तीसरे पक्ष का हित पैदा हुआ है। इसके साथ ही 26 सितंबर 2011 से आज तक ट्रस्ट का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाए। साथ ही मुकदमे के लंबित निपटान के अलावा तीन साल से अधिक समय तक ट्रस्ट की संपत्तियों पर तीसरे पक्ष का हित बनाने से अस्थायी रूप से रोक लगाई जाती है। ये आदेश प्रधान जिला न्यायाधीश जम्मू संजय परिहार ने धर्मार्थ ट्रस्ट प्रबंधन को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए शनिवार को जारी किया।
न्यायाधीश ने यह आदेश राजिंदर कुमार और अन्य द्वारा दायर याचिका में पारित किया है। प्रधान जिला न्यायाधीश ने वादी के वकील रघु मेहता और नितिन बख्शी, जबकि ट्रस्ट के वकील अश्विनी ठाकुर के साथ वरिष्ठ वकील आरएस ठाकुर की दलीलें सुनीं। इसमें ट्रस्ट के उचित प्रबंधन की मांग के लिए वादी ने न्यायालय से अंतरिम प्रशासक नियुक्त करने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब तक धन के दुरुपयोग और कुप्रबंधन के बारे में मौखिक साक्ष्य के माध्यम से मामला साबित नहीं हो जाता, तब तक अंतरिम प्रशासक की नियुक्ति नहीं हो सकती। अदालत ने आगे कहा, महाराजा हरि सिंह के निधन के बाद डॉ. कर्ण सिंह धर्मार्थ ट्रस्ट के एकमात्र ट्रस्टी बन गए हैं, जो इसके मामलों को चला रहे हैं। शाही परिवार इसका प्रबंधन कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि क्या इस तरह के तीसरे पक्ष के हित का निर्माण ट्रस्ट के हित में है, यह परीक्षण का विषय है और इस स्तर पर इसके संबंध में कोई भी टिप्पणी प्रतिवादियों के मामले पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसा कहने का मतलब यह नहीं है कि प्रतिवादियों को अपनी इच्छा से ट्रस्ट संपत्तियों पर तीसरे पक्ष के हित को प्रभावित करने या बनाने का कोई लाइसेंस दिया गया है। अदालत ने रिसीवर की नियुक्ति और ऐसे दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर रखने के लिए आवेदन का निपटारा इस निर्देश के साथ किया कि धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा रखी गई अचल संपत्तियों की स्थिति का वर्णन करते हुए हलफनामा दाखिल करेंगे। जेएनएनफ
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- ट्रस्ट की संपत्तियों पर किसी तीसरे पक्ष का हित साधने पर लगाई रोक
जम्मू। जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट अपनी अचल संपत्तियों की स्थिति का विवरण करते हुए हलफनामा दायर करे। इसमें वे संपत्तियां भी शामिल हैं, जिन पर तीन साल से अधिक समय तक तीसरे पक्ष का हित पैदा हुआ है। इसके साथ ही 26 सितंबर 2011 से आज तक ट्रस्ट का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाए। साथ ही मुकदमे के लंबित निपटान के अलावा तीन साल से अधिक समय तक ट्रस्ट की संपत्तियों पर तीसरे पक्ष का हित बनाने से अस्थायी रूप से रोक लगाई जाती है। ये आदेश प्रधान जिला न्यायाधीश जम्मू संजय परिहार ने धर्मार्थ ट्रस्ट प्रबंधन को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए शनिवार को जारी किया।
न्यायाधीश ने यह आदेश राजिंदर कुमार और अन्य द्वारा दायर याचिका में पारित किया है। प्रधान जिला न्यायाधीश ने वादी के वकील रघु मेहता और नितिन बख्शी, जबकि ट्रस्ट के वकील अश्विनी ठाकुर के साथ वरिष्ठ वकील आरएस ठाकुर की दलीलें सुनीं। इसमें ट्रस्ट के उचित प्रबंधन की मांग के लिए वादी ने न्यायालय से अंतरिम प्रशासक नियुक्त करने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब तक धन के दुरुपयोग और कुप्रबंधन के बारे में मौखिक साक्ष्य के माध्यम से मामला साबित नहीं हो जाता, तब तक अंतरिम प्रशासक की नियुक्ति नहीं हो सकती। अदालत ने आगे कहा, महाराजा हरि सिंह के निधन के बाद डॉ. कर्ण सिंह धर्मार्थ ट्रस्ट के एकमात्र ट्रस्टी बन गए हैं, जो इसके मामलों को चला रहे हैं। शाही परिवार इसका प्रबंधन कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि क्या इस तरह के तीसरे पक्ष के हित का निर्माण ट्रस्ट के हित में है, यह परीक्षण का विषय है और इस स्तर पर इसके संबंध में कोई भी टिप्पणी प्रतिवादियों के मामले पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसा कहने का मतलब यह नहीं है कि प्रतिवादियों को अपनी इच्छा से ट्रस्ट संपत्तियों पर तीसरे पक्ष के हित को प्रभावित करने या बनाने का कोई लाइसेंस दिया गया है। अदालत ने रिसीवर की नियुक्ति और ऐसे दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर रखने के लिए आवेदन का निपटारा इस निर्देश के साथ किया कि धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा रखी गई अचल संपत्तियों की स्थिति का वर्णन करते हुए हलफनामा दाखिल करेंगे। जेएनएनफ
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