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Jammu News: एसआरओ 520 के तहत कितने कर्मी नियमित किए, चार सप्ताह में हलफनामा दे प्रदेश प्रशासन
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सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से 2017 के एसआरओ-520 के तहत अब तक नियमित किए अस्थायी कर्मचारियों के संबंध में चार सप्ताह के भीतर एक हलफनामा मांगा है। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने प्रदेश सरकार को यह आदेश दिया है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने एसआरओ-520 के तहत अस्थायी कर्मचारियों को विभिन्न सरकारी विभाग में नियुक्ति किया है।
शीर्ष अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 2020 के फैसले को चुनौती दी गई है। इसमें कहा था कि गैर-मौलिक पद पर कैजुअल मजदूर के रूप में कार्यरत किसी व्यक्ति के पास नियमितीकरण की मांग करने के लिए कानून में कोई दावा नहीं है। याचिकाकर्ता ने वर्ष 1997 में एक आकस्मिक श्रमिक के रूप में नियुक्त होने के बाद अपनी सेवाओं को नियमित करने का दावा किया था। 2002 में एक रिट याचिका दायर की थी जिसे जून 2008 को रिट कोर्ट के आदेश द्वारा निपटाया गया था। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा था कि अस्थायी कर्मचारी नियमितीकरण की मांग नहीं कर सकता क्योंकि इस तरह के दावे के लिए उसके पक्ष में कोई निहित अधिकार नहीं है। लेकिन यदि नियोक्ता ऐसे कर्मचारियों के लाभ के लिए उनकी नियुक्ति को नियंत्रित करने वाली कोई योजना लेकर आता है, तो ऐसी स्थिति में योजना के प्रावधानों के तहत निपटाया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर सरकार ने अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए दो एसआरओ जारी किए जिसमें 1994 का एसआरओ 64 और 2017 का एसआरओ 520 था।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से 2017 के एसआरओ-520 के तहत अब तक नियमित किए अस्थायी कर्मचारियों के संबंध में चार सप्ताह के भीतर एक हलफनामा मांगा है। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने प्रदेश सरकार को यह आदेश दिया है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने एसआरओ-520 के तहत अस्थायी कर्मचारियों को विभिन्न सरकारी विभाग में नियुक्ति किया है।
शीर्ष अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 2020 के फैसले को चुनौती दी गई है। इसमें कहा था कि गैर-मौलिक पद पर कैजुअल मजदूर के रूप में कार्यरत किसी व्यक्ति के पास नियमितीकरण की मांग करने के लिए कानून में कोई दावा नहीं है। याचिकाकर्ता ने वर्ष 1997 में एक आकस्मिक श्रमिक के रूप में नियुक्त होने के बाद अपनी सेवाओं को नियमित करने का दावा किया था। 2002 में एक रिट याचिका दायर की थी जिसे जून 2008 को रिट कोर्ट के आदेश द्वारा निपटाया गया था। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा था कि अस्थायी कर्मचारी नियमितीकरण की मांग नहीं कर सकता क्योंकि इस तरह के दावे के लिए उसके पक्ष में कोई निहित अधिकार नहीं है। लेकिन यदि नियोक्ता ऐसे कर्मचारियों के लाभ के लिए उनकी नियुक्ति को नियंत्रित करने वाली कोई योजना लेकर आता है, तो ऐसी स्थिति में योजना के प्रावधानों के तहत निपटाया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर सरकार ने अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए दो एसआरओ जारी किए जिसमें 1994 का एसआरओ 64 और 2017 का एसआरओ 520 था।
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