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Jammu News: शक्तियों के दुरुपयोग पर जम्मू संभाग के कॉलेजों के नोडल प्रिंसिपल को हटाया
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- कैट ने अवमानना पर दो लाख का लगाया जुर्माना, एक सप्ताह में नहीं भरा तो होगी जेल
-अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने न्यायालय के आदेशों की अवमानना और शक्तियों का दुरुपयोग करने पर जम्मू संभाग के कॉलेजों के नोडल प्रिंसिपल डॉ. एसपी सारस्वत को पद से हटाने का आदेश दिया है। साथ ही दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एक सप्ताह में जुर्माना न भरने पर डॉ. सारस्वत को एक माह की सजा काटनी होगी। न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने कहा कि डॉ. सारस्वत ने कैट और सर्वोच्च न्यायालय की ओर से पारित आदेशों की अवहेलना की और अपने तौर-तरीकों में सुधार नहीं किया। उनके अहंकारी रवैये के कारण विद्यार्थियों को करीब तीन से पांच माह तक पढ़ाई का नुकसान उठाना पड़ा। डॉ. सारस्वत ने कैट के आदेशों के देरी से पालन के लिए माफी मांगी है, इसलिए मामले में नरम रुख अपनाते हुए उन्हें सलाखों के पीछे नहीं भेजा जा रहा। जुर्माने की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करनी होगी।
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यह है पूरा मामला
उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेजों में तैनात शिक्षण सहायकों ने 2024 में कैट में याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया कि 2020 में सरकार की ओर से आदेश जारी कर, उन्हें जिन नियमों के तहत नियुक्ति मिली थी, उनमें बदलाव कर नए उम्मीदवारों के साथ प्रतिस्थापित करने के दिशानिर्देश दिए गए थे। कैट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए आवेदकों को तब तक काम करते रहने की अनुमति देने का आदेश दिया, जब तक कि उनका पद नियमित चयन के माध्यम से नहीं भरा जाता। इस पर प्रतिवादियों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में शिक्षण सहायकों के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद भी विभाग ने जम्मू संभाग के डिग्री कॉलेजों में शैक्षणिक सहायकों के लिए नौकरी की अधिसूचना जारी नहीं की।
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-अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने न्यायालय के आदेशों की अवमानना और शक्तियों का दुरुपयोग करने पर जम्मू संभाग के कॉलेजों के नोडल प्रिंसिपल डॉ. एसपी सारस्वत को पद से हटाने का आदेश दिया है। साथ ही दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एक सप्ताह में जुर्माना न भरने पर डॉ. सारस्वत को एक माह की सजा काटनी होगी। न्यायिक सदस्य राजिंदर सिंह डोगरा ने कहा कि डॉ. सारस्वत ने कैट और सर्वोच्च न्यायालय की ओर से पारित आदेशों की अवहेलना की और अपने तौर-तरीकों में सुधार नहीं किया। उनके अहंकारी रवैये के कारण विद्यार्थियों को करीब तीन से पांच माह तक पढ़ाई का नुकसान उठाना पड़ा। डॉ. सारस्वत ने कैट के आदेशों के देरी से पालन के लिए माफी मांगी है, इसलिए मामले में नरम रुख अपनाते हुए उन्हें सलाखों के पीछे नहीं भेजा जा रहा। जुर्माने की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करनी होगी।
यह है पूरा मामला
उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेजों में तैनात शिक्षण सहायकों ने 2024 में कैट में याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया कि 2020 में सरकार की ओर से आदेश जारी कर, उन्हें जिन नियमों के तहत नियुक्ति मिली थी, उनमें बदलाव कर नए उम्मीदवारों के साथ प्रतिस्थापित करने के दिशानिर्देश दिए गए थे। कैट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए आवेदकों को तब तक काम करते रहने की अनुमति देने का आदेश दिया, जब तक कि उनका पद नियमित चयन के माध्यम से नहीं भरा जाता। इस पर प्रतिवादियों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में शिक्षण सहायकों के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद भी विभाग ने जम्मू संभाग के डिग्री कॉलेजों में शैक्षणिक सहायकों के लिए नौकरी की अधिसूचना जारी नहीं की।
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