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पूर्व मंत्री बाबू सिंह की जमानत अर्जी फिर खारिज
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जम्मू। हवाला मामले मे फंसे पूर्व मंत्री बाबू सिंह की जमानत अर्जी एक बार फिर खारिज कर दी गई। एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश अश्विनी शर्मा ने शुक्रवार को बाबू सिंह की अर्जी पर सुनवाई की। वहीं इस मामले से जुड़े तथ्यों को अदालत में पेश करने पर कई खुलासे हुए हैं।
बताया गया है कि बाबू सिंह के कहने पर मोहम्मद शरीफ शाह ने श्रीनगर में एक व्यक्ति से 6.90 लाख रुपये लिए थे। यह पैसे लेने से पहले शरीफ के व्हाटसएप नंबर पर पाकिस्तान से एक मैसेज भी आया था, जबकि जांच एजेंसी ने जब बाबू सिंह के फोन नंबर 9419000214 की कॉल डिटेल खंगाली तो पता चला कि बाबू सिंह के पाकिस्तान में कई संपर्क हैं।
विशेष न्यायाधीश एनआईए अश्विनी शर्मा ने दोनों तरफ की दलीलें सुनीं। इसमें पाया कि जांच अभी लंबित है और यहां आवेदक के खिलाफ आरोपों की जांच अभी बाकी है, क्योंकि आवेदक पूर्व में मंत्री और विधायक रहा है, ऐसे में यदि उसे जमानत दी जाती है तो अभियोजन पक्ष के गवाहों के साथ छेड़छाड़ करने और अभियोजन पक्ष के गवाहों पर प्रभाव डालने और उन्हें डराने-धमकाने की भी संभावना है। कोई भी आवेदक के खिलाफ जांच एजेंसी या अदालत के समक्ष बयान देने के लिए नहीं आएगा। मामले की जांच प्रारंभिक अवस्था में है और यदि आरोपी/आवेदक को जमानत दी जाती है तो न्याय की प्रक्रिया को विफल कर दिया जाएगा। लिहाजा जमानत नहीं दी जा सकती। जेएनएफ
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बताया गया है कि बाबू सिंह के कहने पर मोहम्मद शरीफ शाह ने श्रीनगर में एक व्यक्ति से 6.90 लाख रुपये लिए थे। यह पैसे लेने से पहले शरीफ के व्हाटसएप नंबर पर पाकिस्तान से एक मैसेज भी आया था, जबकि जांच एजेंसी ने जब बाबू सिंह के फोन नंबर 9419000214 की कॉल डिटेल खंगाली तो पता चला कि बाबू सिंह के पाकिस्तान में कई संपर्क हैं।
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विशेष न्यायाधीश एनआईए अश्विनी शर्मा ने दोनों तरफ की दलीलें सुनीं। इसमें पाया कि जांच अभी लंबित है और यहां आवेदक के खिलाफ आरोपों की जांच अभी बाकी है, क्योंकि आवेदक पूर्व में मंत्री और विधायक रहा है, ऐसे में यदि उसे जमानत दी जाती है तो अभियोजन पक्ष के गवाहों के साथ छेड़छाड़ करने और अभियोजन पक्ष के गवाहों पर प्रभाव डालने और उन्हें डराने-धमकाने की भी संभावना है। कोई भी आवेदक के खिलाफ जांच एजेंसी या अदालत के समक्ष बयान देने के लिए नहीं आएगा। मामले की जांच प्रारंभिक अवस्था में है और यदि आरोपी/आवेदक को जमानत दी जाती है तो न्याय की प्रक्रिया को विफल कर दिया जाएगा। लिहाजा जमानत नहीं दी जा सकती। जेएनएफ
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