वाह इंजीनियर साहब, कागजों में ही बना दिया लाखों का ब्रिज
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विजिलेंस विभाग ने विभाग के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एसपी गुप्ता, एईई राम सिंह, जेई वरिंदर कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले में केस दर्ज किया है।
विजिलेंस के अनुसार संयुक्त औचक निरीक्षण के दौरान पता चला कि विभागीय अधिकारियों ने देवक नाला पर बेनिसंग के निकट पुल निर्माण के लिए 24.25 लाख रुपये की निकासी की, लेकिन कोई पुल नहीं बनाया गया।
ईई ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए टेंडर जारी किया
इसके बाद ईई एसपी गुप्ता ने तवी नदी पर नौ लाख की लागत से फुट सस्पेंसन ब्रिज बनाने का टेंडर निकाला। 31 अगस्त 2009 को ठेकेदार कुलदीप राज को 11.32 लाख रुपये में पुल बनाने का काम सौंप दिया गया। ईई ने बिना सेंक्शन के पुल बनाने का टेंडर जारी कर दिया, जो नियमों के खिलाफ है।
किसी निश्चित काम के लिए फंड उपलब्ध न होने के बावजूद ईई ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए टेंडर जारी किया। वर्ष 2008-09 में नाले पर फुट सस्पेंशन बनाने के लिए विभाग को 23.90 लाख रुपये प्राप्त हुए, लेकिन आरोपियों ने मिलीभगत से पुराने ब्रिज के निर्माण में उक्त राशि को दिखा दिया।
देवदार की लकड़ी को हटाकर नया ब्रिज बनाया जाना था, लेकिन पुराने मैटेरियल को कहीं दर्ज नहीं किया गया। इस तरह लाखों का घोटाला किया गया। विजिलेंस मामले की जांच कर रही है।