कोरोना का कहरः ईरान में फंसे भारतीय छात्र, कोर्ट ने सरकार से कहा- उन्हें वापस लाने का इंतजाम करें
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कोरोना वायरस से प्रभावित दूसरे सबसे बड़े देश ईरान में कई भारतीय छात्र मुसीबत में हैं। जिनके पास मास्क तक नहीं हैं। खाने पीने की वस्तुओं और दवाइयों तक की जबरदस्त किल्लत है। यह स्टूडेंट्स वहां से भारत आना चाहते हैं, लेकिन संपर्क नहीं कर पा रहे। यह जानकारी कश्मीर के बडगाम जिले के रहने वाले डॉक्टर जाहूर हुसैन मीर ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट को दी है।
इस जानकारी को हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर केंद्र और प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। दरअसल, डॉ जाहूर की बेटी हीना सुगरा ईरान में मेडिसन की उच्च शिक्षा हासिल कर रही है। जिसने पिता को इसकी जानकारी दी है।
जहूर ने हाईकोर्ट को बताया कि उसकी बेटी ने इमेल किया है। बताया कि वहां पर तमाम स्कूल, कॉलेज और संस्थान बंद हैं। उसकी बेटी की तरह अन्य भारतीय स्टूडेंट्स के पास कोरोना से बचने के इंतजाम नहीं हैं। मास्क तक नहीं हैं, दवाइयों की किल्लत है। जहूर ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई कि केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और बच्चों को भारत लाए।
इस जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र और प्रदेश सरकार से कहा है कि वह तुरंत ईरान में स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करे और स्टूडेंट्स को मास्क सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराएं। दूसरा केंद्र सरकार स्टूडेंट्स को वापस लाने के लिए मंथन करे और तय करे कि उन्हें क्या करना है।
मोनिका कोहली को मददगार नियुक्त किया
एडवोकेट मोनिका कोहली को हाईकोर्ट ने अपना मददगार नियुक्त करते हुए कहा है कि वह सरकार को नोटिस दें और इसके बारे में जानकारी प्राप्त करें। अगली तारीख पर सरकार इसका जवाब दें। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले से जुड़ी किसी भी जानकारी और शिकायत को बतौर जनहित याचिका माना जाएगा।
सरकार को बंदोबस्त करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने केंद्र और प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि कोरोना से बचने के लिए तमाम व्यवस्थाएं करें। इसके लिए आइसोलेट वार्ड बनाएं। लैब तैयार करें। लोगों को इसके प्रति अधिक से अधिक जागरूक करें। तमाम बंदोबस्त करने के लिए कहा गया है, ताकि इस बीमारी से तत्काल बचाव को कदम उठाए जाएं।