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लॉकडाउन में पहली बार श्रमिकों के लिए बुक कराई फ्लाइट
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लद्दाख में फंसे मजदूरों के लिए
झारखंड ने बुक कराई फ्लाइट
- श्रमिक बोले, जिंदगी में पहली बार किया हवाई जहाज का सफर, सभी को अनुभव बताएंगे
- पहली फ्लाइट में लेह से दिल्ली पहुंचे, दिल्ली से रांची के लिए कराई गई दूसरी उड़ान
संवाद/एजेंसी
लेह/नई दिल्ली। लद्दाख में दो माह से फंसे 60 श्रमिकों के लिए झारखंड सरकार की पहल बड़ी राहत लेकर आई। लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों के लिए हवाई सेवा का खर्च उठाने वाले पहले राज्य झारखंड ने कनेक्टिंग फ्लाइट से अपने राज्य के लोगाें की घर वापसी का रास्ता साफ किया। शुक्रवार को लेह से स्पाइस जेट की फ्लाइट में झारखंड के रहने वाले 60 श्रमिक दिल्ली पहुंचे। खबर लिखे जाने तक दूसरी फ्लाइट में सभी श्रमिकों की झारखंड वापसी होनी थी।
वहीं, शंकाओं में घिरे इन श्रमिकों में शुक्रवार को खुशी का ठिकाना नहीं रहा। एक 25 वर्षीय श्रमिक ने कहा कि सभी के लिए हवाई जहाज के सफर का पहली मौका है। घर वापसी के साथ वह रोमांचित भी हैं। घर जाकर सभी से अनुभव साझा करेंगे। वहीं लेह एयरपोर्ट पर श्रमिक जौन पॉलस हंसदा ने कहा कि सभी उम्मीद छोड़ चुके थे। किसी तरह से झारखंड सरकार से संपर्क किया गया। इस पर फौरन जवाब आया और घर वापसी के लिए आश्वस्त किया गया। बीआरओ के प्रोजेक्ट विजयक में बीआरटीएफ कमांडर कर्नल कौशिक मित्रा ने कहा कि अप्रैल से नवंबर तक करीब सात हजार श्रमिक आते हैं। लेकिन सर्दी के सीजन में केवल यही 60 श्रमिक रह गए थे। वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा, हमारी सरकार 60 श्रमिकों को जहाज के माध्यम से लेह से रांची वापस ला रही है। लद्दाख प्रशासन, बीआरओ, स्पाइसजेट और इंडिगो टीम का सहयोग के लिए शुक्रिया।
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केंद्र से जवाब न मिलने पर
उठाया आठ लाख का खर्च
झारखंड सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया था कि प्रदेश के लोग अंडमान एवं निकोबार, लद्दाख व पूर्वोत्तर राज्यों में फंसे हैं। कोई और साधन होने पर उन्हें हवाई जहाज से लाने की व्यवस्था करें। सूत्रों के अनुसार जब इसका जवाब नहीं आया तो सोरेन सरकार ने लद्दाख से श्रमिकों को लाने के लिए आठ लाख रुपये का खर्च उठाने का फैसला किया।
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झारखंड ने बुक कराई फ्लाइट
- श्रमिक बोले, जिंदगी में पहली बार किया हवाई जहाज का सफर, सभी को अनुभव बताएंगे
- पहली फ्लाइट में लेह से दिल्ली पहुंचे, दिल्ली से रांची के लिए कराई गई दूसरी उड़ान
संवाद/एजेंसी
लेह/नई दिल्ली। लद्दाख में दो माह से फंसे 60 श्रमिकों के लिए झारखंड सरकार की पहल बड़ी राहत लेकर आई। लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों के लिए हवाई सेवा का खर्च उठाने वाले पहले राज्य झारखंड ने कनेक्टिंग फ्लाइट से अपने राज्य के लोगाें की घर वापसी का रास्ता साफ किया। शुक्रवार को लेह से स्पाइस जेट की फ्लाइट में झारखंड के रहने वाले 60 श्रमिक दिल्ली पहुंचे। खबर लिखे जाने तक दूसरी फ्लाइट में सभी श्रमिकों की झारखंड वापसी होनी थी।
वहीं, शंकाओं में घिरे इन श्रमिकों में शुक्रवार को खुशी का ठिकाना नहीं रहा। एक 25 वर्षीय श्रमिक ने कहा कि सभी के लिए हवाई जहाज के सफर का पहली मौका है। घर वापसी के साथ वह रोमांचित भी हैं। घर जाकर सभी से अनुभव साझा करेंगे। वहीं लेह एयरपोर्ट पर श्रमिक जौन पॉलस हंसदा ने कहा कि सभी उम्मीद छोड़ चुके थे। किसी तरह से झारखंड सरकार से संपर्क किया गया। इस पर फौरन जवाब आया और घर वापसी के लिए आश्वस्त किया गया। बीआरओ के प्रोजेक्ट विजयक में बीआरटीएफ कमांडर कर्नल कौशिक मित्रा ने कहा कि अप्रैल से नवंबर तक करीब सात हजार श्रमिक आते हैं। लेकिन सर्दी के सीजन में केवल यही 60 श्रमिक रह गए थे। वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर कहा, हमारी सरकार 60 श्रमिकों को जहाज के माध्यम से लेह से रांची वापस ला रही है। लद्दाख प्रशासन, बीआरओ, स्पाइसजेट और इंडिगो टीम का सहयोग के लिए शुक्रिया।
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केंद्र से जवाब न मिलने पर
उठाया आठ लाख का खर्च
झारखंड सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया था कि प्रदेश के लोग अंडमान एवं निकोबार, लद्दाख व पूर्वोत्तर राज्यों में फंसे हैं। कोई और साधन होने पर उन्हें हवाई जहाज से लाने की व्यवस्था करें। सूत्रों के अनुसार जब इसका जवाब नहीं आया तो सोरेन सरकार ने लद्दाख से श्रमिकों को लाने के लिए आठ लाख रुपये का खर्च उठाने का फैसला किया।
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