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पॉजिटिव होने के बाद भी दूसरा टेस्ट कराने पहुं रहे संक्रमित
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जम्मू। रैपिड एंटीजन टेस्टिंग में संक्रमित पाए जाने पर बड़ी संख्या में मरीज दोबारा टेस्ट के लिए पहुंच रहे हैं। इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग के कंप्यूटर रिकॉर्ड में हुआ है। रिकॉर्ड में करीब 200 ऐसे मामले सामने आए हैं। इसमें खतरा यह है कि अगर वह संक्रमित हैं तो दूसरी जगह जाने तक कई लोगों के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को फोन पर कोविड प्रोटोकाल का गंभीरता से पालन करने को कहा जा रहा है, वहीं बिना लक्षण वाले होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीज निर्धारित समय से पहले ही बाहर टहल रहे हैं।
बिना लक्षण वाले मरीजों में अधिकतर लक्षण नहीं होते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि वे पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं। लेकिन कोविड विशेषज्ञों के अनुसार तय मानकों के तहत ऐसे मरीजों में निर्धारित समय अवधि के दौरान वायरस सक्रिय रहता है, जो दूसरे लोगों को भी अपने चपेट में ले सकता है। सीएमओ जम्मू डॉ. जेपी सिंह के अनुसार कई ऐसे मामले पकड़ में आए हैं जो एक जगह से संक्रमित होकर दूसरी जगह पुष्टि के लिए दोबारा कोविड टेस्ट करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें कई मरीज ऐसे हैं जो दोबारा टेस्ट के दौरान अपना मोबाइल नंबर या पता दूसरी जगह का लिखा रहे हैं। ऐसे मरीजों से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। अगर रैपिड एंटीजन टेस्ट में कोई व्यक्ति संक्रमित पाया जाता है तो उसे खुद को पॉजिटिव समझकर कोविड प्रोटोकाल का गंभीरता से पालन करना चाहिए। यह उसके और समाज के अन्य वर्ग के हित में है। इससे संक्रमण का प्रसार रोकने से बचा जा सकता है।
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बिना लक्षण वाले मरीजों में अधिकतर लक्षण नहीं होते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि वे पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं। लेकिन कोविड विशेषज्ञों के अनुसार तय मानकों के तहत ऐसे मरीजों में निर्धारित समय अवधि के दौरान वायरस सक्रिय रहता है, जो दूसरे लोगों को भी अपने चपेट में ले सकता है। सीएमओ जम्मू डॉ. जेपी सिंह के अनुसार कई ऐसे मामले पकड़ में आए हैं जो एक जगह से संक्रमित होकर दूसरी जगह पुष्टि के लिए दोबारा कोविड टेस्ट करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें कई मरीज ऐसे हैं जो दोबारा टेस्ट के दौरान अपना मोबाइल नंबर या पता दूसरी जगह का लिखा रहे हैं। ऐसे मरीजों से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। अगर रैपिड एंटीजन टेस्ट में कोई व्यक्ति संक्रमित पाया जाता है तो उसे खुद को पॉजिटिव समझकर कोविड प्रोटोकाल का गंभीरता से पालन करना चाहिए। यह उसके और समाज के अन्य वर्ग के हित में है। इससे संक्रमण का प्रसार रोकने से बचा जा सकता है।
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