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'केस ट्रांसफर' के मसले पर संविधान पीठ लेगी फैसला

Sat, 25 Apr 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Sat, 25 Apr 2015 12:07 AM IST
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constitutional bench to decide on 'case transfer'

जम्मू-कश्मीर के केसों को बाहर स्थानांतरित करने या अन्य राज्यों से केस रियासत में भेजने के अधिकार के संबंध में दायर याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान पीठ को भेजा है। मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू, जस्टिस एसए बबोडे और जस्टिस अरुण मिश्रा की तीन सदस्यीय बेंच ने स्टेट की ओर से उपस्थित एडवोकेट जनरल आरए जान और एडवोकेट असीम साहनी की दलीलें सुनने के बाद आदेश में कहा कि इन याचिकाओं ने जेएंडके से सिविल केस अन्य राज्य में स्थानांतरित करने के लिए अदालत के अधिकार वाला महत्वपूर्ण सवाल उठाया है।

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बेंच ने कहा कि उनकी राय से संवैधानिक महत्व के इस सवाल पर संविधान की व्याख्या की आवश्यकता है। इसलिए इसे संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए रखा जाना चाहिए। यह पहला अवसर है, जब जेएंडके को लेकर उठे सवाल के केस को संविधान पीठ के समक्ष भेजा गया है। महत्वपूर्ण यह है कि कई ऐसी याचिकाएं दायर हुईं हैं, जिसमें पार्टियां या तो किसी केस को रियासत से बाहर भेजने या फिर अन्य प्रदेश से रियासत भेजने के लिए आवेदन किया है।
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इस मुद्दे पर मामले को तीन सदस्यीय बेंच के पास भेजा गया, जहां से उसे संविधान पीठ के सुपुर्द किया गया है, जिसमें सुप्रीमकोर्ट के पांच जजों की बेंच मामले पर विचार करेगी। इस तरह के स्थानांतरण वाली याचिका भाविका भारती बनाम नकुल महाजन की है, जिसमें महाजन के वकील असीम साहनी ने सुप्रीमकोर्ट में मामला रख इसे संवैधानिक महत्ता वाला बताया। साहनी ने स्थानांतरण का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र और अधिकार को गिनाया।
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साहनी का कहना है कि इस तरह के मामले रियासत से बाहर नहीं भेजे जा सकते, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में केंद्र की सीपीसी लागू नहीं होती और जेएंडके सीपीसी सुप्रीम कोर्ट को अधिकार प्रदान नहीं करती। भारत और जम्मू-कश्मीर के संविधान भी सुप्रीम कोर्ट को इस तरह के अधिकार प्रदान नहीं करते। उन्होंने आग्रह किया कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर फैसला देना है, जिसमें याचिकाकर्ता ने तलाक के लिए आवेदन किया है।


यदि फैसले में देरी होती है तो याचिकाकर्ता को समय पर न्याय नहीं मिल पाएगा। साहनी ने इस मामले को संविधान पीठ के समक्ष जल्द सूचीबद्ध करने का आग्रह किया, ताकि प्रत्येक दिन याचिकाकर्ता की उम्र घटती जाएगी और उसे नुकसान होगा। जेएनएफ

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