कश्मीर में अमरनाथ यात्रा से पहले हिंसा की साजिश, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
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श्री अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले माहौल खराब करने की साजिश शुरू हो गई है। 2008 में अमरनाथ भूमि विवाद के बाद से कश्मीर में हिंसा को एक ट्रेंड बना लिया गया है। हर साल यात्रा और पर्यटन का पीक सीजन शुरू होने से पहले हिंसा शुरू हो जाती है।
अमरनाथ यात्रा और पर्यटन सीजन से कश्मीर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और लगातार आठ साल से इस स्थिति को कमजोर किया जा रहा है। अभी यात्रा शुरू नहीं हुई और हिंसा से संबंधित वीडियो बनाकर सोशल नेटवर्किंग साइट पर अपलोड किए जा रहे हैं। कश्मीर में उपचुनाव के दौरान इंटरनेट बंद होने के बाद लगातार तीन वीडियो अपलोड किए गए।
इसमें एक वीडियो में सेना को गोली चलाते हुए दिखाया गया। दूसरे में एक युवक को गाड़ी के आगे बिठाकर चलते हुए दिखाया गया तो तीसरे में जवानों के साथ पत्थरबाजों की मारपीट करने की घटना दिखाई गई। जानबूझकर घाटी में इस तरह के हालात सामने लाए जा रहे हैं ताकि पूरे देश में संदेश जाए कि कश्मीर में हिंसा है। पर्यटक और अमरनाथ यात्री कश्मीर में न आएं।
वर्ष 2009 से शुरू हुआ सिलसिला
वैसे तो 2008 से ही अमरनाथ यात्रा को लेकर विवाद चल रहा है, लेकिन 2009 के बाद हिंसा को रूटीन बना लिया गया है। 2009 में शोपियां में दो महिलाओं का रेप के बाद हत्या करने के मामले से कश्मीर में हिंसा रही। इसके बाद 2010 में फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हिंसा हुई।
2011, 2012, 2013 में भी स्थानीय युवकों को आजादी के नाम पर हिंसा के लिए उकसाया गया। 2014 में बाढ़ की वजह से यात्रा प्रभावित रही। 2015 में भी युवकों को उकसाया गया। 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद हिंसा भड़की। इस साल फिर से हिंसा भड़काई गई है।
कश्मीर में हिंसा से संबंधी कई वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक साइबर सेल यह नहीं पता लगा पाया कि यह वीडियो कौन और कहां से अपलोड कर रहा है। यह भी एक बड़ा कारण है।