अकेले चुनावी समर में उतरेगी कांग्रेस, कार्यकर्ता खुश
कांग्रेस द्वारा जम्मू कश्मीर में अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने के फैसले से पार्टी के कश्मीर कैडर में खुशी की लहर है। कई दिनों से कांग्रेस और नेकां के बीच गठबंधन को लेकर चल रही सशंय की स्थिति रविवार को साफ हो गई।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कश्मीर इकाई के सीनियर नेताओं ने कहा कि इस फैसले से राज्य में सांप्रदायिक और क्षेत्रीय सियासी दलों के बीच गठजोड़ को बेनकाब और खत्म करने में मदद मिलेगी।
प्रदेश कांग्रेस की मीडिया कमेटी के चेयरमैन फारूक रेंजू शाह ने अमर उजाला को बताया कि पार्टी हाईकमान के अपने दम पर विधानसभा चुनाव लड़ने के फैसले का सकारात्मक असर पड़ेगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि जम्मू कश्मीर में कांग्रेस अगली सरकार बनाएगी।
पार्टी के कई बड़े नेताओं ने चुनाव की रणनिति पर चर्चा की
राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव अंबिका सोनी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज ने रविवार को जम्मू में अकेले चुनाव लड़ने का जो ऐलान किया है, उसका कश्मीर में हर कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता ने स्वागत किया है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अब्दुल गनी वकील का कहना है कि कांग्रेस का जनाधार जम्मू कश्मीर के तीनों खित्तों में है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को नेकां से गठबंधन की गलती का खामियाजा भुगतना पड़ा था।
अलबत्ता पार्टी हाईकमान द्वारा अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला कांग्रेस हित में है। इसके बेहतर नतीजे विधानसभा चुनाव में दिखेंगे और सीटों की संख्या भी बढ़ेगी।
उनका कहना है कि कांग्रेस ही जम्मू कश्मीर में एक मात्र सियासी ताकत है, जो सांप्रदायिक और कट्टरपंथी ताकतों का सामना कर सकती है।