जम्मू में कांग्रेस को फिर उभारेगा ये सुपर प्लान
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घाटी में पीडीपी के साथ अब नेकां की चुनौती भी कांग्रेस को सामने है। इसलिए प्रभावशाली नेताओं और छोटे दलों के साथ गठबंधन हो रहा है।
तारिगामी, मीर और यासिन 2002 से कांग्रेस की राजनीति के साथ रहे हैं। यासिन और मीर पहले मंत्री रह चुके हैं और तारिगामी विधानसभा में मुखर रहे हैं।
मीर इस बार विधानसभा में कांग्रेस के एसोसिएट सदस्य रहे हैं और कांग्रेस कोटे से मंत्री भी हैं। इन तीन क्षत्रपों ने कांग्रेस का साथ स्वीकार कर लिया है।
क्षत्रपों और छोटे दलों से समझौता तय
रियासत में विधानसभा चुनाव के लिए नये सियासी समीकरण बनने लगे हैं। नेशनल कांफ्रेंस से नाता तोड़ने के बाद कांग्रेस अब एक-एक सीट के लिए रणनीति तैयार करने में जुटी है।
कुछ प्रभावशाली क्षत्रपों और छोटे दलों से कांग्रेस का समझौता लगभग तय हो गया है। कांग्रेस इन नेताओं और दलों के प्रत्याशियों के खिलाफ उम्मीदवार खड़े नहीं करेगी और बदले में ये दल और क्षत्रप चुनाव बाद कांग्रेस को समर्थन देंगे।
कांग्रेस ने जम्मू संभाग में भाजपा से मुकाबले के लिए चुनाव से पहले नेकां से रिश्ता तोड़ा ताकि सरकार की विफलता की नाराजगी उसे नहीं झेलनी पड़े। चुनाव बाद नेकां या पीडीपी से गठबंधन के विकल्प खुले रखे गए हैं।
पीडीपी ने भी नहीं दिया भाव
कांग्रेस की ओर से चुनाव से पूर्व पीडीपी से गठबंधन की पहल हुई थी जिसे पीडीपी ने मंजूर नहीं किया। लोकसभा चुनाव में कश्मीर घाटी की सभी तीन सीटें जीतने के बाद पीडीपी के मंसूबे बुलंद हैं।
पीडीपी को लगता है कि चुनाव से पूर्व कांग्रेस से गठबंधन की स्थिति में उसे यूपीए सरकार के कार्यकाल की जवाबदेही लेनी पड़ेगी जो कश्मीर घाटी में नुकसानदेह साबित हो सकता है।
अफजल गुरु को फांसी के मुद्दे पर पीडीपी शुरू से नेकां के साथ-साथ यूपीए सरकार को भी घेरती रही है। लिहाजा, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद से मुलाकात बेनतीजा रही थी।
कश्मीर संभाग में दस सीटें जीतने का लक्ष्य
कांग्रेस में आजाद और सैफुद्दीन सोज में प्रत्याशियों के चयन पर मतभेद है, लेकिन, प्रभावशाली निर्दलियों और छोटे दलों के समर्थन पर सहमति बन गई है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक कुलगाम के विधायक सीपीएम नेता एम वाई तारिगामी, टंगमर्ग के एमएलए गुलाम हसन मीर और खान साहब के विधायक हकीम मोहम्मद यासिन के खिलाफ कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारने का निर्णय लिया है।
इन विधायकों का अपने क्षेत्रों में खासा जनाधार माना जाता है। कांग्रेस चुनाव में कम से कम 30 सीटें हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। इनमें से 10 सीटें कश्मीर से लाने की योजना है।