श्रीनगर के हरि पर्वत किले की हालत खस्ता, किले के जीर्णोंद्धार के लिए जारी है काम
पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर मुश्ताक अहमद बेग ने बताया कि इस किले के जीर्णोंद्धार का काम पिछले चार महीने से शुरू किया गया है, लेकिन खराब मौसम के चलते ज्यादा काम नहीं हो पाया। बेग ने कहा कि आने वाले 15 दिनों में पहले टेरेस का काम पूरा हो जाएगा, लेकिन दूसरे टेरेस को पूरा होने में एक-दो महीने का समय लग सकता है।
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श्रीनगर में डल झील के पश्चिम में रैनावाड़ी इलाके में हरि पर्वत किले का हाल बेहाल है। पिछले कुछ समय से पर्यटकों के लिए खोले गए इस किले का हाल ऐसा है कि कोई वहां दुबारा जाना नहीं चाहेगा। पुरातत्व विभाग का कहना है कि वहां पर सुरक्षाबलों की मौजूदगी के चलते उनकी भी कुछ सीमाएं हैं, लेकिन इसकी मौलिकता को बहाल करने के लिए विभाग द्वारा कार्य जारी है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले चरण के जीर्णोंद्धार के लिए करीब 1.37 करोड़ के डीपीआर की मंजूरी दी जा चुकी है।
हरी पर्वत किले का निर्माण एक अफगान गवर्नर मो खान ने 18वीं शताब्दी में करवाया था। उसके बाद 1590 ईसवी में मुगल सम्राट अकबर ने इस किले की चारदीवारी का निर्माण करवाया। वर्तमान में इस किले का रखरखाव जम्मू-कश्मीर सरकार का पुरातत्व विभाग कर रहा है। इसे वर्ष 2007 में 18 वर्षों के बाद पर्यटकों और आम जनता के लिए खोल दिया गया था, लेकिन उसके बावजूद भी वहां की हालत ऐसी है कि अगर कोई एक बार वहां जाता है वो दुबारा नहीं जाना चाहता। किले तक जाने वाला रास्ता खस्ताहाल में है।
पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर मुश्ताक अहमद बेग ने बताया कि दूसरे टेरेस पर एक मस्जिद थी, उसे भी रिस्टोर किया जाएगा। पर्यटन विभाग द्वारा भी एक लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत यहां की जानी है और उन्होंने किले तक जाने वाली सीढ़ियों को ठीक करने का जिम्मा लिया है। उन्होंने बताया कि पहले चरण के काम के लिए 1.37 करोड़ की डीपीआर पहले से मंजूर की जा चुकी है और यह काम पूरा होने के बाद बाकी के काम के लिए टेंडरिंग की जाएगी।
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शारिका देवी मंदिर भी जाते हैं श्रद्धालु
हरी पर्वत किले के एक ओर मुसलमानों की मकदूम साहिब की जियारत है, दूसरी ओर हिन्दुओं का शारिका देवी मंदिर और पर्वत के दामन में गुरुद्वारा छट्टी पादशाही भी है। इसके बारे में कहा जाता है कि सिखों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह यहां आए थे। इस बीच पुराण यह भी कहते हैं कि कश्मीर एक झील थी और इस पहाड़ी पर एक राक्षस रहता था जो लोगों को तंग करता था। श्रीनगर की ईष्ट देवी मां शारिका ने एक चिड़िया का रूप धारण कर उस राक्षस के सर पर कंकर फेंका जो एक विशाल पत्थर के रूप में शारिका देवी मंदिर में आज भी मौजूद है। इसी से राक्षस का नाश हुआ था।