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जम्मू-कश्मीर : 12वीं के छात्र बोर्ड परीक्षा रद्द होने से खुश, फैसले का स्वागत, लेकिन शिक्षाविद नाखुश

Thu, 03 Jun 2021 12:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा  न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
 न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 03 Jun 2021 12:42 AM IST
सार

हालांकि केंद्र सरकार के जिस फैसले को लेकर छात्र खुश हैं और उसका स्वागत कर रहे हैं उसे लेकर जम्मू-कश्मीर के शिक्षाविदों की राय जुदा है। उनका कहना है कि समाज के भविष्य पर इस फैसले का दूरगामी असर होगा। 

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Class 12 CBSE students from J&K welcome cancellation of exams
सीबीएसई बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं रद्द - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा 12वीं की बोर्ड परीक्षा रद्द करने के फैसले से घाटी के छात्र भी खुश हैं। छात्रों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। छात्रों का कहना है कि बीते कई सालों से यहां के छात्र कई तरह का तनाव झेल रहे हैं। परीक्षा रद्द हो जाने से उन्हे राहत मिलेगी। जम्मू-कश्मीर में करीब दो साल से कक्षाएं भी बंद चल रही हैं।

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12वीं के एक छात्र राजा आसिफ का कहना है कि अगर परीक्षाओं में और देर हो जाती तो छात्रों का पूरा एक साल बर्बाद हो जाता। वे बताते हैं कि हम लोगों का अलग सत्र होता है। यहां से स्कूल स्थानीय यूटी बोर्ड के तहत आते हैं और कश्मीर में परीक्षाएं हो ही चुकी हैं। कॉलेज और विश्वविद्यालय में भी दाखिले शुरू हो चुके हैं। 
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एक अन्य छात्र फैसल अहमद ने कहा कि इन हालात में छात्र ही नहीं माता-पिता भी परीक्षाओं को लेकर चिंतित थे। दूसरे, परीक्षाओं में बैठने वाले छात्र ही नहीं वहां ड्यूटी देने वाले परीक्षकों को भी अब तक कोरोना का टीका नहीं लगा है। अगर टीकाकरण में छात्रों के भी प्राथमिकता दी जाती है तब भी दो से तीन महीने की देरी होती क्योंकि तब तक ही सब छात्रों को टीके की दोनों खुराकें लग पातीं।   
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एक अन्य छात्र ने कहा कि परीक्षाओं का कैंसिल होना इसलिए भी जरूरी था ताकि हम सब कोरोना की तीसरी लहर से बच सकें। अगर परीक्षाएं होतीं तो लाखों बच्चे महमारी की तीसरी लहर के निशाने पर हो सकते थे। केंद्र सरकार के फैसले ने हमे तनाव मुक्त किया है। 


हालांकि केंद्र सरकार के जिस फैसले को लेकर छात्र खुश हैं और उसका स्वागत कर रहे हैं उसे लेकर जम्मू-कश्मीर के शिक्षाविदों की राय जुदा है। उनका कहना है कि परीक्षाएं रद्द करने का फैसला छात्रों के हितों में नहीं है। जम्मू कश्मीर टीचर्स एसोसिएशन के शाह फैयाज का कहना है कि समाज के भविष्य पर इस फैसले का दूरगामी असर होगा। 

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