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घाटी में सिर्फ दो दिन होगा सुरक्षाबलों का मूवमेंट, इस दौरान बंद प्रतिबंधित रहेंगे आम वाहन
Thu, 04 Apr 2019 10:52 AM IST
अनिल पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: अनिल पांडेय
Updated Thu, 04 Apr 2019 10:52 AM IST
सार
- सुरक्षाबलों पर फिदायीन हमलों की आशंका के चलते सरकार ने लिया फैसला
- पूरी तरह से निजी वाहनों की मूवमेंट पर रहेगा प्रतिबंध
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सेना का काफिला
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की मूवमेंट पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नेशनल हाईवे पर हफ्ते में दो दिन सुरक्षाबलों का मूवमेंट होगा। इन दो दिनों के दौरान सार्वजनिक और निजी वाहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। किसी भी आपात में जिला प्रशासन एवं पुलिस मिलकर कर्फ्यू के दौरान अपनाए जाने वाले नियमों का पालन करने की अनुमति देगा। सुरक्षाबलों पर पुलवामा जैसा हमला होने की आशंका के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।
सुबह 4 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक हाईवे सिर्फ सुरक्षाबलों के काफिलों के लिए खुलेगा। 31 मई 2019 तक यह आदेश पूरी तरह से प्रभावी रहेगा। बारामुला से श्रीनगर और इसके बाद काजीगुंड, बनिहाल, रामबन और उधमपुर तक वाहनों की मूवमेंट पर प्रतिबंध रहेगा। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ऐसा ही आदेश दिया था। बावजूद इसके 30 मार्च को पुलवामा जैसा हमला दोहराने की कोशिश की गई। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ की कानवाय पर आत्मघाती हमला हुआ था। इसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।
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सुबह 4 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक हाईवे सिर्फ सुरक्षाबलों के काफिलों के लिए खुलेगा। 31 मई 2019 तक यह आदेश पूरी तरह से प्रभावी रहेगा। बारामुला से श्रीनगर और इसके बाद काजीगुंड, बनिहाल, रामबन और उधमपुर तक वाहनों की मूवमेंट पर प्रतिबंध रहेगा। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ऐसा ही आदेश दिया था। बावजूद इसके 30 मार्च को पुलवामा जैसा हमला दोहराने की कोशिश की गई। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ की कानवाय पर आत्मघाती हमला हुआ था। इसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।
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क्या फेल हो गई सुरक्षा एजेंसियां
सरकार ने यह एक बड़ा फैसला किया है। सुरक्षा एजेंसियां सुरक्षाबलों की कानवाय की मूवमेंट के दौरान पहले जारी आदेश को पूरी तरह से फालो नहीं कर पाई। इस वजह से सरकार को यह आदेश जारी करना पड़ा है। क्योंकि 30 मार्च को फिर से पुलवामा जैसा हमला करने की कोशिश की गई। इसमें कहीं न कहीं बड़ी चूक माना गया है। जिस पर सरकार ने यह फैसला लिया। रियासत में 11 अप्रैल को पहले चरण के लोकसभा चुनाव का मतदान होना है।
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