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सिविल सोसाइटी तय करे विधायकों का वेतन
ब्यूरो, अमर उजाला/श्रीनगर
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:25 AM IST
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा
- फोटो : Nikhil Mehta
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माननीयों के वेतन में व्यापक बढ़ोतरी की मांग को पूरा करने के लिए विधायकों की समिति के गठन पर रामनगर के विधायक आरएस पठानिया नाइत्तेफाकी रखते हैं।
विधानसभा में विधायक आरएस पठानिया ने कहा कि वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने विधायकों की वेतन बढ़ोतरी के लिए विभिन्न दलों के विधायकों का समूह गठित करने की बात कही है।
वेतन निर्धारण के लिए वह इस कदम का कतई समर्थन नहीं करते। पठानिया ने कहा कि चुने हुए नुमाइंदे होने के बावजूद विधायक अपने काम के मूल्यांकन और वेतन का निर्धारण करने के लिए खुद जज नहीं बन सकते। लिहाजा इस मामले पर गेंद को सिविल सोसाइटी के पाले में डालना तर्कसंगत है।
उन्होंने कहा कि मीडिया से लेकर आम जनता में विधायकों द्वारा अपने वेतन की बढ़ोतरी को मनमाफिक करने की बातों पर चर्चा हो रही है। यह कोई युक्तिसंगत बात नहीं बनती। विधायक ने कहा कि विधायकों को एक से अधिक स्थानों पर कार्यालय चलाने पड़ते हैं।
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जनता के बीच जाने के लिए तमाम तरह के खर्चे वहन करने पड़ते हैं। यह भी सच है कि काम की तुलना में वेतन कम है, इसके बावजूद वेतन बढ़ोतरी पर फैसला लेने का अधिकार विधायकों के बजाय सिविल सोसाइटी के पास ही होना चाहिए।
विधायक ने सदन में विधायकों को ज्यादा जानकार और शिक्षित बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि संसदीय विशेषाधिकारों की तर्ज पर विधानसभा और परिषद में भी जनप्रतिनिधियों को आधुनिक चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाया जाना चाहिए।
इसके लिए ई-लेजिस्लेचर पर काम किया जाना चाहिए। इस अवसर पर विधायक ने रामनगर बसंतगढ़ सड़क निर्माण सुनिश्चित करने सहित रामनगर-रौन रोड और हंसा पुल में घटिया निर्माण की जांच की मांग की।
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विधानसभा में विधायक आरएस पठानिया ने कहा कि वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने विधायकों की वेतन बढ़ोतरी के लिए विभिन्न दलों के विधायकों का समूह गठित करने की बात कही है।
वेतन निर्धारण के लिए वह इस कदम का कतई समर्थन नहीं करते। पठानिया ने कहा कि चुने हुए नुमाइंदे होने के बावजूद विधायक अपने काम के मूल्यांकन और वेतन का निर्धारण करने के लिए खुद जज नहीं बन सकते। लिहाजा इस मामले पर गेंद को सिविल सोसाइटी के पाले में डालना तर्कसंगत है।
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उन्होंने कहा कि मीडिया से लेकर आम जनता में विधायकों द्वारा अपने वेतन की बढ़ोतरी को मनमाफिक करने की बातों पर चर्चा हो रही है। यह कोई युक्तिसंगत बात नहीं बनती। विधायक ने कहा कि विधायकों को एक से अधिक स्थानों पर कार्यालय चलाने पड़ते हैं।
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जनता के बीच जाने के लिए तमाम तरह के खर्चे वहन करने पड़ते हैं। यह भी सच है कि काम की तुलना में वेतन कम है, इसके बावजूद वेतन बढ़ोतरी पर फैसला लेने का अधिकार विधायकों के बजाय सिविल सोसाइटी के पास ही होना चाहिए।
विधायक ने सदन में विधायकों को ज्यादा जानकार और शिक्षित बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि संसदीय विशेषाधिकारों की तर्ज पर विधानसभा और परिषद में भी जनप्रतिनिधियों को आधुनिक चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाया जाना चाहिए।
इसके लिए ई-लेजिस्लेचर पर काम किया जाना चाहिए। इस अवसर पर विधायक ने रामनगर बसंतगढ़ सड़क निर्माण सुनिश्चित करने सहित रामनगर-रौन रोड और हंसा पुल में घटिया निर्माण की जांच की मांग की।