{"_id":"628bf3b9b9be7729790483b8","slug":"civil-defence-committe-jammu-city-news-jmu260427851","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीमावर्ती छह गांवों में बनीं सिविल डिफेंस कमेटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीमावर्ती छह गांवों में बनीं सिविल डिफेंस कमेटियां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। सिविल डिफेंस होमगार्ड विभाग द्वारा सीमांत गांव में सिविल डिफेंस कमेटियां गठित करने का कार्य शुुरू कर दिया गया है। छह गांवों में कमेटियां बनाकर इसमें शामिल लोगों को ट्रेनिंग दे दी गई है। हालांकि मई के अंत में इन कमेटियों को आधिकारिक तौर पर लांच किया जाएगा। इसके बाद इनकी ट्रेनिंग और अधिक तकनीकी रूप से कराई जाएगी। 50 गांवों में यह कमेटियां बनाई जानी हैं। यह कमेटियां तभी काम करेंगी, जब कभी सरहद पर गोलाबारी हो जाए। उस वक्त यह कमेटियां ग्रामीणों को सुरक्षित बंकरों तक पहुंचाने और उनके मवेशियों को बचाने के लिए काम करेंगी।
जानकारी के अनुसार गांव अला (अरनिया), परगवाल और कठुआ के राजबाग के 4 गांवों में कमेटियां बन गई हैं। इनमें 30 से 32 लोग शामिल किए गए हैं। इनको ट्रेनिंग दी गई है कि कैसे गोलाबारी होने की स्थिति में लोगों को बचाना है।
गांव अला की सरपंच कमलेश कुमारी का कहना है कि पाकिस्तानी गोलाबारी होने पर अकसर उनका गांव प्रभावित होता है। कई लोग जख्मी हो जाते हैं। जब तक पुलिस और प्रशासन घायलों तक पहुंचता है, तब तक उनकी जान चली गई होती है। ऐसे में इस तरह की कमेटी से काफी लाभ होगा। सदस्यों को पांच दिन की ट्रेनिंग दी गई है। इसमें सिखाया गया है कि किस तरह से गोलाबारी होने पर कोई घायल हो तो उसे कैसे बचाना है। इसके अलावा ह़दय गति रुकना, आग लग जाने की स्थिति से निपटने की जानकारी भी दी गई है।
विज्ञापन
सिविल डिफेंस होमगार्ड के कमांडेंट जनरल हेमंत कुमार लोहिया का कहना है कि मई के अंत तक इनको लांच किया जाएगा। अभी फिलहाल 6 गांव चुन लिए गए हैं। बाकी के गांव भी जल्द चुने जाएंगे। यह कमेटियां गोलाबारी होने की स्थिति में काफी मददगार साबित होंगी।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार गांव अला (अरनिया), परगवाल और कठुआ के राजबाग के 4 गांवों में कमेटियां बन गई हैं। इनमें 30 से 32 लोग शामिल किए गए हैं। इनको ट्रेनिंग दी गई है कि कैसे गोलाबारी होने की स्थिति में लोगों को बचाना है।
विज्ञापन
गांव अला की सरपंच कमलेश कुमारी का कहना है कि पाकिस्तानी गोलाबारी होने पर अकसर उनका गांव प्रभावित होता है। कई लोग जख्मी हो जाते हैं। जब तक पुलिस और प्रशासन घायलों तक पहुंचता है, तब तक उनकी जान चली गई होती है। ऐसे में इस तरह की कमेटी से काफी लाभ होगा। सदस्यों को पांच दिन की ट्रेनिंग दी गई है। इसमें सिखाया गया है कि किस तरह से गोलाबारी होने पर कोई घायल हो तो उसे कैसे बचाना है। इसके अलावा ह़दय गति रुकना, आग लग जाने की स्थिति से निपटने की जानकारी भी दी गई है।
विज्ञापन
सिविल डिफेंस होमगार्ड के कमांडेंट जनरल हेमंत कुमार लोहिया का कहना है कि मई के अंत तक इनको लांच किया जाएगा। अभी फिलहाल 6 गांव चुन लिए गए हैं। बाकी के गांव भी जल्द चुने जाएंगे। यह कमेटियां गोलाबारी होने की स्थिति में काफी मददगार साबित होंगी।