चुरंगू बोले: घाटी में कश्मीरी हिंदू बिरादरी के खिलाफ जातीय संहार की कई बार हुईं घटनाएं, रिकार्ड उपलब्ध
भाजपा के कश्मीर मामलों के प्रभारी ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के समक्ष रखे तथ्य। कहा- सांप्रदायिक नारों के साथ की गईं सिलेक्टिव हत्याएं।
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कश्मीरी पंडित विस्थापितों के नेता एवं भाजपा के कश्मीर मामलों एवं फीडबैक विभाग के प्रभारी अश्विनी कुमार चुरंगू ने अमेरिका आधारित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के समक्ष कश्मीरी पंडितों के नरसंहार से संबंधित तथ्य रखे।आयोग की तरफ से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए स्वयं के प्रस्ताव पर पहली सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किए गए भाजपा नेता अश्विनी कुमार चुरंगू ने बयान दर्ज करवाते हुए कहा कि कश्मीर घाटी में कश्मीरी हिंदू बिरादरी के खिलाफ जातीय संहार की कई बार घटनाएं हुई हैं।
नरसंहार की कार्रवाई मुस्लिम कट्टरपंथियों और सियासी ताकतों की तरफ से हुई
उन्होंने कहा कि 1931 में कश्मीर में हिंदू बिरादरी के नरसंहार की कार्रवाई मुस्लिम कट्टरपंथियों और सियासी ताकतों की तरफ से हुई। इसके बाद शेख अब्दुल्ला जो मुस्लिम कांफ्रेंस वर्तमान में नेशनल कांफ्रेंस के बड़े नेता थे, उन्होंने 1933 में उत्तरी कश्मीर के त्रागपोरा में अपने भाषण में कहा था कि मुस्लिम कांफ्रेंस और मुस्लिमों का कार्य कश्मीर से हिंदुओं को भगाना है। जम्मू-कश्मीर में तत्कालीन महाराजा की सरकार के राजनीतिक विभाग की फाइलों में इस संबंध में रिकार्ड उपलब्ध हैं।
घाटी में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के 46 मंदिर जला दिए
1986 में कश्मीर घाटी में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के 46 मंदिर जला दिए। इसके बाद हिंदुओं की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद आतंकवाद को चेहरा बनाकर कश्मीर घाटी में हिंदुओं के जातीय संहार का कार्य हुआ। सांप्रदायिक नारों के साथ कश्मीरी पंडितों की सिलेक्टिव हत्याएं की गईं।
1987 में बनी सरकार सुरक्षा देने में रही विफल
चुरंगू ने कहा कि 1987 में नेकां और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनी और वह कश्मीरी पंडितों की जानमाल की सुरक्षा करने में पूरी तरह से नाकाम रही। वहीं, सिलेक्टिव हत्याएं, अपहरण, बलात्कार की घटनाएं आम हो गईं और कश्मीर पंडितों को कश्मीर को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।
कश्मीरी पंडितों के 1990 में विस्थापन और सांस्कृतिक आधार को नष्ट करने और सैकड़ों मंदिरों, स्कूलों, व्यापारिक संस्थानों, दुकानों और उनके घरों को जलाने के बाद भी कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने का कार्य जारी है।
द कश्मीर फाइल्स के बाद से देखी जा रही जागृति
द कश्मीर फाइल्स फिल्म के प्रसारित होने के बाद विश्व भर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के दर्द व उनके हितों को लेकर जागृति देखी जा रही है। अमेरिका आधारित अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के अध्यक्ष प्रो. वेद नंदा हैं। वही जी मार्श आयोग के सदस्य हैं।