{"_id":"5d59cb598ebc3e897376ee45","slug":"china-enters-demchok-due-to-wrong-policies-of-congress-says-ladakh-mp-jamyang-sering-namgyal","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सांसद नामग्याल ने कहा, कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण चीन डेमचॉक तक घुसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांसद नामग्याल ने कहा, कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण चीन डेमचॉक तक घुसा
Mon, 19 Aug 2019 03:34 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लेह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लेह
Published by: Vikas Kumar
Updated Mon, 19 Aug 2019 03:34 AM IST
विज्ञापन
भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल
- फोटो : अमर उजाला
संसद में अनुच्छेद 370 पर चर्चा के दौरान अपने जोशीले भाषण से चर्चा में आए लद्दाख के भाजपा सांसद जाम्यांग सेरिंग नामग्याल का मानना है कि अपने शासन काल के दौरान इलाके को रक्षा नीतियों में जरूरत के हिसाब से महत्व नहीं दिया गया। इसी के चलते चीन ने डेमचॉक क्षेत्र तक कब्जा कर लिया।
विज्ञापन
एक समाचार एजेंसी को दिए गए साक्षात्कार में पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए सांसद ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकारों ने विपरीत परिस्थितियों में तुष्टीकरण की नीति का पालन करके कश्मीर को बर्बाद कर दिया साथ ही लद्दाख को भी काफी क्षति पहुंचाई।
विज्ञापन
नामग्याल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ‘फारवर्ड पॉलिसी’ अपनायी जिसमें कहा गया कि हमें एक-एक इंच चीन की ओर बढ़ना चाहिए। अपने कार्यान्वयन के दौरान यह ‘बैकवर्ड पॉलिसी’ बन गई। चीनी सेना हमारे क्षेत्र में लगातार घुसती चली गई और हम लगातार पीछे हटते चले गए।
विज्ञापन
ये भी पढ़ेंः लेहः देश के लोगों को खूब लुभा रहा है आदि महोत्सव, 20 राज्यों के आदिवासी ले रहे हिस्सा, तस्वीरें
34 वर्षीय सांसद ने कहा, यही वजह है कि अक्साई चीन पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवान डेमचॉक नाला तक पहुंच गए क्योंकि कांग्रेस के 55 वर्षो के शासन में रक्षा नीतियों में लद्दाख को उचित सम्मान नहीं मिला।
गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में चीन और भारत की सेनाओं के बीच तब गतिरोध पैदा हो गया था जब पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने डेमचॉक के नजदीक समीप भारत द्वारा अपने ही क्षेत्र के समीप नाला या नहर बनाने पर आपत्ति जताई थी।
इस साल जुलाई में चीनी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएली) पार कर डेमचॉक सेक्टर में घुस गई। इससे पहले कुछ तिब्बतियों ने दलाई लामा के जन्मदिन के मौके पर तिब्बत के झंडे लहराए थे। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने बाद में कहा था, कि कोई घुसपैठ नहीं हुई। चीनी आए और उन्होंने अपनी मानी हुई वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त की।
-केंद्र की योजना से पलायन खत्म होगा
यह पूछे जाने पर कि लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने से रक्षा के परिप्रेक्ष्य से कैसे चीजें बदलेंगी? इस पर नामग्याल ने कहा कि क्षेत्र को अब अपने हक के अनुसार महत्व मिलेगा। तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा घोषित की गई पुनर्वास परियोजना के क्रियान्वयन से सीमावर्ती गांवों से पलायन खत्म होगा।
-कश्मीर पर कांग्रेस ने कभी सख्ती नहीं अपनाई
उन्होंने कहा, जब नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में इन इलाकों में सड़कें, स्कूल और अस्पताल समेत शहर जैसी सुविधाएं मुहैया करायी जाएंगी तो सीमाएं सुरक्षित बन जाएंगी। नामग्याल ने कहा कि कांग्रेस ने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाकर गलती की थी। दूसरा जब भी कश्मीर में हालात बिगड़े तो कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति अपनायी। वह कभी सख्ती से समस्याओं से नहीं निपटी।
-राहुल जैसा व्यक्ति कुर्सी के लिए कुछ भी कर सकता है
लद्दाख के सांसद ने अनुच्छेद 370 के लगभग सभी प्रावधानों को हटाने के बाद कश्मीर में स्थिति पर केंद्र पर हमला करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके जैसा व्यक्ति अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ भी कह सकता है।
ये भी पढ़ेंः जम्मू-कश्मीरः फिर से बंद कर दी गई मोबाइल और इंटरनेट सेवा
-कश्मीर के साथ रहने से बहुत नुकसान हुआ
कश्मीर के साथ रहने से लद्दाख को हुए नुकसान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, हमारे पास यहां एक डिग्री कॉलेज है जो कश्मीर विश्वविद्यालय के तहत आता है। अगर किसी नाम में गलती भी होती है तो छात्र को इसे सही कराने के लिए श्रीनगर जाना पड़ता है। अगर कश्मीर में दिक्कत है तो लद्दाखी छात्र को तीन साल का पाठ्यक्रम पूरा करने में पांच साल लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर लद्दाख के किसी सरकारी अधिकारी का तबादला या पदोन्नति किसी कारण से अटकी होती है तो अपनी फाइल को आगे बढ़ाने का अनुरोध करने के लिए श्रीनगर या जम्मू जाना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि बौद्ध भाषा के लिए शिक्षकों के पदों को कश्मीरी भाषा के शिक्षकों के पदों में परिवर्तित कर दिया गया।
-एलएएचडीसी का अस्तित्व बना रहेगा
लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी)के भविष्य पर नामग्याल ने कहा, गृह मंत्री ने संसद में स्वयं आश्वासन दिया है कि एलएएचडीसी बकरार रहेगी। लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
-निवेश से पैदा होगा रोजगार
स्थानीय लोगों की इन आशंकाओं पर कि बाहरी लोग जमीन खरीदेंगे और लद्दाख के पयाज़्वरण को बर्बाद कर देंगे, सांसद ने लोगों को आश्वासन दिया कि ऐसी कोई चीज नहीं होगी। नामग्याल ने कहा कि लोगों को यह समझने की जरूरत है कि लद्दाख में कई सेक्टर ऐसे हैं जिनकी संभावनाओं को अभी तक तलाशा नहीं गया है और वहां निवेश से रोजगार पैदा होगा। उन्होंने केंद्र से लद्दाख की भूमि,संस्कृति और पहचान की रक्षा करने के लिए संविधान की छठी अनुसूची के तहत उसे एक आदिवासी क्षेत्र घोषित करने का अनुरोध किया।
-कश्मीर पर कांग्रेस ने कभी सख्ती नहीं अपनाई
उन्होंने कहा, जब नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में इन इलाकों में सड़कें, स्कूल और अस्पताल समेत शहर जैसी सुविधाएं मुहैया करायी जाएंगी तो सीमाएं सुरक्षित बन जाएंगी। नामग्याल ने कहा कि कांग्रेस ने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाकर गलती की थी। दूसरा जब भी कश्मीर में हालात बिगड़े तो कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति अपनायी। वह कभी सख्ती से समस्याओं से नहीं निपटी।
-राहुल जैसा व्यक्ति कुर्सी के लिए कुछ भी कर सकता है
लद्दाख के सांसद ने अनुच्छेद 370 के लगभग सभी प्रावधानों को हटाने के बाद कश्मीर में स्थिति पर केंद्र पर हमला करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके जैसा व्यक्ति अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ भी कह सकता है।
ये भी पढ़ेंः जम्मू-कश्मीरः फिर से बंद कर दी गई मोबाइल और इंटरनेट सेवा
-कश्मीर के साथ रहने से बहुत नुकसान हुआ
कश्मीर के साथ रहने से लद्दाख को हुए नुकसान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, हमारे पास यहां एक डिग्री कॉलेज है जो कश्मीर विश्वविद्यालय के तहत आता है। अगर किसी नाम में गलती भी होती है तो छात्र को इसे सही कराने के लिए श्रीनगर जाना पड़ता है। अगर कश्मीर में दिक्कत है तो लद्दाखी छात्र को तीन साल का पाठ्यक्रम पूरा करने में पांच साल लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर लद्दाख के किसी सरकारी अधिकारी का तबादला या पदोन्नति किसी कारण से अटकी होती है तो अपनी फाइल को आगे बढ़ाने का अनुरोध करने के लिए श्रीनगर या जम्मू जाना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि बौद्ध भाषा के लिए शिक्षकों के पदों को कश्मीरी भाषा के शिक्षकों के पदों में परिवर्तित कर दिया गया।
-एलएएचडीसी का अस्तित्व बना रहेगा
लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी)के भविष्य पर नामग्याल ने कहा, गृह मंत्री ने संसद में स्वयं आश्वासन दिया है कि एलएएचडीसी बकरार रहेगी। लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
-निवेश से पैदा होगा रोजगार
स्थानीय लोगों की इन आशंकाओं पर कि बाहरी लोग जमीन खरीदेंगे और लद्दाख के पयाज़्वरण को बर्बाद कर देंगे, सांसद ने लोगों को आश्वासन दिया कि ऐसी कोई चीज नहीं होगी। नामग्याल ने कहा कि लोगों को यह समझने की जरूरत है कि लद्दाख में कई सेक्टर ऐसे हैं जिनकी संभावनाओं को अभी तक तलाशा नहीं गया है और वहां निवेश से रोजगार पैदा होगा। उन्होंने केंद्र से लद्दाख की भूमि,संस्कृति और पहचान की रक्षा करने के लिए संविधान की छठी अनुसूची के तहत उसे एक आदिवासी क्षेत्र घोषित करने का अनुरोध किया।