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चिनाब रेल पुल : विकास पथ मिला तो उड़ान भरने लगा मन और माहौल, वंदे भारत गुजरी और चमकने लगीं आंखें
Sat, 07 Jun 2025 07:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा
रोली खन्ना, जम्मू
रोली खन्ना, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 07 Jun 2025 07:06 AM IST
सार
शुक्रवार को जब यहां से वंदे भारत ट्रेन गुजरी तो उनकी आंखों में अलग ही चमक थी।
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चिनाब रेल ब्रिज
- फोटो : PTI
विस्तार
रामबन से करीब 50 किमी दूर सुंबड़ को यहां के युवा पिछड़ा इलाका मानते हैं। मगर, शुक्रवार को जब यहां से वंदे भारत ट्रेन गुजरी तो उनकी आंखों में अलग ही चमक थी। सुरक्षा कर्मियों की चहलकदमी के बीच पहाड़ों पर बसे घरों से निकलकर स्टेशन पर पहुंचे बहादुर समेत कई युवाओं ने ट्रेन के आते ही उत्साह के साथ कहा, अब तो हम भी ट्रेन वाले हो गए।
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सुंबड़ तो बानगी भर है। संगलदान के प्रदीप, रामबन की आकृति, संदीप, तरुण जैसे युवाओं की खुशी और भावनाओं का इजहार करते शब्द बता रहे हैं कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर भी अब विकास के नक्शे पर जगह बना चुका है। वे इलाके जहां सिर्फ पहाड़ ही पहाड़ हैं, कल तक जो इलाके सड़क, बिजली और पानी के साथ ही अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे, आज वहां रेल नेटवर्क पहुंच चुका है।
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यह महज उद्घोषणा तक सीमित नहीं, इसे धरातल पर भी प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। कल तक जहां सिर्फ गोलियां और बमों के धमाके गूंजते थे, आज वहां ट्रेन के हॉर्न गूंज रहे हैं। विकास का रास्ता मिलते ही जम्मू-कश्मीर के लोगों का मन और माहौल उम्मीदों की उड़ान भरने लगा है।
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रंग लगाई दशकों की मेहनत... यह बदलाव दशकों के प्रयासों और मेहनत का नतीजा है। एक दौर यहां ऐसा भी था कि चंद पैसों का लालच देकर युवाओं के हाथों में पत्थर व बंदूकें थमा दी जाती थीं। स्थानीय संगठन ही विकास में बाधा बने थे। राजनीतिक दृढ़ इच्छा शक्ति की बदौलत बदलाव की लौ जली और गुमराह करने वालों पर शिकंजा कसना शुरु हुआ। आतंकवाद और अलगाववाद को आश्रय देने वालों के नेटवर्क को तोड़ने की शुरुआत हुई।
बुरहान के इलाके में लहरा रहा तिरंगा
2019 में अनुच्छेद 370 का हटना मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने बदलाव की रफ्तार को बढ़ाया। लाल चौक में नाइट लाइफ, जी-20 जैसे आयोजनों की मेजबानी से लेकर मुहर्रम का जुलूस निकलना...बदलाव अनवरत जारी है।
26 जनवरी को आतंकी बुरहान वानी के नाम से पहचान रखने वाले त्राल में युवाओं ने तिरंगा फहराकर जता दिया कि पत्थरबाजी और आतंकवाद को नकार कर वे विकास और रोजगार की राह चुन रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद लोगों में आतंक के खिलाफ पहली बार जिस तरह का आक्रोश दिखा, वह बदलाव का बड़ा संकेत है।