फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Chenab is becoming a death bearer, about 150 people died from 2018 to 2019 in road accident

''मौत की वादी'' चिनाब, 2018 से अबतक काल के गाल में समा गए करीब 150 लोग

Thu, 14 Nov 2019 03:53 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 14 Nov 2019 03:53 PM IST
विज्ञापन
Chenab is becoming a death bearer, about 150 people died from 2018 to 2019 in road accident
चिनाब वादी - फोटो : सोशल मीडिया

जर्जर सड़कें, ओवरलोडिंग और बदहाल पुराने यात्री वाहनों के कारण बढ़ रही वाहन दुर्घटनाओं से चिनाब की वादी को लोग मौत की वादी से जानने लगे हैं। आए दिन चिनाब वादी में दर्दनाक दुर्घटनाएं हो रही हैं और हर वर्ष कई लोग जान गवा रहे हैं। लोगों की जान जाने के बाद भी सरकार व प्रशासन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहा है।

विज्ञापन

 
2018 में डोडा व किश्तवाड़ में कुल 365 वाहन दुर्घटनाएं हुईं। औसतन हर रोज एक वाहन दुर्घटनाएं हुई। इन वाहन दुर्घटनाओं में कुल 76 लोगों ने अपनी जान गवाई, जबकि 472 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। 365 वाहन दुर्घटनाओं में 207 वाहन दुर्घटनाएं किश्तवाड़ में हुई। इनमें 52 लोगों ने जान गवाई और 185 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
विज्ञापन


डोडा जिले में कुल 158 वाहन दुर्घटनाएं हुई और इनमें 24 की मौत हुई व 287 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए। चिनाब की वादी में 2019 में हुई वाहन दुर्घटनाओं में अभी तक 75 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों की संख्या में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चिनाब की वादी में यातायात व्यवस्था कितनी बुरी तरह से खराब है और क्यों इसको मौत की वादी के नाम से जाना जाने लगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

बदहाल सड़कों पर छोटे वाहनों को नियंत्रित रखना हो जाता है मुश्किल

इन वाहन दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बदहाल सड़कें, ओवरलोडिंग और बदहाल पुराने वाहन हैं। चिनाब वादी में ज्यादातर सड़कों की हालत बुरी तरह से खराब है। इन सड़कों पर वाहनों को चलाना किसी खतरे से खाली नहीं है। बदहाल मार्ग पर मेटाडोर व बस चालक चलने से इंकार कर देते हैं। मजबूरन एआरटीओ को छोटे वाहनों को परमिट देना पड़ता है। सड़कें इतनी ज्यादा खराब होती है कि कई बार छोटे वाहनों को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है और वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।  

करीब 30 वर्षों से सड़कों की नहीं सुधारी गई है हालत
चिनाब की वादी में कई सड़कें ऐसी मौजूद हैं, जिन पर करीब 30 वर्ष से तारकोल नहीं डाला गया। किसी ने भी इनके रख रखाव की तरफ ध्यान नहीं दिया। रख रखाव के अभाव में सड़कें बदहाल होती चली गईं। आए दिन इन पर वाहन दुर्घटना का शिकार होते हैं।

 

यात्री वाहनों की कमी से दिन प्रतिदिन बढ़ रही ओवरलोडिंग

दूर दराज ग्रामीण इलाकों के रूट पर आज भी यात्री वाहनों की कमी को दूर नहीं किया जा सका है। यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन यात्री वाहन आज भी कम ही हैं। इसी का नतीजा है कि वाहन ओवरलोड होकर चलते है। समय पर अपनी मंजिल पर पहुंचने की जल्दवादी में यात्री भी परवाह किए बिना ओवरलोड वाहनों पर बैठने को मजबूर होते हैं। कई बार ओवरलोड होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और बड़ी दुर्घटना हो जाती है।

फिटनेस प्रमाण पत्र लेकर चल रहे जर्जर वाहन
दूर दराज ग्रामीण इलाकों में चलने वाले यात्री वाहन पुराने माडल के भी हैं। इनकी हालत बहुत ज्यादा खराब है। इनको मरम्मत कर चलवाया जाता है। जांच के बाद एआरटीओ से फिटनेस प्रमाण पत्र भी मिलता है। फिटनेस प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही इनको यात्रियों का आवाजाही करने की अनुमति मिलती है। किश्तवाड़, डोडा, भद्रवाह में काफी संख्या में पुराने यात्री वाहन चलते हैं, लेकिन कई बार यह वाहन इतने दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed