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हुर्रियत से वार्ता की पहल कर सकता है केंद्र

Thu, 26 Feb 2015 12:22 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/अमर उजाला, जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र/अमर उजाला, जम्मू Updated Thu, 26 Feb 2015 12:22 PM IST
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center may start talks with hurriyat

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद की मुलाकात के बाद जम्मू-कश्मीर में अमन के स्थायी एजेंडे का ऐलान संभव है। मुलाकात 27 फरवरी को दिल्ली में पीएम आवास पर सुबह 9 बजे प्रस्तावित है। इस मुलाकात में सरकार गठन के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) पर भी मुहर लगाई जाएगी। सीएमपी तैयार हो चुका है और अब शीर्ष नेताओं द्वारा इस पर मुहर लगाने की औपचारिकता भर बाकी है।

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दरअसल मुफ्ती मोदी से अपनी पहली मुलाकात में पाकिस्तान और हुर्रियत से बातचीत की पहल का भरोसा चाहते हैं। पीएम मोदी ने इस मुलाकात से पहले ही इस दिशा में होमवर्क कर लिया है। विदेश सचिव एस जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा मार्च में तय हो चुकी है। अब हुर्रियत को वार्ता के टेबल पर लाने की कोशिश को अंजाम दिया जाना है। मुफ्ती से मुलाकात के बाद मोदी इसके लिए पहल कर सकते हैं।
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इस बाबत मुफ्ती की हुर्रियत के नेताओं से बातचीत हो चुकी है। अनुच्छेद 370 और अफस्पा जैसे विवादास्पद मुद्दों को सीएमपी की भाषाई बनावट से ढंक दिया गया है। देश की एकता और अखंडता को कायम रखते हुए देश और जम्मू कश्मीर के संविधान के दायरे में हुर्रियत से बातचीत की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है। अगर यह कोशिश सफल होती है तो हुर्रियत लगभग ग्यारह साल बाद केंद्र से बातचीत में शिरकत कर सकती है।
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जनवरी 2004 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी की हुर्रियत नेताओं से बातचीत हुई थी, जिसमें हुर्रियत ने बंदूक की भाषा वापस लेकर बातचीत जारी रखने की मांग की थी। तब हुर्रियत के अब्दुल गनी भट वार्ता में थे। दरअसल चुनाव नतीजे के बाद ही पीडीपी ने तय कर लिया था कि वह भाजपा के साथ ही सरकार बनाने का प्रयास करेगी। यही वजह है कि मुफ्ती ने कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के समर्थन के प्रस्ताव को कभी गंभीरता से नहीं लिया।

विचारधारा में एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे दो दलों का यह मेल आसान भी नहीं था। दोनों दलों को अपने वोट बैंक को भी संतुष्ट करना था। नतीजतन अनौपचारिक वार्ता का दौर दो महीने तक चला। पीडीपी की कोशिश है कि सीएमपी के बूते वह कश्मीरी वोट बैंक को यह समझाने का प्रयास करेगी कि नई गठबंधन सरकार कश्मीर के हित में जरूरी थी। इधर भाजपा जम्मू में अपने वोट बैंक को अब तक की क्षेत्रीय उपेक्षा से निजात दिलाने के नाम पर समझाने की कोशिश करेगी।


भाजपा महासचिव राम माधव और पीडीपी के डा. हसीब द्राबू ने सीएमपी को बड़ी कुशलता से बुना है जिसमें दोनों पक्ष अपनी जीत का दर्शन कर सकते हैं। लिहाजा एक मार्च को गठबंधन सरकार का शपथ ग्रहण तय हो गया है। इस बार हुर्रियत के उदारवादी गुट के नेता मीरवाइज फारूक वार्ता में शामिल हो सकते हैं। हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने भाजपा और पीडीपी के मेल को खारिज कर दिया है। गिलानी वार्ता में शामिल होने के प्रस्ताव को खारिज करते रहे हैं।

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