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CDS Bipin Rawat: सीडीएस रावत ने इस मुहिम से घाटी के पत्थरबाजों को बना दिया सेना का भक्त

Fri, 10 Dec 2021 01:58 AM IST
विमल शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 10 Dec 2021 01:58 AM IST
सार


सीडीएस जनरल बिपिन रावत के कश्मीर में दिए गए सेवाओं को आज भी स्थानीय लोग याद करते हैं। रावत ने बारामुला में कट्टरपंथी बन रहे युवाओं को एक अभियान मुख्य धारा से जोड़ दिया। जनरल रावत की सीख से कभी मुख्यधारा से कट गए थे आबिद आज बारामुला के सबसे युवा पार्षद हैं। वह रावत को आज भी याद करते हैं।  

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CDS Bipin Rawat made the stone pelters of Kashmir a devotee of the army, jawan and people-peace was campaigned
सीडीएस जनरल बिपिन रावत (1958 - 2021) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कश्मीर घाटी में वर्ष 2010 के दौरान हिंसा से हालात बिगड़े तो पत्थरबाजी की घटनाओं ने जोर पकड़ा। मुख्यधारा से कटकर युवा पत्थरबाज बनने लगे। कट्टरपंथ की इसी हवा के बीच जनरल रावत ने बारामुला में ‘जवान और अवाम, अमन है मुकाम’ का नारा देकर युवाओं के लिए खास पहल की। इसी से मुतासिर होकर मुख्यधारा में लौटने वालों में शामिल आबिद सलाम आज बारामुला नगर परिषद के सबसे युवा पार्षद और उपाध्यक्ष हैं।

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आबिद को जनरल रावत ने नई जिंदगी
आबिद कहते हैं कि उन्हें इस माहौल में न सिर्फ खुद में सुधार करने का मौका मिला, बल्कि फौज को करीब से जानने और समझने का भी अवसर मिला। पत्थरबाजी के गढ़ रहे ओल्ड टाउन बारामुला के शाह हमदान कॉलोनी के रहने वाले आबिद कहते हैं कि उन्हें जनरल रावत ने नई जिंदगी दी। आज वह प्रतिनिधि हैं तो उन्हीं की बदौलत। जम्हूरियत कैसे काम करती है। कैसे लोग इस खूबसूरत व्यवस्था में वोट देकर अपना मुस्तकबिल तय करते हैं, इसका हिस्सा बनकर जन प्रतिनिधि के ओहदे तक पहुंचना सुकून देने वाला एहसास है। 
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जवान और अवाम, अमन है मुकाम चलाया था अभियान 

आबिद ने कहा कि जब जनरल रावत बारामुला में बतौर जीओसी थे, तब वह दसवीं कक्षा में पढ़ते थे। उन्होंने ‘जवान और अवाम, अमन है मुकाम’ का नारा देकर वर्ष 2010 में तेजी से बिगड़ रहे माहौल को ठीक कर दिखाया। युवाओं को सही राह पर लाने के लिए सर्दियों में एक कोचिंग सेंटर स्थापित किया, जहां 9वीं से 12वीं तक के बच्चों को उनके सर्दियों के होम वर्क के साथ अन्य कोर्स भी कराए जाते थे। युवाओं का मार्गदर्शन भी किया जाता। कोचिंग सेंटर के साथ एक पुनर्वास केंद्र भी था।

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फौज क्या है और कैसे काम करती है रावत ने बताया 

आबिद ने कहा कि एक वक्त था हम फौज से नफरत करते थे। जनरल रावत के प्रयासों से हम अच्छे से जान पाए कि आखिर फौज क्या है और कैसे काम करती है। आज मैं जनप्रतिनिधि हूं। इसका सारा श्रेय रावत साहब को ही है। आबिद ने कहा कि जब घाटी में 2008 में अमरनाथ जमीन विवाद और 2010 में कुछ ऐसे हालात बने कि अलगाववादियों द्वारा मुजफ्फराबाद चलो की कॉल दी थी।

 

उस समय युवाओं को प्रदर्शनों का हिस्सा बनाकर कट्टरपंथी विचारधारा से रूबरू कराया जाता था। हमें लगता था कि हम पाकिस्तान पहुंच जाएंगे। आबिद ने कहा कि युवा होने के नाते हमारे दिल में मुजफ्फराबाद देखने की चाह थी। बाद में जब जनरल रावत से हमने यह बात कही तो उन्होंने कोचिंग सेंटर के बच्चों को कमान पोस्ट पर स्थित अमन सेतु का टूर कराया।  
 
उमर काकरू भी हैं रावत के मुरीद
बारामुला के युवक उमर काकरू ने बताया कि जनरल रावत का बारामुला के लोगों के साथ अच्छा संबंध रहा है, खासकर यहां के युवाओं के साथ उनका काफी उठना बैठना था। उन्होंने बताया कि वह हमेशा से युवाओं से चर्चा करते रहते थे और उनकी आकांक्षाओं के बारे में जानने की कोशिश करते थे कि आखिर युवा क्या चाहता है और उसमें फौज कैसे अपना योगदान दे सकती है।
 

उमर ने बताया कि कभी ऐसा लगता नहीं था कि हम एक फौजी से बात कर रहे हैं, कोई वर्दीधारी हमसे बात कर रहा होता था। उमर ने कहा कि 2011 में केपीएल के नाम से एक क्रिकेट प्रतियोगिता होती थी। हमने उनसे कहा कि हम भी जाना चाहते हैं तो उन्होंने जवाब दिया, कौन सी बात कर दी, खेलना ही तो है सिर्फ, जाओ भेजो अपनी टीम भी।


 

उन्होंने बताया कि उनका युवाओं के प्रति काफी अच्छा व्यवहार रहा है। केवल युवा ही नहीं कश्मीर का कोई भी बाशिंदा अगर उन्हें आज भी किसी काम के लिए फोन करता था तो उसके मसले का समाधान निकालने के लिए वह किसी भी हद तक चले जाते थे और यही कारण है कि आज भी कश्मीर की जनता का प्यार उनके प्रति श्रद्धांजलि के रूप में छलक कर सामने आ रहा है। 

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