जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारतीय दंड संहिता के तहत केस दर्ज, कई थानेदारों को असमंजस
- बिश्नाह और झज्जर कोटली में सड़क दुर्घटना के मामले आईपीसी के तहत केस दर्ज
- पहले दिन कुछ थानों में केस दर्ज करने को लेकर रही दुविधा
- कानून व्यवस्था में भी बदलाव, 25 सहायक कौंसल नियुक्त
विस्तार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पुलिस ने रणबीर संहिता की जगह भारतीय दंड संहिता के तहत संज्ञान लेना शुरू कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में हालांकि कुछ थानों में इसे लेकर दुविधा जरूर रही। जिसकी वजह से या तो केस होल्ड कर लिए गए या फिर आरपीसी में ही कार्रवाई की गई।
लेकिन बहुत से थानों ने आईपीसी के तहत केस दर्ज करना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार वीरवार को बिश्नाह थाने में आईपीसी की धारा 279 के तहत एक्सीडेंट का केस दर्ज हुआ। इसके अलावा झज्जर कोटली में भी एक्सीडेंट का केस दर्ज हुआ। कई अन्य थानों में भी इसके तहत कार्रवाई हुई है।
कई थानेदारों ने बताया कि अभी विभाग की ओर से अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इस वजह से आईपीसी के तहत केस दर्ज नहीं किए गए। कई थानेदारों ने कहा कि आईपीसी के तहत केस दर्ज करने लगे हैं। कई थानों में इसके तहत कार्रवाई हुई भी है। दोनों प्रदेशों की कानून व्यवस्था कानूनी तौर पर अब लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास है। ऐसे में पुलिस की व्यवस्था सीधे तौर पर लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास है। इस तरह से अब जो कोई भी केस दर्ज होना है, वो आईपीसी के तहत ही होना है।
कानून व्यवस्था में भी बदलाव, 25 सहायक कौंसल नियुक्त
वीरवार से हाईकोर्ट की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। इसके लिए सरकार ने 20 सहायक कौंसल नियुक्त किए हैं, जो हर रोज होने वाली कोर्ट की कार्रवाई में सरकारी पक्ष की मदद करेंगे। इससे पहले पब्लिक प्रासिक्यूटर के 40 पद थे, जो केंद्र शासित प्रदेश बनने से खत्म हो चुके हैं।
यह सहायक कौंसल लॉ अफसरों (सीनियर एडिशन एडवोकेट जनरल) डिप्टी एडवोकेट जनरल और जनरल एडवोकेट की सरकार की तरफ से हर रोज होने वाली कार्यवाही में मदद करेंगे। वीरवार को नौ वकीलों को एडवोकेट जनरल डी सी रैना ने श्रीनगर में आर्डर दिए।