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12 साल तक की नाबालिग से रेप किया तो होगी सजा-ए-मौत, अध्यादेश को मिली मंजूरी

Wed, 25 Apr 2018 11:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Wed, 25 Apr 2018 11:01 AM IST
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case in rape with 12 year old girl accused will be Death imPrisonment, government pass ordinance
फाइल फोटो
कठुआ काण्ड से हिली राज्य सरकार ने बलात्कार पर अंकुश लगाने के लिए सूबे में सख्त कानून बनाया है। अब 12 साल तक के नाबालिग से रेप की सजा मौत होगी। ऐसे मामलो में पुलिस को हर हाल में दो महीने में जांच पूरी करनी होगी। इसके बाद छह महीने में ही ऐसे मामलों में ट्रायल पूरा करना होगा। छह महीने में ही सजा के खिलाफ अपील के निस्तारण का प्रावधान रखा गया है। 
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 मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अध्यक्षता में मंगलवार को राज्य कैबिनेट की हुई बैठक में इसके लिए जम्मू कश्मीर बाल यौन हिंसा संरक्षण अध्यादेश-2018 और जम्मू-कश्मीर आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश-2018 को मंजूरी दी गई। अध्यादेश के अनुसार 13 से 16 तक की किशोरियों से रेप पर 20 साल की कड़ी सजा या आजीवन कारावास होगा। आजीवन कारावास से आशय पूरा जीवन जेल में बिताना होगा। 
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12 साल तक के नाबालिग के साथ गैंग रेप की सूरत में मौत की सजा होगी और 16 साल तक की किशोरियों से गैंग रेप पर आजीवन कारावास होगा। ऐसे मामलों में जांच दो महीने में पूरी करने का प्रावधान रखा गया है। जांच महिला पुलिस अधिकारी करेंगी। इन मामलों में ट्रायल छह महीने में पूरा करना होगा। इसमें किसी प्रकार का विलंब होने पर हाईकोर्ट को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी। 
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अध्यादेश में जमानत का प्रावधान भी सख्त किया गया है। इसके अनुसार बिना लोक अभियोजक (पब्लिक प्रासीक्यूटर) को सुने किसी भी सूरत में जमानत नहीं दी जा सकेगी। अध्यादेश में कहा गया है कि सजा के खिलाफ अपील की सुनवाई भी छह महीने में ही पूरी करनी होगी। अध्यादेश के  अनुसार ऐसे मामलों में ट्रायल बंद कमरे में ही होगा। जो भी जुर्माना लगेगा उसकी राशि पीड़िता के पुनर्वास के लिए दी जाएगी। अब तक यह राशि सरकारी खजाने में जाती रही है। 

राज्यपाल ने अध्यादेश को दी मंजूरी

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स्पेशल कोर्ट का प्रावधान 
मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए कानून मंत्री अब्दुल हक खान ने बताया कि अध्यादेश में त्वरित ट्रायल के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने का प्रावधान किया गया है। सभी शिक्षण संस्थानों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह बच्चों की सुरक्षा तथा बचाव के हर संभव उपाय करें और यौन शोषण के किसी भी मामले में उन्हें सार्वजनिक न करें। उन्होंने कहा कि दोनों अध्यादेश उपयोगी साबित होंगे। यह महिलाओं के खिलाफ  हिंसा और खासकर राज्य में यौन हिंसा को रोकने में कारगर होगा। 

प्रीवेंटिव डिटेंशन कानून अध्यादेश को मंजूरी
जम्मू। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में जम्मू-कश्मीर प्रीवेंटिव डिटेंशन कानून अध्यादेश-2018 को मंजूरी दी गई। अध्यादेश सरकार को सेवानिवृत्त योग्य व्यक्तियों को कानून के तहत सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्य के रूप में चयनित करने का अधिकार देता है। 

वीडियो कांफ्रेंसिंग को साक्ष्य के लिए वैध बनाया
राज्यपाल एनएन वोहरा ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2018 को मंजूरी दी है। आपराधिक प्रक्रिया के मौजूदा प्रावधान के अनुसार आपराधिक मुकदमे में सभी कार्यवाही आरोपी की उपस्थिति में की जानी चाहिए, के कारण आरोपी की किसी कारण से उपस्थिति न हो पाने के चलते मुकदमा लंबे समय तक चलता रहता है।

आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 (केंद्रीय अधिनियम), जो जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू है, को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2008 (केंद्रीय अधिनियम संख्या 5) के जरिये संशोधित किया गया है। इसमें वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से साक्ष्य रिकॉर्डिंग प्रदान करने के लिए धारा 161, 164, 163 और 275 संशोधित किए गए हैं।
 

case in rape with 12 year old girl accused will be Death imPrisonment, government pass ordinance
राज्य में वीडियो क्रांफेंसिंग को लागू करने के लिए आपराधिक परीक्षणों में आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता के विभिन्न प्रावधान धारा 167 (2), 342, 353, 360, 364, 540-ए में संशोधन की आवश्यकता है। जेल से विकल्प के रूप में वीडियो कांफ्रेंसिंग शुरू करने का उद्देश्य यह है कि ट्रायल त्वरित गति से हो। 

साथ ही खर्च कम आए और कानून-व्यवस्था की स्थिति न उत्पन्न होने पाए। केंद्रीय अधिनियम में संशोधन ने कानूनी रूप से इलेक्ट्रॉनिक वीडियो लिंकेज के माध्यम से साक्ष्य की रिकॉर्डिंग को मान्यता प्रदान की है। यह देश के अन्य राज्यों में भी एक वैध अभ्यास माना जाता है।

राज्य में जेलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधाओं का संचालन चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। ई-न्यायालय मिशन मोड प्रोजेक्ट के तहत राज्य में सभी 12 जेलों और 12 जिला न्यायालय परिसरों में वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधा प्रदान की गई है। यह सुविधा राज्य में सभी न्यायालय परिसरों तक बढ़ाई जाएगी।
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