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Jammu News: प्रदेश में तीन साल में 37,000 से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां स्थापित

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- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मिली 760 करोड़ रुपये की सहायता
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अमर उजाला ब्यूरो

जम्मू। जम्मू-कश्मीर में छोटे और कुटीर उद्योगों का विकास तेजी से हो रहा है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना ने यहां उद्योग और स्वरोजगार के नए अवसर खोले हैं। पिछले तीन वर्षों में इस योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में 37,000 से अधिक सूक्ष्म उद्योग स्थापित किए गए हैं। इन इकाइयों को खड़ा करने के लिए केंद्र सरकार ने 760 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की है।





केंद्र सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 में जम्मू-कश्मीर में 12,023 नई इकाइयां स्थापित हुईं जिन्हें लगभग 240 करोड़ रुपये की सहायता मिली। अगले वर्ष 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 15,065 हो गई और इन पर लगभग 283 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की गई। 2024-25 में इकाइयों की संख्या घटकर 9,863 रह गई, फिर भी केंद्र ने इनके लिए लगभग 239 करोड़ रुपये जारी किए। सरकार ने बताया है कि छोटे उद्योग शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक के ऋण पर किसी भी प्रकार की जमानत की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय के उद्यमियों को सामान्य वर्ग की तुलना में अधिक सहायता दी जाती है।
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पंजाब और हिमाचल की तुलना में आगे निकला जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर का प्रदर्शन उसके पड़ोसी राज्यों पंजाब और हिमाचल प्रदेश से कहीं बेहतर है। वर्ष 2022-23 में पंजाब में 1,564 इकाइयां शुरू हुईं और इन्हें लगभग 72 करोड़ रुपये की सहायता मिली। अगले वर्ष 2023-24 में यहां 1,469 इकाइयां स्थापित हुईं, जिन्हें लगभग 91 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वर्ष 2024-25 में पंजाब में केवल 970 इकाइयां दर्ज हुईं और इन्हें लगभग 67 करोड़ रुपये का सहारा मिला। हिमाचल प्रदेश में भी स्थिति लगभग ऐसी ही रही। वर्ष 2022-23 में वहां 930 इकाइयां बनीं और 32 करोड़ रुपये की सहायता मिली। 2023-24 में हिमाचल में 974 इकाइयां दर्ज हुईं और लगभग 36 करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी हुई। 2024-25 में संख्या घटकर 796 रह गई और 29 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। यानी तीन सालों में जहां पंजाब में लगभग 4,000 और हिमाचल प्रदेश में लगभग 2,700 इकाइयां ही स्थापित हो सकीं, वहीं जम्मू-कश्मीर में इनकी संख्या 37,000 से अधिक हो गई।
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जानिए क्या है प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है। इसके तहत नए उद्यम शुरू करने के लिए बैंकों से ऋण दिलाया जाता है और उस पर सरकार की ओर से मार्जिन मनी सब्सिडी (एमएमएस) दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य वर्ग के उद्यमियों को 25 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 15 प्रतिशत तक की सहायता दी जाती है। विशेष वर्गों जैसे महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक, दिव्यांग और पूर्व सैनिकों को ग्रामीण क्षेत्रों में 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। दस लाख रुपये तक के ऋण पर किसी तरह की जमानत की आवश्यकता नहीं होती। इस योजना के जरिए देश भर में लाखों लोगों ने छोटे उद्योग स्थापित किए हैं।


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व्यापारियों ने बताया योजना से मिला लाभ

सतवारी के व्यापारी राकेश गुप्ता ने बताया कि पीएमईजीपी योजना के तहत मिली सहायता से मैंने रेडीमेड गारमेंट्स की इकाई शुरू की। बैंक से कर्ज मिला और सरकार की ओर से सब्सिडी भी। अब मेरे साथ कई स्थानीय युवक भी काम कर रहे हैं। पहले सोचता था कारोबार शुरू करना मुश्किल होगा, लेकिन इस योजना ने रास्ता आसान कर दिया। आरएस पुरा के रहते सुनील शर्मा ने बताया कि मैंने डेयरी यूनिट खड़ी की है। सबसे बड़ी राहत यह रही कि दस लाख रुपये तक के ऋण पर किसी तरह की जमानत नहीं देनी पड़ी। सब्सिडी का फायदा भी मिला, जिससे लागत काफी कम हो गई। अब गांव-गांव में दूध पहुंचा पा रहा हूं और अच्छा मुनाफा भी हो रहा है।
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