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Jammu News: बंद होने से पहले उद्योगों को चेताएगा एआई, समय रहते मिलेगा सहारा
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- एमएसएमई हेल्थ क्लिनिक डेटा से करेगा उद्योगों की आर्थिक सेहत की जांच
- अब 73 हजार इकाइयों की जांच पूरी, इनमें से 5,600 से अधिक जोखिम में
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अब उद्योग तब नहीं संभाले जाएंगे जब वे बंद होने की कगार पर पहुंच जाएं, बल्कि उससे पहले ही उन्हें चेतावनी मिल जाएगी। एमएसएमई हेल्थ क्लिनिक के जरिए ऐसा सिस्टम बनाया गया है, जो कारोबार के आंकड़ों को देखकर कमजोर पड़ रहे उद्योगों की पहचान कर रहा है।
इस व्यवस्था में उद्योगों से जुड़े अलग-अलग आंकड़े जैसे कारोबार, लेन-देन और कामकाज का स्तर अदि इकट्ठा किए जाते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर यह समझा जाता है कि कौन सा उद्योग ठीक चल रहा है और कहां गिरावट के संकेत हैं। जिन इकाइयों में कमजोरी दिखती है, उन्हें पहले ही चिन्हित कर लिया जाता है ताकि समय रहते मदद दी जा सके।
अब तक 73 हजार से अधिक उद्योगों की जांच हो चुकी है। इनमें से करीब 68 हजार इकाइयां सामान्य स्थिति में पाई गई हैं, जबकि 5,600 से ज्यादा उद्योग ऐसे हैं जो जोखिम में हैं या धीरे-धीरे कमजोर हो रहे हैं। ऐसे उद्योगों के लिए पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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अब 2.97 लाख और इकाइयोंं की होगी जांच
इस पहल को अब और बड़े स्तर पर ले जाया जा रहा है। जेएंडके बैंक के पास मौजूद करीब 2.97 लाख उद्योगों के आंकड़ों की भी जांच की जाएगी। इससे बड़ी संख्या में इकाइयों की स्थिति सामने आएगी और जिन पर संकट के संकेत होंगे, उनके लिए तुरंत कदम उठाए जा सकेंगे। अब तक करीब 15 हजार उद्योगों को स्थिरता प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा कई इकाइयों के लिए पुनर्वास रिपोर्ट भी तैयार की गई हैं, जिन पर अमल शुरू किया जा रहा है।
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पहले अक्सर उद्योग तब सामने आते थे जब उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता था, लेकिन अब शुरुआत में ही खतरे के संकेत मिल जाएंगे। इससे न सिर्फ उद्योगों को समय रहते संभाला जा सकेगा, बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ने वाले असर को भी कम किया जा सकता है।
- विक्रमजीत सिंह, आयुक्त सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग
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- अब 73 हजार इकाइयों की जांच पूरी, इनमें से 5,600 से अधिक जोखिम में
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अब उद्योग तब नहीं संभाले जाएंगे जब वे बंद होने की कगार पर पहुंच जाएं, बल्कि उससे पहले ही उन्हें चेतावनी मिल जाएगी। एमएसएमई हेल्थ क्लिनिक के जरिए ऐसा सिस्टम बनाया गया है, जो कारोबार के आंकड़ों को देखकर कमजोर पड़ रहे उद्योगों की पहचान कर रहा है।
इस व्यवस्था में उद्योगों से जुड़े अलग-अलग आंकड़े जैसे कारोबार, लेन-देन और कामकाज का स्तर अदि इकट्ठा किए जाते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर यह समझा जाता है कि कौन सा उद्योग ठीक चल रहा है और कहां गिरावट के संकेत हैं। जिन इकाइयों में कमजोरी दिखती है, उन्हें पहले ही चिन्हित कर लिया जाता है ताकि समय रहते मदद दी जा सके।
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अब तक 73 हजार से अधिक उद्योगों की जांच हो चुकी है। इनमें से करीब 68 हजार इकाइयां सामान्य स्थिति में पाई गई हैं, जबकि 5,600 से ज्यादा उद्योग ऐसे हैं जो जोखिम में हैं या धीरे-धीरे कमजोर हो रहे हैं। ऐसे उद्योगों के लिए पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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अब 2.97 लाख और इकाइयोंं की होगी जांच
इस पहल को अब और बड़े स्तर पर ले जाया जा रहा है। जेएंडके बैंक के पास मौजूद करीब 2.97 लाख उद्योगों के आंकड़ों की भी जांच की जाएगी। इससे बड़ी संख्या में इकाइयों की स्थिति सामने आएगी और जिन पर संकट के संकेत होंगे, उनके लिए तुरंत कदम उठाए जा सकेंगे। अब तक करीब 15 हजार उद्योगों को स्थिरता प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा कई इकाइयों के लिए पुनर्वास रिपोर्ट भी तैयार की गई हैं, जिन पर अमल शुरू किया जा रहा है।
पहले अक्सर उद्योग तब सामने आते थे जब उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता था, लेकिन अब शुरुआत में ही खतरे के संकेत मिल जाएंगे। इससे न सिर्फ उद्योगों को समय रहते संभाला जा सकेगा, बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ने वाले असर को भी कम किया जा सकता है।
- विक्रमजीत सिंह, आयुक्त सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग