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Jammu News: 15% एनपीए वाले सहकारी बैंकों को भी कृषि लोन के लिए नाबार्ड से मिलेगी मदद
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- जम्मू-कश्मीर के पात्र राज्य सहकारी बैंकों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के नियम तय, वास्तविक आवंटन अभी नहीं हुआ
- बीते वित्त वर्ष में प्रदेश में जारी हुए थे 34,543 नए किसान क्रेडिट कार्ड
गौरव रावत
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में 15 प्रतिशत तक शुद्ध एनपीए वाले पात्र राज्य सहकारी बैंक भी किसानों को कृषि लोन देने के लिए नाबार्ड से वित्तीय मदद ले सकेंगे। सामान्य क्षेत्रों में ऐसे बैंकों के लिए शुद्ध एनपीए की सीमा 12 प्रतिशत है, जबकि जम्मू-कश्मीर जैसे विशेष क्षेत्रों में यह सीमा 15 प्रतिशत तक है। नाबार्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कृषि लोन के वास्ते पुनर्वित्त के नियम तय किए हैं। हालांकि, प्रदेश में किस बैंक को कितनी राशि मिलेगी, यह अभी तय नहीं हुआ है। वास्तविक आवंटन अलग से किया जाएगा।
नई व्यवस्था में प्रदेश के जिन पात्र राज्य सहकारी बैंकों का शुद्ध एनपीए 10 प्रतिशत तक है, उन्हें कृषि लोन देने के लिए निर्धारित सीमा का अधिकतम 60 प्रतिशत तक पैसा मिल सकता है। अतिरिक्त कृषि लोन के लिए यह सीमा 80 प्रतिशत तक है। जिन बैंकों का शुद्ध एनपीए 10 प्रतिशत से अधिक, लेकिन 15 प्रतिशत तक है, उन्हें कृषि लोन के लिए निर्धारित सीमा का अधिकतम 55 प्रतिशत और अतिरिक्त कृषि लोन के लिए 75 प्रतिशत तक राशि मिल सकती है। ये अधिकतम सीमाएं हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर पात्र बैंक को पूरी राशि मिलेगी। वास्तविक मदद बैंक की पात्रता, निर्धारित नियमों और नाबार्ड की ओर से किए जाने वाले आवंटन पर निर्भर करेगी।
नाबार्ड यह पैसा सीधे किसानों को नहीं देता, बल्कि पात्र बैंकों को उपलब्ध कराता है। बैंक इस रकम की मदद से किसानों को कृषि लोन दे सकते हैं। यानी पुनर्वित्त का मतलब है कि नाबार्ड किसानों को सीधे कर्ज देने के बजाय बैंकों को वित्तीय मदद देता है, ताकि वे किसानों को कृषि लोन उपलब्ध करा सकें। हालांकि, इससे हर किसान को लोन मिलना तय नहीं है। किसान को अपने बैंक में आवेदन करना होगा और लोन देने का फैसला बैंक के नियमों तथा किसान की पात्रता के आधार पर होगा।
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पिछले साल कृषि लोन के लिए जारी हुए 34,543 नए कार्ड
प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समिति के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में जम्मू-कश्मीर में कृषि लोन के लिए 34,543 नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। इन पर कुल 442.77 करोड़ रुपये की कर्ज सीमा मंजूर की गई।
31 मार्च 2026 तक प्रदेश में कृषि लोन के 8.64 लाख किसान क्रेडिट कार्ड खाते सक्रिय थे। इन खातों पर कुल 8,172.87 करोड़ रुपये की कर्ज सीमा मंजूर थी। वहीं, जम्मू-कश्मीर ग्रामीण बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि लोन के लिए 7,824 नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए। इन पर 61.50 करोड़ रुपये की कर्ज सीमा मंजूर की गई।
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ग्रामीण बैंकों के लिए अलग नियम
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. के. एस. महेश की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए भी कृषि लोन के वास्ते पुनर्वित्त के नियम तय किए गए हैं। हालांकि, इन बैंकों की पात्रता की शर्तें राज्य सहकारी बैंकों से अलग हैं। राज्य सहकारी बैंकों के लिए लागू 15 प्रतिशत शुद्ध एनपीए की सीमा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर लागू नहीं होती। ग्रामीण बैंकों को कितनी राशि मिलेगी, यह भी अलग से तय किया जाएगा।
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- बीते वित्त वर्ष में प्रदेश में जारी हुए थे 34,543 नए किसान क्रेडिट कार्ड
गौरव रावत
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में 15 प्रतिशत तक शुद्ध एनपीए वाले पात्र राज्य सहकारी बैंक भी किसानों को कृषि लोन देने के लिए नाबार्ड से वित्तीय मदद ले सकेंगे। सामान्य क्षेत्रों में ऐसे बैंकों के लिए शुद्ध एनपीए की सीमा 12 प्रतिशत है, जबकि जम्मू-कश्मीर जैसे विशेष क्षेत्रों में यह सीमा 15 प्रतिशत तक है। नाबार्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कृषि लोन के वास्ते पुनर्वित्त के नियम तय किए हैं। हालांकि, प्रदेश में किस बैंक को कितनी राशि मिलेगी, यह अभी तय नहीं हुआ है। वास्तविक आवंटन अलग से किया जाएगा।
नई व्यवस्था में प्रदेश के जिन पात्र राज्य सहकारी बैंकों का शुद्ध एनपीए 10 प्रतिशत तक है, उन्हें कृषि लोन देने के लिए निर्धारित सीमा का अधिकतम 60 प्रतिशत तक पैसा मिल सकता है। अतिरिक्त कृषि लोन के लिए यह सीमा 80 प्रतिशत तक है। जिन बैंकों का शुद्ध एनपीए 10 प्रतिशत से अधिक, लेकिन 15 प्रतिशत तक है, उन्हें कृषि लोन के लिए निर्धारित सीमा का अधिकतम 55 प्रतिशत और अतिरिक्त कृषि लोन के लिए 75 प्रतिशत तक राशि मिल सकती है। ये अधिकतम सीमाएं हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर पात्र बैंक को पूरी राशि मिलेगी। वास्तविक मदद बैंक की पात्रता, निर्धारित नियमों और नाबार्ड की ओर से किए जाने वाले आवंटन पर निर्भर करेगी।
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नाबार्ड यह पैसा सीधे किसानों को नहीं देता, बल्कि पात्र बैंकों को उपलब्ध कराता है। बैंक इस रकम की मदद से किसानों को कृषि लोन दे सकते हैं। यानी पुनर्वित्त का मतलब है कि नाबार्ड किसानों को सीधे कर्ज देने के बजाय बैंकों को वित्तीय मदद देता है, ताकि वे किसानों को कृषि लोन उपलब्ध करा सकें। हालांकि, इससे हर किसान को लोन मिलना तय नहीं है। किसान को अपने बैंक में आवेदन करना होगा और लोन देने का फैसला बैंक के नियमों तथा किसान की पात्रता के आधार पर होगा।
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पिछले साल कृषि लोन के लिए जारी हुए 34,543 नए कार्ड
प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समिति के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में जम्मू-कश्मीर में कृषि लोन के लिए 34,543 नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए। इन पर कुल 442.77 करोड़ रुपये की कर्ज सीमा मंजूर की गई।
31 मार्च 2026 तक प्रदेश में कृषि लोन के 8.64 लाख किसान क्रेडिट कार्ड खाते सक्रिय थे। इन खातों पर कुल 8,172.87 करोड़ रुपये की कर्ज सीमा मंजूर थी। वहीं, जम्मू-कश्मीर ग्रामीण बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि लोन के लिए 7,824 नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए। इन पर 61.50 करोड़ रुपये की कर्ज सीमा मंजूर की गई।
ग्रामीण बैंकों के लिए अलग नियम
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. के. एस. महेश की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए भी कृषि लोन के वास्ते पुनर्वित्त के नियम तय किए गए हैं। हालांकि, इन बैंकों की पात्रता की शर्तें राज्य सहकारी बैंकों से अलग हैं। राज्य सहकारी बैंकों के लिए लागू 15 प्रतिशत शुद्ध एनपीए की सीमा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर लागू नहीं होती। ग्रामीण बैंकों को कितनी राशि मिलेगी, यह भी अलग से तय किया जाएगा।