ड्राइवरों की सूझबूझ से सुरक्षित लौटे फंसे अमरनाथ यात्री
ड्राइवरों की सूझबूझ से श्रीनगर में फंसे अमरनाथ यात्री जम्मू पहुंचने लगे हैं और ट्रेनों से अपने घरों को लौट रहे हैं। यात्रियों ने बताया कि घाटी में जिन हालातों में वे फंसे थे, उनको एक पल में लगा कि अब सुरक्षित घर पहुंचना मुश्किल होगा। लेकिन उनके चालकों ने जिन हालातों में सूझबूझ से उनको निकाला, वह काबिलेतारीफ था। जब जम्मू पहुंचे तो राहत की सांस मिली।
आतंकी बुरहान की मौत के बाद घाटी में आठ जुलाई से हालात खराब हैं। कश्मीर में ज्यादातर इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हुए हैं और हर तरफ पत्थरबाजों और पुलिस में टकराव चल रहा है। ऐसे हालात के बीच सैकड़ों अमरनाथ यात्री श्रीनगर और अन्य इलाकों में फंसे हुए हैं।
लखनऊ के जगदीश प्रसाद और धीरज गुप्ता, जबलपुर के अजय श्रीवास, आर्यन गुप्ता ने बताया कि बाबा अमरनाथ के दर्शन करके सभी आठ जुलाई की शाम को श्रीनगर पहुंचे। तभी हालात खराब हो गए और वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई।
सड़कों पर बिखरे थे पत्थर-लकड़ियां
सबको सीआरपीएफ के कैंप के नजदीक होटल में कमरा मिल गया। जहां पहले से ही होटल के हर एक कमरे में छह से सात यात्री रुके हुए थे। होटल के बाहर सिर्फ पत्थरबाज व सुरक्षाबलों के बीच चल रहे टकराव की आवाजें सुनाई देती थीं। कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही थी।
नौ जुलाई को पूरा दिन होटल में दुबक कर निकाला। रात को चालकों ने एक साथ निकलने की योजना बनाई। रात को जब थोड़े हालात शांत हुए तो रात करीब डेढ़ बजे करीब 50 वाहनों का काफिला यात्रियों को लेकर निकला। श्रीनगर में रात को कहीं पर भी कोई सुरक्षा कर्मी नजर नहीं आया और न ही किसी ने कोई मदद की।
सुरक्षित लौटे यात्रियों ने बताया कि जब श्रीनगर से निकले तो सड़कें पत्थर और लकड़ियों से भरी हुई नजर आ रही थीं। कुछ स्थानों पर तो बड़े-बड़े पेड़ काट कर सड़कों पर डाले गए हैं। एक भी वाहन कहीं पर सुरक्षित नजर नहीं आया और जब सुरक्षित जवाहर टनल को पार किया तो राहत की सांस मिली।