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मनमोहन के समय कश्मीर मुद्दा सुलझने के करीब था : मुख्यमंत्री
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प्रदेश की तरक्की की शुरुआत उन्होंने की, मंजिल तक मौजूदा सरकार ने पहुंचाया
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनके कार्यकाल में कश्मीर मुद्दा सुलझने के करीब था।
सीएम ने प्रदेश की तरक्की का श्रेय मनमोहन सिंह को देते हुए कहा कि कार्यों की शुरुआत उन्होंने की और मंजिल तक पहुंचाने का काम मौजूदा केंद्र सरकार ने किया। मनमोहन सिंह के व्यक्तित्व, उनके योगदान का जिक्र करते वक्त सीएम एक बार भावुक भी हुए। उनके अल्फाज का भारीपन इसकी गवाही दे रहा था।सीएम ने कश्मीर को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ के संयुक्त प्रयासों का भी जिक्र किया। कहा, अटलजी व मुशर्रफ के प्रयासों को मनमोहन सिंह ने आगे बढ़ाया। कश्मीर को लेकर जो प्रयास उस वक्त हुए थे, दोनों मुल्क करीब आए थे, अब शायद वैसी कोशिश मैंं जीवनकाल में दोबारा न देख सकूं। एक पहल जो अटलजी व परवेज मुशर्रफ ने की थी, प्रधानमंत्री बनने के बाद वे (मनमोहन सिंह) चाहते तो उसको रोक सकते थे। पर, उन्हें अच्छी तरह पता था कि वाजपेयी की पहल को आगे बढ़ाना बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने आतंकी घटनाओं का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, बिगड़ते हालात के बावजूद सिंह ने ईमानदारी से प्रयास किए।
लाइसेंस-परमिट राज खत्म किया
सीएम ने कहा, कौन सी फैक्ट्री लगेगी, कितनी बड़ी लगेगी, कहां लगेगी, यह फैसला केंद्र सरकार लेती थी। मनमोहन सिंह ने इस लाइसेंस-परमिट राज को खत्म किया। अर्थव्यवस्था को न संभाला होता तो भारत का हाल अफ्रीका के गरीब मुल्कों के जैसा होता।
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कश्मीरी पंडितों के लिए सही मायने में प्रयास किए
सीएम ने कहा, हर कोई कश्मीरी पंडितों के बारे में बात कर रहा है, पर उनके कल्याण के लिए व्यावहारिक कदम सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने उठाए थे। उन्होंने घाटी में समुदाय के लिए नौकरी में आरक्षण की शुरुआत की। जम्मू में जगती टाउनशिप की स्थापना उन्हीं की देन है। सिंह ही हैं, जिन्होंने फोरलेन वाली परियोजना उपहार में दी।
उनसे बहुत कुछ सीखा, गलती स्वीकार करने में वे हिचके नहीं
सीएम ने कहा, उनसे (मनमोहन सिंह) मैंने बहुत कुछ सीखा। कभी उन्होंने ऊंची आवाज में बात नहीं की। मैंने उन्हें एक पत्र लिखा था। उसी पत्र के हवाले से एक इंटरव्यू दिया था। पीएमओ में किसी को गलतफहमी हो गई कि मैंने प्रोटोकाॅल का उल्लंघन करते हुए पीएम को लिखी चिट्ठी का मीडिया में जिक्र कर दिया है। मुझे फोन आया, पीएम ने कहा कि उमर ये ठीक नहीं कि आपने मुझे लिखे पत्र का जिक्र मीडिया में किया है। मैंने कहा कि ऐसा नहीं है, फिर भी आपको लगता है तो मैं माफी चाहता हूं। 15 मिनट बाद फिर फोन आया, कहा कि मैं गलत हूं, आप सही थे। एक वजीर-ए-आजम का इस तरह गलती स्वीकार करना बड़ी बात है। कहा, मनमोहन सिंह ने कहा था कि इतिहास मुझे ज्यादा बेहतर तरीके से याद करेगा। इतने साल बाद उनकी बातों का महत्व समझ में आता है। कौन सा मुल्क है, जो उन्हें याद नहीं करता। अमेरिका से लेकर जापान तक उनका सम्मान करते हैं। जब 2010 में हालात बिगड़े, तो मनमोहन सिंह ने कार्यसमूहों का गठन कर घाव भरने की कोशिश की,चाहे वे राजनीति से संबंधित हों या शासन में सुधार के लिए... और वे अब भी प्रासंगिक हैं। स्थायी शांति के लिए प्रदेश में 5 कार्य समूहों का गठन किया था।
कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली रेल सेवा के उद्घाटन का इंतजार
सीएम ने घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली रेल परियोजना के बारे में भी बात की। कहा, पीएम द्वारा इसके उद्घाटन किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह कुछ दिनों के भीतर हो जाएगा। कहा, इस रेल प्रोजेक्ट की शुरुआत भी मनमोहन सिंह ने की, अफसोस है कि वे नहीं हैं। मौजूदा सरकार ने काम को मंजिल तक पहुंचाया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनके कार्यकाल में कश्मीर मुद्दा सुलझने के करीब था।
सीएम ने प्रदेश की तरक्की का श्रेय मनमोहन सिंह को देते हुए कहा कि कार्यों की शुरुआत उन्होंने की और मंजिल तक पहुंचाने का काम मौजूदा केंद्र सरकार ने किया। मनमोहन सिंह के व्यक्तित्व, उनके योगदान का जिक्र करते वक्त सीएम एक बार भावुक भी हुए। उनके अल्फाज का भारीपन इसकी गवाही दे रहा था।सीएम ने कश्मीर को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ के संयुक्त प्रयासों का भी जिक्र किया। कहा, अटलजी व मुशर्रफ के प्रयासों को मनमोहन सिंह ने आगे बढ़ाया। कश्मीर को लेकर जो प्रयास उस वक्त हुए थे, दोनों मुल्क करीब आए थे, अब शायद वैसी कोशिश मैंं जीवनकाल में दोबारा न देख सकूं। एक पहल जो अटलजी व परवेज मुशर्रफ ने की थी, प्रधानमंत्री बनने के बाद वे (मनमोहन सिंह) चाहते तो उसको रोक सकते थे। पर, उन्हें अच्छी तरह पता था कि वाजपेयी की पहल को आगे बढ़ाना बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने आतंकी घटनाओं का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, बिगड़ते हालात के बावजूद सिंह ने ईमानदारी से प्रयास किए।
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लाइसेंस-परमिट राज खत्म किया
सीएम ने कहा, कौन सी फैक्ट्री लगेगी, कितनी बड़ी लगेगी, कहां लगेगी, यह फैसला केंद्र सरकार लेती थी। मनमोहन सिंह ने इस लाइसेंस-परमिट राज को खत्म किया। अर्थव्यवस्था को न संभाला होता तो भारत का हाल अफ्रीका के गरीब मुल्कों के जैसा होता।
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कश्मीरी पंडितों के लिए सही मायने में प्रयास किए
सीएम ने कहा, हर कोई कश्मीरी पंडितों के बारे में बात कर रहा है, पर उनके कल्याण के लिए व्यावहारिक कदम सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने उठाए थे। उन्होंने घाटी में समुदाय के लिए नौकरी में आरक्षण की शुरुआत की। जम्मू में जगती टाउनशिप की स्थापना उन्हीं की देन है। सिंह ही हैं, जिन्होंने फोरलेन वाली परियोजना उपहार में दी।
उनसे बहुत कुछ सीखा, गलती स्वीकार करने में वे हिचके नहीं
सीएम ने कहा, उनसे (मनमोहन सिंह) मैंने बहुत कुछ सीखा। कभी उन्होंने ऊंची आवाज में बात नहीं की। मैंने उन्हें एक पत्र लिखा था। उसी पत्र के हवाले से एक इंटरव्यू दिया था। पीएमओ में किसी को गलतफहमी हो गई कि मैंने प्रोटोकाॅल का उल्लंघन करते हुए पीएम को लिखी चिट्ठी का मीडिया में जिक्र कर दिया है। मुझे फोन आया, पीएम ने कहा कि उमर ये ठीक नहीं कि आपने मुझे लिखे पत्र का जिक्र मीडिया में किया है। मैंने कहा कि ऐसा नहीं है, फिर भी आपको लगता है तो मैं माफी चाहता हूं। 15 मिनट बाद फिर फोन आया, कहा कि मैं गलत हूं, आप सही थे। एक वजीर-ए-आजम का इस तरह गलती स्वीकार करना बड़ी बात है। कहा, मनमोहन सिंह ने कहा था कि इतिहास मुझे ज्यादा बेहतर तरीके से याद करेगा। इतने साल बाद उनकी बातों का महत्व समझ में आता है। कौन सा मुल्क है, जो उन्हें याद नहीं करता। अमेरिका से लेकर जापान तक उनका सम्मान करते हैं। जब 2010 में हालात बिगड़े, तो मनमोहन सिंह ने कार्यसमूहों का गठन कर घाव भरने की कोशिश की,चाहे वे राजनीति से संबंधित हों या शासन में सुधार के लिए... और वे अब भी प्रासंगिक हैं। स्थायी शांति के लिए प्रदेश में 5 कार्य समूहों का गठन किया था।
कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली रेल सेवा के उद्घाटन का इंतजार
सीएम ने घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली रेल परियोजना के बारे में भी बात की। कहा, पीएम द्वारा इसके उद्घाटन किए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह कुछ दिनों के भीतर हो जाएगा। कहा, इस रेल प्रोजेक्ट की शुरुआत भी मनमोहन सिंह ने की, अफसोस है कि वे नहीं हैं। मौजूदा सरकार ने काम को मंजिल तक पहुंचाया।