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बडगाम उपचुनाव: 370 पर कश्मीर केंद्रित दलों के आक्रामक रुख से नेकां की राह नहीं आसान

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Budgam by-election: NC's path is not easy due to aggressive stance of Kashmir-centric parties on 370
छह महीने में सरकार ने सामाजिक व आर्थिक मुद्दों पर दिया ज्यादा जोर, भावनात्मक मुद्दों पर उतनी मुखर नहीं रही पार्टी
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पीडीपी, जेकेपीसी का नेकां के खिलाफ आक्रामक राजनीतिक से उपचुनाव होगा दिलचस्प
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। नगरोटा और बडगाम विधानसभा सीट पर उपचुनाव सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार की पहली परीक्षा होगी। यह चुनाव नेकां के लिए 2024 के विधानसभा चुनाव जैसा आसान नहीं होगा। विशेष कर बडगाम सीट पर चुनाव पार्टी की साख का सवाल होगा। सरकार ने छह महीने की अपनी सरकार में सामाजिक व आर्थिक मुद्दों पर तो जोर दिया है, लेकिन कश्मीरी मतदाताओं से जुड़े अनुच्छेद 370, राज्य दर्जा बहाली, वक्फ कानून जैसे भावनात्मक मुद्दों को उस तरह से नहीं उठाया, जिस उम्मीद के साथ नेकां को एक तरफा बहुमत दी थी। उधर, इन मुद्दों पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (जेकेपीसी) ने आक्रामक राजनीतिक रुख अपना रखा है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान वक्फ कानून पर चर्चा न होने और जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) के 48 अधिकारियों के तबादलों से राजभवन व सरकार के बीच तनातनी, कमजोर सरकार की छवि के लगे तमगे के बीच यह उपचुनाव नेकां होना है।
छह महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीती थीं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला गांदरबल और बडगाम से चुनाव जीते थे। बडगाम सीट छोड़ने के बाद होने वाले उपचुनाव छह महीने पहले हुए चुनाव जैसे नहीं होंगे। हालांकि सरकार इस चुनाव में जीत से अपने छह महीने के कार्यकाल में किए कार्य पर लोगों की मुहर लगाना चाहेगी। दिवंगत भाजपा नेता देवेंद्र राणा के नेकां छोड़ने के बाद नगरोटा विस सीट पर नेकां का जनाधार वैसे ही नहीं रहा है। ऐसे में बडगाम सीट पर उपचुनाव दिलचस्प होने वाला है। वक्फ कानून पर सदन में चर्चा नहीं होने से कश्मीर केंद्रित विपक्षी दलों द्वारा इस मुद्दे को आक्रामक रूप से उठाने, किरेन रिजिजू के साथ मुख्यमंत्री की तस्वीर को मुद्दा बनाने जैसे मुद्दे ने नेकां की कश्मीरी मतदाताओं के बीच छवि को असर डाला है। यहीं कारण था कि खुद मुख्यमंत्री को सफाई देनी पड़ी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के छात्र संघ सदस्यों ने वक्फ कानून पर चर्चा के लिए नेकां सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी से मुलाकात की।
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जिस तरह पीडीपी ने अनुच्छेद 370, राज्य का दर्जा बहाली, वक्फ कानून को आक्रामक राजनीतिक रुख अपनाया उससे बडगाम का चुनाव काफी दिलचस्प होगा। 2024 में नेकां 370, राज्य दर्जा बहाली जैसे मुद्दों के सहारे सत्ता में आई थी, उसने इन मुद्दों को अभी तक जोरशोर से नहीं उठाया है। नेकां ने सामाजिक व आर्थिक मामलों पर ज्यादा जोर दिया, लेकिन भावनात्मक मुद्दों को नहीं छुआ। कश्मीर की रणनीति सामाजिक व आर्थिक से ज्यादा भावनात्मक मुद्दों पर चलती है, जिसमें अभी तक नेकां विफल होती दिखी है।
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- दिनेश मनहोत्रा, वरिष्ठ पत्रकार
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