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सीमा पर समस्या: अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तारबंदी पार बीएसएफ के बख्तरबंद ट्रैक्टरों से टूट गई खेतों की निशानदेही, किसानों ने कहा- कैसे चलाएं हल 

Mon, 22 Nov 2021 05:06 PM IST
विमल शर्मा अरूण खजूरिया, हीरानगर (कठुआ)
अरूण खजूरिया, हीरानगर (कठुआ) Published by: विमल शर्मा Updated Mon, 22 Nov 2021 05:06 PM IST
सार

हीरानगर में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर तारबंदी के आगे खेती के लिए प्रशासन की ओर से किसानों को प्रेरित करने के बावजूद पूरी जमीन खाली पड़ी है। किसानों का कहना है कि इस जमीन को समतल कर दिया गया है, जिससे हदबंदी टूट चुकी है और उन्हें अपने खेत ढूंढने में परेशानी हो रही है।

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BSF armored tractors broke traces of fields across the international border, farmers said - where to plow
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हीरानगर में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर तारबंदी के आगे खेती के लिए प्रशासन की ओर से किसानों को प्रेरित करने के बावजूद पूरी जमीन खाली पड़ी है। किसानों का कहना है कि इस जमीन को समतल कर दिया गया है, जिससे हदबंदी टूट चुकी है और उन्हें अपने खेत ढूंढने में परेशानी हो रही है। प्रशासन पहले निशानदेही करवाए, उसके बाद ही वे खेती करेंगे। किसानों ने सीमा सुरक्षा बल के लिए सुरक्षा और पुराने मुआवजे की शर्त भी रखी है। 

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करीब 800 कनाल जमीन पर गेहूं की फसल लगाई थी
तारबंदी के आगे पिछले साल सितंबर में तत्कालीन जिला उपायुक्त ओपी भगत ने मनियारी में बीएसएफ के अधिकारियों से बैठक कर तारबंदी के आगे की जमीन पर फसल लगाने का काम शुरू कराया था। करीब 800 कनाल जमीन पर गेहूं की फसल लगाई गई। कटाई भी प्रशासनिक अधिकारियों और किसानों की मौजूदगी में हुई। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार यहां के किसानों से बैठकें कर तारबंदी के आगे खेती शुरू करने की अपील की। किसानों का अब कहना है कि जब तक निशानदेही नहीं होती, खेती नहीं करेंगे। इस जमीन पर निशानदेही की मांग सीमावर्ती किसान जनता दरबार और ब्लॉक दिवस में भी कई बार कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इस पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है।
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हदबंदी टूटने से खेत ढूंढने में हो रही परेशानी : किसान
बॉर्डर यूनियन के अध्यक्ष एवं सरपंच भारत भूषण का कहना है कि तारबंदी के आगे की जमीन समतल कर खेतों की हदबंदियों को तोड़ दिया गया है। जिससे अब किसानों को अपने खेत ढूंढने में परेशानी हो रही है। जब तक उन्हें अपने खेतों की हदबंदी का ही पता नहीं होगा तो वह खेती कैसे करेंगे। ऐसे में अगर कोई किसान अंदाजे से खेती करता है तो जाहिर सी बात है उसके दूसरे किसानों से लड़ाई-झगड़े होंगे।
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पहले निशानदेही, उसके बाद होगी खेती 
इसलिए बेहतर होगा कि प्रशासन पहले यहां निशानदेही कराए। उसके बाद किसान खेती करेंगे। इसी के साथ प्रशासन यह भी सुनिश्चित करे कि यहां खेतों में जाने के लिए किसानों को सुबह से लेकर शाम तक काम के दौरान पूरी सुरक्षा मिले। प्रशासन ने बीएसएफ के सहयोग से जब मनियारी में खेती शुरू कराई थी तो सारा काम कड़ी सुरक्षा के बीच बख्तरबंद ट्रैक्टरों से किया गया था। फसल की कटाई के समय बुलेट प्रूफ गाड़ियों में प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से ले जाया गया था।

शर्तें पूरी किए बगैर खेती नहीं
किसान रतन लाल ने कहा, हम तारबंदी के आगे कुछ शर्तों के साथ खेती करने के लिए तैयार हैं। यहां खेतों की निशानदेही, किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। खेतों में काम करने के लिए किसानों को पर्याप्त समय भी दिया जाए। उन्होंने कहा, 4 वर्ष पहले मेरे भाइयों ने तारबंदी के आगे करीब 24 कनाल जमीन पर सरसों बोई थी, लेकिन जब तैयार हुई तो माहौल खराब होने का हवाला देकर हमें कटाई नहीं करने दी गई, जिससे काफी नुकसान भी हुआ। तारबंदी के आगे जाने-आने के लिए लगे गेटों की दूरी भी कम की जाए। 20 साल का मुआवजा भी किसानों को देना होगा।

कृषि विभाग की ओर से मिलेगी हर संभव मदद
किसानों को प्रेरित करने के लिए ही तारबंदी के आगे बीएसएफ की मदद से खेती करवाई गई थी। कृषि विभाग ने यहां करीब 35 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं बोई। करीब 190 क्विंटल फसल तैयार होकर निकली। जम्मू के कई सीमावर्ती इलाकों में जीरो लाइन पर किसान खेती कर रहे हैं। यहां भी किसानों को खुलकर आगे खेती करनी चाहिए। कृषि विभाग की ओर से उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी। योजनाओं के तहत सब्सिडी में भी प्राथमिकता दी जाएगी। 


-विजय उपाध्याय, जिला कृषि अधिकारी

 

बीएसएफ की ओर से तारबंदी के पार फसल लगाए जाने के दौरान कई जगह जमीन की निशानदेही खत्म हो गई है। जो भी किसान इसके लिए आवदेन कर रहे हैं उन्हें निशानदेही करके दी जा रही है। किसानों को तारबंदी पार फसल लगाने के लिए प्रशासन प्रेरित कर रहा है। साढ़े छह हजार कनाल जमीन पर खेती करवाने के लिए तीन बैठकें सीमावर्ती किसानों के साथ की गई हैं। 
- राहुल यादव, जिला उपायुक्त कठुआ

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