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Jammu News: जीएमसी में ट्रामा रहेगा तो नए अस्पताल में पुराने हड्डियों के रोगाें का होगा इलाज
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। लंबे समय के बाद बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल को दो अक्टूबर से शुरू करने की तैयारी है। चरणबद्ध तरीके से ओपीडी, इंडोर वार्ड और इलेक्टिव सर्जरी की सुविधा मिलेगी। मगर अभी आर्थो मरीजों के पांव दो अस्पतालों में फंसे रहेंगे। ट्रामा चिकित्सा सुविधा के लिए जीएमसी पर निर्भर रहना पड़ेगा। कारण- नए अस्पताल के लिए प्रस्तावित 368 पदों को मंजूरी न मिलना है। 45 करोड़ की परियोजना को दिसंबर 2018 में शुरू किया था, लेकिन विभिन्न कारणों से लगातार निर्धारित लक्ष्य से पीछे रही। अस्पताल में सात ऑपरेशन थियेटर स्थापित किए जाएंगे। पहले चरण में ओपीडी शुरू होगी, जिसके साथ 182 में से 50 बिस्तर स्थापित करने की योजना है। इसके बाद चरणबद्ध इलेक्टिव सर्जरी में ज्वाइंट रिप्लेसमेंस, स्पाइन, बच्चों और बड़ों की आर्थो समस्याएं, पुराने फ्रेक्चर, हाथ, टांग को लंबा करना, मल्टीपल, कंधे की सर्जरी सहित अन्य ऑपरेशन किए जाएंगे। ये सर्जरी योजना के मुताबिक होती है, जबकि ट्रामा में तत्काल सर्जरी की जरूरत होती है, जिसके लिए अभी जीएमसी में व्यवस्था रखी है।
जीएमसी के आर्थो विभाग के पास 3 वार्डों में 170 बिस्तर हैं। स्टाफ के लिए सूचियां तैयार की जा रही हैं। नए अस्पताल के शुरू होने से जीएमसी की आर्थो ओपीडी का लोड खत्म हो जाएगा। इसके अलावा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के कुछ अन्य विभागों को जीएमसी में मेडिसिन विभाग के साथ शिफ्ट करने की योजना है। इसमें खासतौर पर मधुमेह से जुड़े विभाग का विलय किया जाएगा ताकि मरीजों के लिए आर्थो वार्ड के बिस्तर उपलब्ध करवाए जाएं।
बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल को अगले माह से शुरू करने की योजना है। इसके लिए जीएमसी के ही पुराने और अन्य स्टाफ को लगाया जाएगा। नए पद के लिए सचिवालय को लिखा गया है।
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-डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल
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जम्मू। लंबे समय के बाद बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल को दो अक्टूबर से शुरू करने की तैयारी है। चरणबद्ध तरीके से ओपीडी, इंडोर वार्ड और इलेक्टिव सर्जरी की सुविधा मिलेगी। मगर अभी आर्थो मरीजों के पांव दो अस्पतालों में फंसे रहेंगे। ट्रामा चिकित्सा सुविधा के लिए जीएमसी पर निर्भर रहना पड़ेगा। कारण- नए अस्पताल के लिए प्रस्तावित 368 पदों को मंजूरी न मिलना है। 45 करोड़ की परियोजना को दिसंबर 2018 में शुरू किया था, लेकिन विभिन्न कारणों से लगातार निर्धारित लक्ष्य से पीछे रही। अस्पताल में सात ऑपरेशन थियेटर स्थापित किए जाएंगे। पहले चरण में ओपीडी शुरू होगी, जिसके साथ 182 में से 50 बिस्तर स्थापित करने की योजना है। इसके बाद चरणबद्ध इलेक्टिव सर्जरी में ज्वाइंट रिप्लेसमेंस, स्पाइन, बच्चों और बड़ों की आर्थो समस्याएं, पुराने फ्रेक्चर, हाथ, टांग को लंबा करना, मल्टीपल, कंधे की सर्जरी सहित अन्य ऑपरेशन किए जाएंगे। ये सर्जरी योजना के मुताबिक होती है, जबकि ट्रामा में तत्काल सर्जरी की जरूरत होती है, जिसके लिए अभी जीएमसी में व्यवस्था रखी है।
जीएमसी के आर्थो विभाग के पास 3 वार्डों में 170 बिस्तर हैं। स्टाफ के लिए सूचियां तैयार की जा रही हैं। नए अस्पताल के शुरू होने से जीएमसी की आर्थो ओपीडी का लोड खत्म हो जाएगा। इसके अलावा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के कुछ अन्य विभागों को जीएमसी में मेडिसिन विभाग के साथ शिफ्ट करने की योजना है। इसमें खासतौर पर मधुमेह से जुड़े विभाग का विलय किया जाएगा ताकि मरीजों के लिए आर्थो वार्ड के बिस्तर उपलब्ध करवाए जाएं।
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बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल को अगले माह से शुरू करने की योजना है। इसके लिए जीएमसी के ही पुराने और अन्य स्टाफ को लगाया जाएगा। नए पद के लिए सचिवालय को लिखा गया है।
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-डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल