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जम्मू-कश्मीर: शहीद लेफ्टिनेंट और सिपाही के पार्थिव शरीर पैतृक गांव भेजे, दो माह में चार जवान गंवा चुके हैं जान
Sun, 31 Oct 2021 09:56 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Trainee Trainee
Updated Sun, 31 Oct 2021 09:56 PM IST
सार
नौशेरा के कलाल इलाके में बारूदी सुरंग में विस्फोट होने से शनिवार को दो जवान शहीद हो गए थे। सैन्य सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर पैतृक गांव भेज दिए गए हैं। सीमा पर विस्फोट होने से दो माह में चार जवान शहीद हो चुके हैं।
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राजोरी बलास्ट में शहीद लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार और सिपाही मंजीत सिंह।
- फोटो : सेना
विस्तार
नौशेरा के कलाल में बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हुए सेना के लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार और सिपाही मंजीत सिंह के पार्थिव शरीर राजोरी में श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ उनके पैतृक निवास स्थान भेजे गए हैं। लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार के पार्थिव शरीर को राजोरी से हेलिकॉप्टर से उनके पैतृक निवास स्थान बेगूसराय बिहार ले जाया गया है।
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उधर, सिपाही मंजीत के पार्थिव शरीर को पंजाब के होशियारपुर रवाना किया गया है। सेना के लेफ्टिनेंट ऋषि कुमार और सिपाही मंजीत सिंह शनिवार को एलओसी पर कलाल क्षेत्र में पेट्रोलिंग करते समय बारूदी सुरंग के विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए थे। उपचार के दौरान दोनों वीरगति को प्राप्त हुए थे। वहीं इस विस्फोट में घायल एक अन्य जवान का उपचार जारी है।
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बारिश होने के बाद माइन वर्जित इलाके में गश्त करना होता है खतरनाक
बारिश के बाद एलओसी पर गश्त करने वाले जवान माइन की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं। दो महीने में चार जवान शहीद हो चुके हैं। बारिश के बाद माइन वर्जित क्षेत्र में गश्त करना जोखिम भरा होता है, क्योंकि माइन अपनी जगह से इधर-उधर हो सकती है।
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गश्त करते वक्त जवान इसकी लोकेशन नहीं देख पाते और चपेट में आ जाते हैं। सैन्य प्रवक्ता का कहना है कि बारिश के बाद माइन वर्जित क्षेत्र की हालत खराब हो जाती है। कई बार इसमें गश्त करते वक्त गलती हो जाती है।