कश्मीर: BJP करेगी सरकार बनाने का दावा
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खंडित जनादेश के बाद उत्पन्न त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में नेशनल कांफ्रेंस गेम चेंजर की भूमिका में आ गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद खुलकर सियासी खेल में शिरकत का संकेत दिया है। उधर, भाजपा ने छह अन्य विधायकों के बूते सरकार बनाने का दावा पेश करने का मन बनाया है।
नए सियासी समीकरणों के मद्देनजर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी पीडीपी के समक्ष असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। कांग्रेस का आफर स्वीकारने की स्थिति में भी पीडीपी का आंकड़ा बहुमत के लिए जरूरी 44 के अंक से चार पीछे रह जाता है।
निर्दलीय और छोटे दलों से चुनाव पूर्व सहमति बना चुकी भाजपा ने पीडीपी का खेल बिगाड़कर सियासी दबाव बना दिया है। बुधवार दोपहर बाद उमर दिल्ली रवाना हो गए। माना जा रहा है कि वहां भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात हो सकती है।
नेशनल कांफ्रेंस ने दोतरफा सियासी दांव खेला
नेशनल कांफ्रेंस ने बड़ी चतुराई से दोतरफा सियासी दांव खेला है। नेकां ने पीडीपी को बिना शर्त समर्थन की भी पेशकश कर पीडीपी की पहल के लिए गेंद उनके पाले में डाल दी है। दूसरी ओर नेकां का भाजपा से भी संपर्क बना हुआ है। भाजपा को छह अन्य विधायकों का समर्थन मिलना लगभग तय है।
हालांकि, इनमें से दो नेकां के समर्थन से जीते हैं इसलिए उनका संपर्क उमर से बना हुआ है। निर्दलीय और अन्य की सूची में शुमार छह विधायकों का पीडीपी से संपर्क काटने के भी इंतजाम कर लिए गए हैं।
इनमें से चार के फोन स्वीच आफ हो गए हैं और जीत के बाद पीडीपी उनसे संपर्क नहीं कर पाई है। नेकां के सूत्रों की मानें तो उमर को केंद्रीय मंत्री के पद का आफर आ रहा है लेकिन, नेकां अपनी शर्तों पर ही कोई कदम उठाएगी।
इस बार इतिहास ने कुछ अर्थों में खुद को दोहराया
इस बार इतिहास ने कुछ अर्थों में खुद को दोहराया है। 12 साल पहले 2000 में नेकां उसी स्थिति में थी जिस स्थिति में आज पीडीपी है। तब नेकां के 28 विधायक थे। आज यही संख्या पीडीपी के पास है। तब 16 विधायकों के बूते पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए थे और नेकां को विपक्ष में बैठना पड़ा था।
उमर ने उस स्थिति की चर्चा करते हुए कहा है कि उस समय नेकां चुप रह गई थी लेकिन अभी चुप रहने के मूड में नहीं है। उधर, नेकां के प्रवक्ता जुनैद मट्टू ने कहा है कि हमने साफ कर दिया है कि अगर पीडीपी हमसे समर्थन मांगती है तो हम विचार करेंगे। अब फैसला उन्हें करना है कि पीडीपी राष्ट्रीय दलों के साथ जाना चाहती है या नेकां के समर्थन की इच्छा रखती है।
कार्यकारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी साफ कर दिया है कि वह नई सरकार के गठन में सक्रिय भूमिका अदा करेंगे। सरकार बनाने की पहली जिम्मेदारी पीडीपी और भाजपा पर है। नेकां वेट एंड वाच कर रही है। नेकां कम सीटों से भी खुश है लेकिन पीडीपी 28 सीट पाकर भी असंतुष्ट है। उमर ने दावा किया कि उनके साथ दो निर्दलीय हैं। इस तरह उनके विधायकों की संख्या 17 है।
निर्दलीयों पर दारोमदार
उन्होंने कहा कि वह किसी को समर्थन दे सकते हैं जो उनकी शर्तें मान लें। शर्त्तें वह वार्ताकार को ही बताएंगे। उन्होंने माना कि पहले भाजपा के राम माधव से उनकी बातचीत हुई थी।
उधमपुर से जीते निर्दलीय पवन गुप्ता ने कहा है कि वह उसे समर्थन देंगे जो उधमपुर के विकास के लिए एक हजार करोड़ देगा। पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन और बशीर अहमद का समर्थन भाजपा को मिलना तय है।
खान साहिब से जीते हकीम मो. यासिन शाह की राम माधव से बातचीत हो चुकी है। झंस्कार से निर्दलीय जीते विधायक सैयद बशीर रिजवी नेकां समर्थक माने जाते हैं।