बरसात में रहें सावधान, दूषित पानी बिगाड़ रहा सेहत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरसात ने तबाही मचाने के साथ सेहत भी ढीली कर दी है। इस मौसम में दूषित पानी से डायरिया और डिहाइड्रेशन की शिकायत बढ़ी है। इससे शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के लोग प्रभावित हो रहे हैं। पेट संबंधी बीमारियों के लिए दूषित पानी बड़ा कारण बन रहा है। प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा बदतर रहते हैं।
स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. बलजीत सिंह पठानिया के अनुसार डायरिया और अन्य दूसरी बीमारियों की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर उचित इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा लोगों में जागरूकता को भी बढ़ाया जा रहा है। बरसात में सबसे ज्यादा डायरिया सक्रिय रहता है।
दूषित पानी का सेवन करने से उल्टी और दस्त के साथ हल्के बुखार की शिकायत रहती है। डायरिया के लक्षण में एक ही दिन में तीन से ज्यादा बार दस्त आना रहता है। इसमें दस्त पहले और बाद में किस तरह से आई, उस पर भी डायरिया निर्भर करता है। बच्चों को रोटा वारयस आम तौर पर अपनी चपेट में लेता है। इसी तरह डिहाइड्रेशन की शिकायत भी बढ़ी है।
बचाव
1. पानी को उबाल कर पिएं
2. पानी का सेवन करने से पहले उसकी जांच कर ले
3. नियमित उल्टी-दस्त को गंभीरता से लें
4. दूध से बने पदार्थ सही तापमान में रखें
बरसात में चर्म रोग बढ़े
बरसात में चर्म रोगों की समस्या बढ़ी है। इसमें बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। गुमोरिया (पित), फोड़े फुंसियां, फंगल इंफेक्शन से कई तरह से चर्म रोगों से पीड़ित लोग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। एसएमजीएस अस्पताल के स्किन यूनिट में ऐसे रोगों से पीड़ित होकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।
त्वचा यूनिट के एचओडी डॉ. देवराज डोगरा के अनुसार बरसात में गुमोरिया, फंगस इंफेक्शन और फोड़े फुंसियों की शिकायत ज्यादा रहती है। उमस से शरीर के बाहरी हिस्सों में खारिश करने पर जख्म बन जाते हैं, जो फोड़े फुंसियों में तब्दील हो जाते हैं। फोड़े फुंसियां होने से बच्चे ज्यादा चपेट में आते हैं।
नियमित रूप से फोड़े फुंसियों के निकलने पर इसका असर किडनी पर भी पड़ता है। इसी तरह फंगस इंफेक्शन का भी जोर है। खासकर टाइट कपड़े और अंडर गारमेंट को नियमित न बदलने से यह समस्या आती हैं। खारिश के साथ रिंग आकार के जख्म बन जाते हैं, जो शरीर के निचले हिस्सों को ज्यादा प्रभावित करते हैं।
इसके अलावा कीड़े मकोड़ों से होने वाली एलर्जी का भी काफी जोर है। रात के समय ऐसे जीवों का ज्यादा हमला रहता है। यह एलर्जी शरीर के प्रभावित हिस्से में बुरी तरह से इंफेक्शन फैला देती है।